{"_id":"605909318ebc3e8d2d439658","slug":"dhan-dhan-tero-bhaag-pritam-ghar-aaye-play-in-tagore-theatre-chandigarh-news-pkl4080430126","type":"story","status":"publish","title_hn":"‘धन-धन तेरो भाग प्रीतम घर आए’ से पूर्णिमा ने जमाया रंग","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
‘धन-धन तेरो भाग प्रीतम घर आए’ से पूर्णिमा ने जमाया रंग
विज्ञापन
चंडीगढ़। भास्कर राव नृत्य व संगीत सम्मेलन के आखिरी दिन बंगलूरू की पूर्णिमा भट्ट कुलकर्णी ने प्रस्तुति दी। वहीं दूसरे भाग में गुरु कमलिनी दत्ता द्वारा निर्देशित रंगों पर अंतरआत्मा पेश किया। भास्कर राव नृत्य व संगीत सम्मेलन सात दिन तक चला। इसमें देश भर से कलाकाराें ने अपनी शानदार प्रस्तुतियां दीं।
आखिरी दिन टैगोर थिएटर में पहली प्रस्तुति पूर्णिमा भट्ट कुलकर्णी की रही। उन्हाेंने कार्यक्रम की शुरुआत राग पूरीया कल्याण से की। इसमें अलाप के बाद विलम्बित एक ताल की बंदिश ‘आवन लगी सांझ भई’ पेश की। इसके बाद द्रुत बंदिश में ‘धन-धन तेरो भाग प्रीतम घर आए’ पेश की। इसके पश्चात इन्होंने तराना पेश किया। कार्यक्रम के अंत में इन्होंने राग खमाज में निबद्ध होरी पेश की। इसमें ‘खेलो नंदलाल संग रंगभरी होली’ पेश करके तालियां बटोरीं। इनके साथ मंच पर हारमोनियम पर पैरोमिता मुखर्जी और तबले पर दुर्जय भौमिक ने संगत की।
पूर्णिमा ने ऊषा दातार से सीखीं संगीत की बारीकियां
पूर्णिमा कुलकर्णी धारवाड़ की सधी हुई शास्त्रीय गायिका हैं। इन्होंने संगीत की प्रारंभिक शिक्षा ऊषा दातार से प्राप्त की। उपरांत संगीत की बारीकियां पद्मभूषण पंडित बसावाराज राजगुरु से ली। कार्यक्रम के दूसरे भाग में गुरु कमलिनी दत्ता द्वारा निर्देशित रंगों पर अंतरआत्मा की स्टेज पर उनके चार कलाकारों ने शानदार प्रस्तुति दी। इसमें नृत्य नाटिका के माध्यम से शिव एवं शक्ति के मिलन से प्रकृति के विस्तार एवं प्रसार का वर्णन किया गया है। इस नृत्य में दिव्या गोस्वामी (कत्थक), पूर्वाधनाश्री (भरतनाट्यम), डॉ. एस वासुदेवन (भरतनाट्यम) और हेमंत कुमार कलिता (कथक) ने प्रस्तुति दी।
विज्ञापन
विज्ञापन
आखिरी दिन टैगोर थिएटर में पहली प्रस्तुति पूर्णिमा भट्ट कुलकर्णी की रही। उन्हाेंने कार्यक्रम की शुरुआत राग पूरीया कल्याण से की। इसमें अलाप के बाद विलम्बित एक ताल की बंदिश ‘आवन लगी सांझ भई’ पेश की। इसके बाद द्रुत बंदिश में ‘धन-धन तेरो भाग प्रीतम घर आए’ पेश की। इसके पश्चात इन्होंने तराना पेश किया। कार्यक्रम के अंत में इन्होंने राग खमाज में निबद्ध होरी पेश की। इसमें ‘खेलो नंदलाल संग रंगभरी होली’ पेश करके तालियां बटोरीं। इनके साथ मंच पर हारमोनियम पर पैरोमिता मुखर्जी और तबले पर दुर्जय भौमिक ने संगत की।
विज्ञापन
पूर्णिमा ने ऊषा दातार से सीखीं संगीत की बारीकियां
पूर्णिमा कुलकर्णी धारवाड़ की सधी हुई शास्त्रीय गायिका हैं। इन्होंने संगीत की प्रारंभिक शिक्षा ऊषा दातार से प्राप्त की। उपरांत संगीत की बारीकियां पद्मभूषण पंडित बसावाराज राजगुरु से ली। कार्यक्रम के दूसरे भाग में गुरु कमलिनी दत्ता द्वारा निर्देशित रंगों पर अंतरआत्मा की स्टेज पर उनके चार कलाकारों ने शानदार प्रस्तुति दी। इसमें नृत्य नाटिका के माध्यम से शिव एवं शक्ति के मिलन से प्रकृति के विस्तार एवं प्रसार का वर्णन किया गया है। इस नृत्य में दिव्या गोस्वामी (कत्थक), पूर्वाधनाश्री (भरतनाट्यम), डॉ. एस वासुदेवन (भरतनाट्यम) और हेमंत कुमार कलिता (कथक) ने प्रस्तुति दी।
विज्ञापन