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गैंगस्टरों से निपटने को पुलिस ने बनाई 4 सूत्रीय विशेष रणनीति
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़।
Updated Mon, 09 May 2016 10:35 AM IST
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पंजाब के डीजीपी सुरेश अरोड़ा
- फोटो : फाइल फोटो
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रॉकी हत्याकांड केबाद हरकत में आई पंजाब पुलिस ने अब गैंगस्टरों से निपटने को चार सूत्रीय रणनीति तैयार की है। इसमें अपराधियों पर तुरंत एक्शन, जेलों को मजबूत करना, अपराधियों पर कार्रवाई केलिए कड़े कानून और गैंगस्टरों की पेशी वीडियो कांफ्रेंसिंग से करवाना शामिल हैं।
डीजीपी सुरेश अरोड़ा ने मीडिया से बातचीत में कहा कि जेलों की सुरक्षा मजबूत की जाएगी, ताकि गैंग वहां से ऑपरेट न कर सकें। अदालतों से अपील की जाएगी कि गैंगस्टरों की पेशी वीडियो कांफ्रेंसिंग द्वारा करने की इजाजत दी जाए। गवाहों की सुरक्षा यकीनी बनाई जाएगी। गौरतलब है कि फाजिल्का के गैंगस्टर जसविंदर भुल्लर रॉकी की परवाणू में हत्या कर दी गई थी। उसकेबाद एक अन्य गैंगस्टर जयपाल सिंह ने फेसबुक पर इसकी जिम्मेदारी ली थी। डीजीपी अरोड़ा ने बताया कि 1996 से मार्च 2016 तक गैंगस्टरों के खिलाफ दर्ज 105 मामलों में से सिर्फ दस में ही सजा हो सकी। 2010 से अब तक गैंगस्टरों के खिलाफ 55 ट्रायल में से किसी को भी सजा नहीं हुई। इसकी प्रमुख वजह इन केसों के गवाहों का मुकरना है।
इसलिए गवाहों की पहचान गुप्त रखी जानी चाहिए, केस में फैसला आने के बाद भी उनकेनाम सार्वजनिक नहीं होने चाहिए। पुलिस हिरासत से फरार होना भी एक समस्या है। जनवरी 2015 से मार्च 2016 के दौरान 37 गैंगस्टर पुलिस कस्टडी से फरार हो गए, आठ ने बेल जंप की। उन्होंने कहा कि पुलिस कई राज्यों केकानून स्टडी कर रही है। जल्द ही इस बारे में राज्य सरकार से सिफारिश की जाएगी। डीजीपी ने कहा कि जमानत पर रिहा होकर फिर अपराध करने वालों की दूसरी बार जमानत खत्म की जानी चाहिए।
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डीजीपी सुरेश अरोड़ा ने मीडिया से बातचीत में कहा कि जेलों की सुरक्षा मजबूत की जाएगी, ताकि गैंग वहां से ऑपरेट न कर सकें। अदालतों से अपील की जाएगी कि गैंगस्टरों की पेशी वीडियो कांफ्रेंसिंग द्वारा करने की इजाजत दी जाए। गवाहों की सुरक्षा यकीनी बनाई जाएगी। गौरतलब है कि फाजिल्का के गैंगस्टर जसविंदर भुल्लर रॉकी की परवाणू में हत्या कर दी गई थी। उसकेबाद एक अन्य गैंगस्टर जयपाल सिंह ने फेसबुक पर इसकी जिम्मेदारी ली थी। डीजीपी अरोड़ा ने बताया कि 1996 से मार्च 2016 तक गैंगस्टरों के खिलाफ दर्ज 105 मामलों में से सिर्फ दस में ही सजा हो सकी। 2010 से अब तक गैंगस्टरों के खिलाफ 55 ट्रायल में से किसी को भी सजा नहीं हुई। इसकी प्रमुख वजह इन केसों के गवाहों का मुकरना है।
