चौथा मिलिट्री लिटरेचर फेस्टिवल आज से, रक्षामंत्री राजनाथ सिंह करेंगे उद्घाटन, इन विषयों पर होगी चर्चा
- चीन-पाकिस्तान से तनाव और सैन्य नेतृत्व पर बात रखेंगे देश के रक्षा विशेषज्ञ
- आज से शुरू होगा तीन दिवसीय राष्ट्रीय मिलिट्री लिटरेचर फेस्टिवल-2020
- कोविड-19 की वजह से वर्चुअल होगा आयोजन, 13 मुद्दों पर होगी चर्चा
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आज से राष्ट्रीय स्तर के चौथे मिलिट्री लिटरेचर फेस्टिवल का आगाज होगा। हरियाणा, पंजाब, हिमाचल समेत विभिन्न राज्यों के सेवारत व पूर्व जवान और अफसरों समेत रक्षा विशेषज्ञ इस फेस्टिवल में भाग लेंगे। इस समारोह में चीन व पाकिस्तान से चल रहे मौजूदा तनाव, लद्दाख की स्थिति से लेकर वर्तमान परिदृश्य में सैन्य नेतृत्व पर चर्चा होगी।
रक्षामंत्री राजनाथ सिंह इस लिटरेचर फेस्ट का उद्घाटन करेंगे। जबकि समापन समारोह की अध्यक्षता पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह करेंगे। कोविड-19 की वजह से इस बार तीन दिवस ये समारोह पूरी तरह वर्चुअल होगा। इस समारोह में सभी रक्षा विशेषज्ञ वर्चुअल ही पैनल चर्चा करेंगे।
पंजाब के मुख्यमंत्री के वरिष्ठ सलाहकार लेफ्टिनेंट टीएस शेरगिल ने बताया कि शुक्रवार से शुरू होने वाला ये फेस्टिवल ‘जय जवान, जय किसान’ के नारे के साथ शुरू होगा। इस फेस्टिवल में पाकिस्तान के विरुद्ध 1971 जंग की कहानी भी बयां की जाएगी। अगले साल इस युद्ध की गोल्डन जुबली है। उन्होंने बताया कि ये फेस्टिवल न केवल पूरे देश के लिए अहमियत रखता है। बल्कि विदेशी रक्षा विशेषज्ञ भी इस पैनल चर्चा में जुड़ेंगे। इस दौरान विभिन्न विषयों पर 13 चर्चाएं होंगी।
जनरल शेरगिल ने बताया कि यह समारोह एमएलएफ (मिलिट्री लिटरेचर फेस्टिवल) की वेबसाइट, फेसबुक, यूट्यूब और सोशल मीडिया के अन्य प्लेटफार्मों पर पूरी दुनिया के दर्शकों के लिए सीधा प्रसारित किया जाएगा। इसके साथ ही यह फेस्टिवल प्रसिद्ध रक्षा अधिकारियों, विषय माहिरों और राजनीतिक नेताओं की तरफ से रणनीतिक क्षेत्रीय और राष्ट्रीय महत्ता के विषयों पर विचार-विमर्श को बढ़ावा देने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर का मंच पेश करेगा।
जोश और जज्बे के सात एपिसोड
फेस्टिवल में जोश और जज्बे वाले सात एपिसोड के अलावा 85 से अधिक प्रसिद्ध वक्ताओं और माहिरों की तरफ से तीन पुस्तकों पर भी चर्चा भी की जाएगी। उन्होंने कहा कि एमएलएफ की वेबसाइट को पहले ही दुनिया भर के 16 लाख दर्शकों द्वारा देखा और पसंद किया जा रहा है। इस दौरान कलेरियन कॉल थिएटर का आयोजन भी वर्चुअल ही होगा। जिसमें इंडो-चीन वार, लेगेसी ऑफ सिख सोल्जर इत्यादि विषयों पर लघु फिल्में दिखाईं जाएंगी।
इन विषयों पर चर्चा करेंगे विशेषज्ञ
फेस्टिवल में ‘जय जवान जय किसान - जवानों की जीत, किसानों की जीत’, ‘आज के समय के लिए मिलिट्री लीडरशिप’, ‘लद्दाख में झड़प’, ‘रक्षा
तैयारी के प्रति आत्मनिर्भरता’, ‘इंडियन आर्मी इन इटली-द्वितीय विश्व युद्ध’, ‘बॉलीवुड एंड शौपिंग द नेशन’, ‘क्रॉसिंग द रिवर मेघना-1971 विक्टरी’, ‘उभर रहे इंडो-पैसिफिक नेवल अलायंस’ के अलावा तालिबान के आने संबंधी महत्वपूर्ण विषयों पर पैनल चर्चा होगी। इस दौरान बॉलीवुड और राष्ट्र संबंधी विचार-विमर्श को नया रूप देने का केंद्र बनेंगे।
पंजाब के सीएम कैप्टन अमरिंद्र सिंह समेत लेफ्टिनेंट जनरल एचएस पनाग (सेवामुक्त), पूर्व वायुसेना प्रमुख बीएस धनोआ, एडमिरल सुनील लांबा, सांसद शशि थरूर, मनीष तिवारी, राकेश सिन्हा, बृजेंद सिंह, महूआ मोइत्रा और राजीव चंद्रशेखर के अलावा डॉ. सी राजामोहन, गुल पनाग, मोना अम्बेगाओंकर समेत अन्य लोग अपने विचार रखेंगे। इस अवसर पर मेजर जनरल टीपीएस वड़ैच, कर्नल टीएस धालीवाल, कर्नल एनकेएस बराड़, फेस्टिवल निदेशक मनदीप बाजवा के अलावा सलाहकार करनवीर सिंह शामिल रहे।
टीआरपी के लिए हदें पार न करे बॉलीवुड
फेस्टिवल के चेयरमैन एवं पंजाब के मुख्यमंत्री के वरिष्ठ सलाहकार लेफ्टिनेंट जनरल टीएस शेरगिल ने बॉलीवुड अभिनेता अनिल कपूर द्वारा आगामी फिल्म ‘एके वर्सेज एके’ में एयरफोर्स की वर्दी पहनकर अपशब्दों का इस्तेमाल करने की कड़े शब्दों में निंदा की है। जनरल शेरगिल ने कहा कि बॉलीवुड को टीआरपी के चक्कर में अपनी हदें नहीं भूलनी चाहिए। यदि कोई अभिनेता किसी सैन्य बल के जवान व अफसर की भूमिका निभाता है तो उसे इंडियन आर्म्ड फोर्सेस की शान का ध्यान रखना होगा। अपने किसी कर्मी सैन्य बलों की छवि धूमिल नहीं होनी चाहिए। लिहाजा इस सीन को भी इस फिल्म से हटाया जाना चाहिए। इससे पहले भी अनिल कपूर की इसी सीन पर इंडियन एयरफोर्स समेत कई आला अफसर व पूर्व अफसर कड़ा एतराज जता चुके हैं।