सामने आया सतलोक में 6 लोगों की मौत का सच
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संत रामपाल के लिए चलाए गए ऑपरेशन अरेस्ट के दौरान जिन पांच लोगों की मौत हुई थी, वह पुलिस की मार से नहीं बल्कि दम घुटने से हुई थी। इन पांच महिलाओं को सैकड़ों लोगों के साथ रामपाल की कोठी के साथ बने कमरे में बाबा के कहने पर रोका गया था। इस बात का खुलासा रविवार को कोर्ट में पेश किए गए रामपाल के खास राजदार राजकपूर उर्फ प्रीतम व राजेंद्र ने डिस्क्लोजर रिपोर्ट में किया है।
पुलिस की डिस्क्लोजर रिपोर्ट में दोनों ने रिमांड के दौरान बताया है कि जब पुलिस ने 19 नवंबर को ऑपरेशन शुरू किया तो रामपाल के आदेश पर आश्रम से बाहर निकलने की जिद करने वाले लोगों को एक कमरे में बंद कर दिया गया था।
दम घुटने के कारण मरे हुए लोगों की जिम्मेवारी पुलिस पर डालने के लिए पांचों शव आश्रम के बाहर फेंक दिए गए। रिपोर्ट में यह भी लिखा गया है कि देर रात उन्हें पांच लोगों की मौत के बारे में पता चला गया था। रातों रात उन्होंने शवों को आश्रम से निकाला और बाहर फेंक दिया।
और लोगों की भी मौत हो सकती थी
राजकपूर व राजेंद्र ने बताया है कि रामपाल चाहता था कि मौत का जिम्मेवार वे लोग नहीं बल्कि पुलिस को ठहराया जा सके। छह दिन के पुलिस रिमांड में राजेंद्र ने बताया है कि वह हरियाणा पुलिस में हवलदार था। वर्ष 2006 में जब करौंथा कांड हुआ था तो उसका सर्विस रिवॉल्वर आश्रम में मिल गया था।
हालांकि वह आश्रम में नहीं था। अमर उजाला से हुई बातचीत में राजेंद्र ने खुद यह बात बताई है कि इसके बाद वह डिसमिस हो गया और पूरी तरह से रामपाल से जुड़ गया। और रामपाल की सेवा करता रहा।
रामपाल की कोठी के साथ बने जिस कमरे में खुद आश्रम से निकलने की बात कहने वाले अनुयायियों को रोका गया था, उसमें बाहर से ताला लगा दिया गया था। काफी संख्या में महिलाएं व बच्चे अंदर थे। ऑक्सीजन की कमी होने व उमस के कारण लोगों का दम घुटना शुरू हो गया।
देर रात अंदर बंद लोगों ने जब दूसरे लोगों के दम घुटने के बारे में दरवाजा खटखटा कर सूचना दी तो उन्हें बाहर निकाला गया। डिस्क्लोजर रिपार्ट के अनुसार समय रहते दरवाजा न खोला गया होता तो और अधिक लोगों की दम घुटने से मौत हो सकती थी।