डायमंड शोरूम में लूट: आरोपी मालिक रिमांड पर, दूसरे की तलाश
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सेक्टर-17 स्थित फॉरएवर डायमंड शोरूम में 14 करोड़ के हीरों की लूट का षड्यंत्र रचने के आरोपी मालिक विनोद वर्मा को पुलिस ने बुधवार सीजेएम कोर्ट में पेश किया। पुलिस ने अदालत से आरोपी का 10 दिन का रिमांड मांगा। इसके लिए सरकारी वकील मनजिंदर सिंह ने दलील दी की उन्हें मामले में सहआरोपी रजनीश वर्मा और फर्जी लूट को अंजाम देने वाले तीन अन्य आरोपियों को गिरफ्तार करना है।
जांच के अनुसार विनोद तीनों आरोपी जो कि महाराष्ट्र के नासिक में हैं उनके पते जानता है। इसलिए इसे वहां लेकर जाना है। साथ ही सीसीटीवी कैमरे की डीवीआर जिसे तीनों लुटेरे ले गए थे उसे भी बरामद करना है। वहीं सरकारी वकील की ओर से लूटे गए हीरे और ज्वैलरी को भी बरामद करना है।
वहीं बचाव पक्ष की ओर से दलील दी गई कि पुलिस विनोद से पूछताछ कर चुकी है और साथ ही 1.65 करोड़ की ज्वैलरी बरामद कर चुकी है। ऐसे में उसके रिमांड का कोई औचित्य नहीं बनता। अदालत ने पुलिस और बचाव पक्ष की दलीलें सुनने के बाद पुलिस को विनोद का 7 दिन का रिमांड दे दिया।
पुलिस पर थर्ड डिग्री देने का आरोप
विनोद की ओर से पेश हुए वकील ने कोर्ट में कहा कि विनोद पुलिस को जांच में पूरा सहयोग कर रहा है इसके बावजूद उसे थर्ड डिग्री दी जा रही है। उन्होंने पुलिस पर उसे इलेक्ट्रिकल शॉक देने का आरोप भी लगाया। इस आधार पर बचाव पक्ष ने विनोद का रोजाना मेडिकल करवाने के लिए पुलिस को आदेश देने की बात कही। इस पर अदालत ने इसके लिए अलग से याचिका दायर करने को कहा। साथ ही पुलिस को विनोद का मेडिकल करवाने के आदेश दिए। इसके अलावा उसे नासिक ले जाने पर उसका वहां भी मेडिकल करवाने को कहा।
नाबालिग बेटे को थप्पड़ मारने का आरोप
बचाव पक्ष ने पुलिस पर आरोप लगाए कि उन्होंने विनोद के 16 वर्षीय बेटे और उनकी पत्नी के भाई को पूछताछ के नाम पर कस्टडी में रखा था। इस दौरान उनके नाबालिग बेटे को पुलिस ने थप्पड़ मारे और उसे धमकाया भी। वहीं पत्नी के भाई को भी नाजायज तरीके से परेशान किया।
अदालत में बोला विनोद
सीजेएम कोर्ट में पेशी के दौरान बचाव पक्ष के वकील ने अदालत से विनोद को अपनी बात कहने का मौका देने की अपील की। इस पर कोर्ट ने सहमति दी तो विनोद ने कहा कि, वह कोई अपराधी नहीं है। विनोद ने अदालत के समक्ष कहा कि, जो कुछ हुआ गलत हुआ। लेकिन, पुलिस अब उसे अपराधी बनाने में ही जुटी हुई है। शहर में पहले ही उसकी बहुत बेइज्जती हो चुकी है। वह पुलिस को पूरा सहयोग करने को तैयार है, लेकिन, उसे थर्ड डिग्री दी जा रही है। इससे वह मानसिक तौर पर बहुत परेशान और बीमार है।
पुलिस ने ये पेश किए सबूत
- डायमंड शोरूम के मैनेजर अजय कुमार ने मजिस्ट्रेट के समक्ष बयान में कहा था कि लूट पूरी तरह फर्जी थी। शोरूम से सारी ज्वैलरी, हीरे, सीसीटीवी कैमरे की डीवीआर और अन्य सामान दोनों मालिकों 30 अप्रैल को ही ले गए थे। उसके अनुसार दोनों मालिकों ने कर्मचारियों को धमकाया था कि वह पुलिस को कुछ न बताएं। वहीं महिला कर्मियों चारु और सरिता ने भी मजिस्ट्रेट के समक्ष अजय के बयानों की पुष्टि की थी।
- सभी कर्मियों के बयान के अनुसार 30 अप्रैल की सीसीटीवी कै मरा फुटेज की डीवीआर विनोद और रजनीश साथ ले गए थे। साथ ही दोनों ने 30 को ही शोरूम के कम्प्यूटर से सारा डॉटा डिलिट कर दिया था।
- सिद्धार्थ ज्वैलर के प्रोपराइटर हितेश अरोड़ा ने मजिस्ट्रेट के समक्ष दर्ज कराए बयान में कहा था कि 2 मई को उन्हें विनोद वर्मा का फोन आया था। उसने 14 अप्रैल की बैक डेट का ढाई करोड़ रुपये का अप्रूवल वाउचर्स/बिल तैयार करने को कहा था। इसे विनोद और रजनीश ने क्लेम लेने के लिए इस्तेमाल करना था।
- 28 अप्रैल को विनोद सारी ज्वैलरी ले गया और पंचकूला सेक्टर-16 के शेखर कक्कड़ को दे दी। पुलिस को शेखर से ज्वैलरी बरामद हुई। शेखर ने ही पुलिस को बताया कि पहली बार विनोद ने उसे इतनी ज्वैलरी दी थी।
- 7 मई 2016 को शेखर ने बताया कि उसी दिन विनोद उसके घर आया था और ज्वैलरी अपने पास रखने को कहा था। शेखर के इंकार करने पर विनोद वहां से चला गया। वहीं 28 अप्रैल को रजनीश ने सेक्टर-8 के ज्वैलर रजनीश ने गुणवंत सिंह को 277 ग्राम सोना बेचा था। इसकी कीमत करीब साढ़े 7 लाख रुपये थी।