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रामपाल बोला, जेल में महिला कैदियों से ठुमके लगवाते हैं जेलर

Thu, 04 Jun 2015 06:11 PM IST
जितेंद्र सहारण/अमर उजाला, हिसार(हरियाणा)
जितेंद्र सहारण/अमर उजाला, हिसार(हरियाणा) Updated Thu, 04 Jun 2015 06:11 PM IST
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sensational allegation of sant rampal on hisar jailer

कबीर जयंती के बहाने कथित संत और देशद्रोह का केस में हरियाणा के जेल में बंद रामपाल की ओर से पुलिस और जेल प्रशासन पर हमला बोला गया है। समर्थकों को जहां पंपलेट बांटकर बरवाला घटना की सच्चाई सामने लाने का दावा किया, वहीं किताब में जेल में चल रहे महिलाओं के नाच का खुलासा किया गया है।

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किताब में हालांकि प्रकाशक और मुद्रक का नाम नहीं है, लेकिन जिस तरह हजारों की संख्या में यह किताब शहर में बांटी गई है, उससे पुलिस और जेल प्रशासन के होश उड़े हैं। अनुयायियों ने ‘बरवाला की घटना की सच्चाई’ शीर्षक नाम से बुक वितरण की है। बुक में उन्होंने रामपाल को निर्दोष बताया है।
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किताब जेल में बंद रामपाल के अनुयायियों को आधार बनाकर छापी गई है कि सेंट्रल जेल टू में बंद कैदियों पर जेल अधीक्षक शमेशर सिंह दहिया ने खूब अत्याचार किए। उन्हें खूब लूटा-पीटा गया। जेल सुपरिंटेंडेंट को उन्होंने जल्लाद की उपाधि दी है। बुक में छापा गया है कि जेल अधीक्षक महिला कैदियों को नचाता है। उनके साथ अश्लील हरकतें तक की जाती हैं।
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बुक में छपा है कि अधीक्षक जब सेंट्रल जेल वन में थे तो उन्होंने बंसल नाम के एक सेठ से 2 लाख रुपये मांगे थे। सेठ किसी मामले में बंद था। जब तक उसने रुपये नहीं भिजवाए, अधीक्षक ने उसे टॉयलेट वाले डिब्बे में खाना दिया। मामले की शिकायत कर उसने सेंट्रल टू में बदली करवा ली। मामले की जांच सीपीओ चंडीगढ़ सतेंद्र गोदारा ने की थी, मगर अभी तक उसकी शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं हो पाई।

दहिया के मकान पर फायरिंग की थी साजिश

sensational allegation of sant rampal on hisar jailer

किताब में जो सामग्री छापी गई है, उसमें हाल ही में सुपरिंटेंडेंट शमशेर सिंह दहिया के मकान पर हुई फायरिंग मामले में लिखा गया है। बताया गया कि दहिया ने दो गनमैन ले रखे थे। सरकार ने इसके गनमैन वापस ले लिए। गनमैन वापस लेने के लिए उसने ड्रामा रचा और 27 अप्रैल को अपने जानकार से घर के बाहर फायरिंग करवा दी। सुबह पुलिस को बुलाकर खाली कारतूस के खोल दिखाए और जान का खतरा बताया।

कैदियों के बर्तन बेचे, महंगे रेट में दिए: जेल अधीक्षक पर सब कैदियों के स्टील और पीतल के बर्तन बेचने का आरोप भी लगाया गया है। सभी कैदियों के उन्होंने दो ट्रक में भरकर बर्तन बिकवा दिए और रुपये अपनी जेब में डाल लिए। फिर घटिया धातु के बर्तन मंगवाकर 100 रुपये वाले पतीले एक-एक कैदी को 5-5 सौ रुपये में बेचे। इतना ही नहीं कैंटीन से अधीक्षक हर महीना 4 लाख रुपये लेता था, बंदियों को पीट-पीटकर उनसे प्रति महीना 6 लाख रुपये लेता था।

20 रुपये वाले प्याज 100 रुपये में
: बंदियों के दूध, चावल, अंडे खरीद के लिए सरकार के रुपये में से 2 लाख रुपये महीना अपनी जेब में रखता था। दूसरे तरीके से 20 रुपये किलो प्याज खरीदवाकर उन्हें बंदियों को 100 रुपये प्रति किलो के हिसाब से बिकवाता था।

शमशेर सिंह दहिया, जेल सुपरिंटेंडेंट टू ने कहा कि मेरे ऊपर लगाए गए सभी आरोप निराधार हैं। जेल में क्या कोई महिलाओं को नचा सकता है? हर महीने सेशन जज दौरा करते हैं, अन्य अधिकारी भी जेल में निरीक्षण पर आते रहते हैं, अगर ऐसी बात होती तो कभी कोई उनको तो शिकायत करता। रामपाल और उसके अनुयायी किसी तरह पब्लिसिटी लेना चाहते हैं।

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