फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   decision regarding pregnancy is mother right father consent not necessary says High Court

गर्भ पर निर्णय मां का अधिकार: पिता की सहमति जरूरी नहीं, हाईकोर्ट ने युवती को दी गर्भपात की अनुमति

Fri, 02 Jan 2026 08:48 AM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Fri, 02 Jan 2026 08:48 AM IST
सार

महिला का विवाह पिछले साल मई में हुआ था। दंपती के वैवाहिक संबंध तनावपूर्ण थे। तलाक की कार्यवाही चल रही है। ऐसे में महिला अनचाहे गर्भ को गिराने की याचिका लेकर हाईकोर्ट पहुंची थी। 

विज्ञापन
decision regarding pregnancy is mother right father consent not necessary says High Court
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने महिलाओं की शारीरिक स्वायत्तता और व्यक्तिगत स्वतंत्रता को सांविधानिक संरक्षण देते हुए एक मानवीय फैसला दिया है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि गर्भ पर महिला की इच्छा और सहमति ही सर्वोपरि है। हाईकोर्ट ने कहा कि गर्भ गिराने के लिए पिता की अनुमति न तो आवश्यक है और न ही कानून इसकी मांग करता है।

विज्ञापन


जस्टिस सुवीर सहगल ने फतेहगढ़ साहिब निवासी 21 वर्षीय युवती की याचिका को स्वीकार करते हुए उसे 16 सप्ताह के गर्भ को समाप्त करने की अनुमति दे दी। 

चल रही है तलाक की कार्यवाही

याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया था कि उसका विवाह 2 मई 2025 को हुआ लेकिन विवाह के तुरंत बाद ही वैवाहिक संबंध अत्यंत तनावपूर्ण हो गए। पति के साथ संबंधों में गंभीर खटास के चलते दोनों के बीच तलाक की कार्यवाही चल रही है। इस वजह से वह लंबे समय से मानसिक अवसाद और चिंता से गुजर रही है। ऐसे हालात में अनचाही गर्भावस्था ने उनकी मानसिक स्थिति को और अधिक गंभीर बना दिया है। 

विज्ञापन


कोर्ट के समक्ष अब यह प्रश्न था कि क्या गर्भपात के लिए महिला के पति की सहमति आवश्यक है। कोर्ट ने दो टूक कहा कि कानून में कहीं भी पति की सहमति का कोई प्रावधान नहीं है। कोर्ट ने कहा कि विवाहित महिला यह तय करने की सर्वश्रेष्ठ निर्णायक है कि वह गर्भावस्था जारी रखना चाहती है या उसे समाप्त करना चाहती है। हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता एक सप्ताह के भीतर पीजीआई चंडीगढ़ या किसी अन्य अधिकृत अस्पताल से सुरक्षित तरीके से गर्भपात करवा सकती है।

विज्ञापन
विज्ञापन

महिला गर्भपात के लिए फिट: मेडिकल बोर्ड

कोर्ट ने पीजीआई चंडीगढ़ को निर्देश दिया था मेडिकल बोर्ड गठित कर याची की जांच करते हुए बताया जाए कि गर्भपात चिकित्सकीय रूप से संभव और सुरक्षित है या नहीं। बोर्ड ने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता की गर्भावस्था 16 सप्ताह और 1 दिन की है। गर्भ में मौजूद भ्रूण में किसी प्रकार की जन्मजात विकृति नहीं है। महिला छह महीने से अवसाद और चिंता के लक्षणों से पीड़ित है। हालांकि वह मानसिक रूप से इतनी सक्षम है कि स्वतंत्र रूप से अपनी सहमति दे सके। महिला चिकित्सकीय रूप से गर्भपात के लिए पूरी तरह फिट है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed