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चुनाव कार्यक्रम तय करें, नहीं तो मुख्य सचिव को किया जाएगा तलब: हाईकोर्ट
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फरीदाबाद नगर निगम चुनाव में देरी पर हाईकोर्ट का कड़ा रुख
स्थानीय निवासी ने चुनाव करवाने की मांग को लेकर दाखिल की है याचिका
चंडीगढ़। फरीदाबाद नगर निगम चुनाव में देरी से नाराज पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि या तो सरकार चुनाव कार्यक्रम तय करे या फिर न्यायालय मुख्य सचिव को संवैधानिक लापरवाही के लिए तलब करेगा। फरीदाबाद निवासी पारस भारद्वाज ने याचिका दाखिल करते हुए बताया कि नियम के अनुसार फरीदाबाद नगर निगम के चुनाव जनवरी 2022 में करवाए जाने चाहिए थे। यह भी प्रावधान है कि चुनाव की नई परिसीमन प्रक्रिया चुनाव की नियत तिथि से छह महीने पहले पूरी हो जानी चाहिए और यदि यह इस अवधि में पूरी नहीं होती है, तो चुनाव पुराने परिसीमन के अनुसार करवाए जाने चाहिए। मौजूदा मामले में सरकार ने फरवरी 2022 में परिसीमन प्रक्रिया शुरू की थी, जो पूरी तरह से नियमों के खिलाफ है और एमसी चुनावों में देरी करने का स्पष्ट प्रयास है। बाद में राज्य सरकार ने चुनाव कराने में देरी के लिए कोविड-19 प्रतिबंधों की दलील भी दी। इस पर याचिकाकर्ता ने कोविड-19 अवधि के दौरान देश के विभिन्न हिस्सों में हुए करीब 54 अलग-अलग चुनावों का ब्योरा पेश किया था। आखिरकार इस साल अगस्त में राज्य के अधिकारियों ने कहा था कि वह नवंबर में चुनाव कराएंगे। हालांकि, जब मामला सुनवाई के लिए आया तो अधिकारी चुनाव कार्यक्रम की प्रति पेश करने में विफल रहे। हाईकोर्ट ने कहा कि चुनाव 12 फरवरी, 2017 को हुए थे और इस बात पर कोई विवाद नहीं है कि निर्वाचित निकायों के कार्यों का निर्वहन करने के लिए प्रशासक की नियुक्ति 2 फरवरी, 2022 को ही कर दी गई है।
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स्थानीय निवासी ने चुनाव करवाने की मांग को लेकर दाखिल की है याचिका
चंडीगढ़। फरीदाबाद नगर निगम चुनाव में देरी से नाराज पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि या तो सरकार चुनाव कार्यक्रम तय करे या फिर न्यायालय मुख्य सचिव को संवैधानिक लापरवाही के लिए तलब करेगा। फरीदाबाद निवासी पारस भारद्वाज ने याचिका दाखिल करते हुए बताया कि नियम के अनुसार फरीदाबाद नगर निगम के चुनाव जनवरी 2022 में करवाए जाने चाहिए थे। यह भी प्रावधान है कि चुनाव की नई परिसीमन प्रक्रिया चुनाव की नियत तिथि से छह महीने पहले पूरी हो जानी चाहिए और यदि यह इस अवधि में पूरी नहीं होती है, तो चुनाव पुराने परिसीमन के अनुसार करवाए जाने चाहिए। मौजूदा मामले में सरकार ने फरवरी 2022 में परिसीमन प्रक्रिया शुरू की थी, जो पूरी तरह से नियमों के खिलाफ है और एमसी चुनावों में देरी करने का स्पष्ट प्रयास है। बाद में राज्य सरकार ने चुनाव कराने में देरी के लिए कोविड-19 प्रतिबंधों की दलील भी दी। इस पर याचिकाकर्ता ने कोविड-19 अवधि के दौरान देश के विभिन्न हिस्सों में हुए करीब 54 अलग-अलग चुनावों का ब्योरा पेश किया था। आखिरकार इस साल अगस्त में राज्य के अधिकारियों ने कहा था कि वह नवंबर में चुनाव कराएंगे। हालांकि, जब मामला सुनवाई के लिए आया तो अधिकारी चुनाव कार्यक्रम की प्रति पेश करने में विफल रहे। हाईकोर्ट ने कहा कि चुनाव 12 फरवरी, 2017 को हुए थे और इस बात पर कोई विवाद नहीं है कि निर्वाचित निकायों के कार्यों का निर्वहन करने के लिए प्रशासक की नियुक्ति 2 फरवरी, 2022 को ही कर दी गई है।