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इसलिए गवाहों की पहचान गुप्त रखी जानी चाहिए, केस में फैसला आने के बाद भी उनकेनाम सार्वजनिक नहीं होने चाहिए। पुलिस हिरासत से फरार होना भी एक समस्या है। जनवरी 2015 से मार्च 2016 के दौरान 37 गैंगस्टर पुलिस कस्टडी से फरार हो गए, आठ ने बेल जंप की। उन्होंने कहा कि पुलिस कई राज्यों केकानून स्टडी कर रही है। जल्द ही इस बारे में राज्य सरकार से सिफारिश की जाएगी। डीजीपी ने कहा कि जमानत पर रिहा होकर फिर अपराध करने वालों की दूसरी बार जमानत खत्म की जानी चाहिए।
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आईजी को सौंपी विशेष जिम्मेदारी
पंजाब पुलिस इनकाउंटर
- फोटो : amar ujala
पंजाब पुलिस ने एक आईजी स्तर के अधिकारी को गैंगस्टरों से निपटने को विशेष जिम्मेदारी सौंपी है। पहले बड़े गैंगस्टरों की पहचान की जाएगी, फिर एक विशेष पुलिस बल गठित किया जाएगा, जोकि अंतर-जिला और अंतर-राज्यीय गैंगस्टरों पर नजर रखेगा।
25 जेलों में शुरू हुई वीडियो कांफ्रेंसिंग
पंजाब की 25 जेलों में वीडियो कांफ्रेंसिंग शुरू की गई है, पिछले साल 89843 कैदियों की इसके जरिए पेशी कराई गई। पुलिस की कोशिश है कि कुख्यात गैंगस्टरों के खिलाफ सबूतों की रिकार्डिंग भी वीडियो कांफ्रेंसिंग से हो ताकि पुलिस हिरासत से फरार होने केमामले रुक सकें।
जेलों में लगेंगे सीसीटीवी कैमरे
डीजीपी सुरेश अरोड़ा ने बताया कि जेलों में 15 करोड़ की लागत से सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे। अभी पुलिस ने फोन व इंटरनेट पर रोक लगाने के प्रयास किए हैं। इसकेतहत नाभा जेल में छह, संगरूर में आठ और गुरदासपुर जेल में दस जैमर लगाए गए हैं। जहां जैमर काम नहीं करते, वहां सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे। साथ ही आठ स्निफर डॉग तैनात किए जाएंगे। पिछले चार महीने में 82 मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं। जल्द ही जेलों के लिए 16 डीएसपी, 39 असिस्टेंट जेल सुपरिंटेंडेंट नियुक्त किए जाएंगे।
25 जेलों में शुरू हुई वीडियो कांफ्रेंसिंग
पंजाब की 25 जेलों में वीडियो कांफ्रेंसिंग शुरू की गई है, पिछले साल 89843 कैदियों की इसके जरिए पेशी कराई गई। पुलिस की कोशिश है कि कुख्यात गैंगस्टरों के खिलाफ सबूतों की रिकार्डिंग भी वीडियो कांफ्रेंसिंग से हो ताकि पुलिस हिरासत से फरार होने केमामले रुक सकें।
जेलों में लगेंगे सीसीटीवी कैमरे
डीजीपी सुरेश अरोड़ा ने बताया कि जेलों में 15 करोड़ की लागत से सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे। अभी पुलिस ने फोन व इंटरनेट पर रोक लगाने के प्रयास किए हैं। इसकेतहत नाभा जेल में छह, संगरूर में आठ और गुरदासपुर जेल में दस जैमर लगाए गए हैं। जहां जैमर काम नहीं करते, वहां सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे। साथ ही आठ स्निफर डॉग तैनात किए जाएंगे। पिछले चार महीने में 82 मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं। जल्द ही जेलों के लिए 16 डीएसपी, 39 असिस्टेंट जेल सुपरिंटेंडेंट नियुक्त किए जाएंगे।