हरियाणाः घर से बुलाकर मारी थीं छत्रपति को 4 गोलियां, ऐसा था राम रहीम का खौफ
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सांध्य दैनिक पूरा सच के संपादक रामचंद्र छत्रपति 24 अक्तूबर 2002 को सुबह करीब 11 बजे अपने कार्यालय पहुंचे थे। शाम करीब साढ़े पांच बजे रिपोर्टरों को वेतन बांटने के बाद घर के लिए निकले थे। पुरानी खैरपुर चौकी स्थित घर पहुंचने के बाद वह छोटी बेटी व पत्नी से बातचीत कर रहे थे। इसी दौरान एक शख्स ने रामचंद्र का नाम लेकर बाहर से आवाज लगाई।
छत्रपति जैसे ही बाहर आए सामने खड़े दो लोगों में से एक ने रामचंद्र पर रिवाल्वर से गोलियां चला दीं। चार गोलियां लगते ही छत्रपति गिर पड़े। गोलियों की आवाज सुनकर बाहर आए परिवार के लोगों ने रामचंद्र को संभाला। इस बीच दोनों हमलावर फरार होने लगे तो खैरपुर चौकी के पास मौजूद दो पुलिसकर्मियों ने उन्हें दबोच लिया।
इसके बाद पता चला कि दोनों हमलावर डेरा सच्चा सौदा अनुयायी हैं। गोली मारने वाले की पहचान कुलदीप सिंह रूप में हुई। पुलिस ने दोनों हमलावरों के पास से वॉकी-टॉकी और रिवाल्वर बरामद किया। इसके बाद रामचंद्र को उनके बड़े पुत्र अंशुल व अन्य परिवार वालों ने सिविल अस्पताल पहुंचाया। छत्रपति की हालत नाजुक देख डॉक्टरों ने उन्हें रोहतक पीजीआई रेफर कर दिया।
बताते हैं कि जिस एंबुलेंस में घायल छत्रपति को लेकर जाना था, उसमें बैठने की हिम्मत छत्रपति के करीबी साथियों की भी नहीं हो रही थी। सभी को डर था कि रास्ते में डेरा अनुयायी हमला कर सकते हैं। इसी बीच वरिष्ठ पत्रकार आरके भारद्वाज एंबुलेंस से रोहतक गए। छत्रपति परिवार ने प्रशासन से रोहतक पीजीआई में रामचंद्र के मजिस्ट्रेट समक्ष बयान दर्ज करने की गुजारिश की, लेकिन प्रशासन ने ऐसा नहीं किया।
रोहतक पीजीआई में दाखिल रहते छत्रपति मिलने आने वाले हर शख्स से बातचीत करते थे। कुछ दिनों बाद उन्हें रोहतक से दिल्ली अपोलो अस्पताल रेफर कर दिया गया। अपोलो में 28 दिन बाद 21 नवंबर 2002 को छत्रपति की मौत हो गई। छत्रपति का शव सिरसा लाया गया तो सम्मान में पूरा शहर उमड़ पड़ा।
शहर के सभी दुकानदारों और व्यापारियों ने अपने संस्थान बंद रखे। छत्रपति की शव यात्रा में पांच हजार से अधिक लोग शामिल हुए। सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार शिवपुरी में किया गया।
छत्रपति के छोटे पुत्र अरिदमन ने दी थी डेरा मुखी के खिलाफ शिकायत
हमला होने के बाद रामचंद्र के छोटे पुत्र अरिदमन ने शहर थाना पुलिस को डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम के खिलाफ शिकायत दी थी। पुलिस ने हमला करने में शामिल रहे तीन डेरा अनुयायियों पर हत्या का केस तो दर्ज कर लिया, लेकिन गुरमीत राम रहीम के खिलाफ केस दर्ज नहीं किया। पुलिस ने आनन-फानन में चार्जशीट फाइल कर सिरसा कोर्ट में चालान पेश कर दिया।
सिरसा के तत्कालीन अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश आरएस बागड़ी की कोर्ट में केस का ट्रायल शुरू हो गया। गुरमीत को उसकी करनी की सजा दिलाने के लिए अंशुल ने हाईकोर्ट में सीबीआई जांच के लिए याचिका दायर की। 10 नवंबर 2003 को हाईकोर्ट ने सीबीआई जांच के आदेश दिए।