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मॉडल पुनीत संधू मर्डर केस के चारों आरोपी बरी
अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Wed, 16 Mar 2016 04:13 PM IST
सार
केस की शुरुआत से ही पुलिस की जांच और गवाह रहे कमजोर
हत्यारोपी के बेटे को ही बनाया केस का अहम सरकारी गवाह
पुलिस के कमजोर चालान ने ही आसान की आरोपियों की राह
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पुनीत संधू
- फोटो : file
विस्तार
दो साल पुराने मॉडल पुनीत संधू मर्डर केस में मंगलवार को अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय अंशु शुक्ला की अदालत ने चारों आरोपियों सुप्रीत, रामलाल, अंजू और मनप्रीत को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया। शहर के चर्चित हत्याकांड में से एक इस मामले में सभी आरोपियों का बरी होना चंडीगढ़ पुलिस की एक ओर नाकामी है। केस की शुरुआत से ही पुलिस की जांच संदेह के दायरे में रही है।
सेक्टर-34 पुलिस थाने में दर्ज हत्या के इस केस में पुलिस की थ्योरी अदालत में साबित नहीं हो सकी। पुलिस अदालत में केस से जुड़े तथ्यों और सबूतों की कड़ी नहीं जोड़ पाई, जिसका फायदा बचाव पक्ष ने उठाया। साथ ही पुलिस हत्या के पीछे का मकसद भी साबित नहीं कर पाई। हत्याकांड में इस्तेमाल किए गए रिवॉल्वर की रिकवरी पर पुलिस का अहम सरकारी गवाह ही दगा दे गया। इस पर पुलिस और सरकारी गवाह के अलग-अलग बयान सामने आए। इस पर कोर्ट ने रिकवरी को भी संदिग्ध करार दिया। केस के ट्रायल के पहले ही दिन शिकायतकर्ता मृतका की मां और बेटी दोनों ही अदालत में मुकर गए। यहीं से पुलिस की चुनौती शुरू हो गई थी, जिसे पार करने में यूटी पुलिस नाकाम रही।
16 अक्तूबर 2014 को हुई थी हत्या
16 अक्तूबर 2014 को शाम करीब साढ़े 8 बजे पंजाब एंड सिंध बैंक सोसायटी, सेक्टर-49 के फ्लैट में मॉडल पुनीत संधू की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। जांच में सामने आया कि मामला कांट्रैक्ट किलिंग का है। आरोप के अनुसार बैंक सोसायटी में रहने वाली 27 साल की पुनीत संधू की उसके प्रेमी अमित की बहन अंजू ने कांट्रैक्ट किलर से उसकी हत्या करवाई थी। इसके लिए कांट्रैक्ट किलर को छह लाख रुपये दिए जाने थे। इसमें से एक लाख रुपये किलर को पिस्तौल खरीदने के लिए दिए गए थे। जांच के बाद पुलिस ने कांट्रैक्ट किलर सुप्रीत और अमित की बहन अंजू को गिरफ्तार किया था। इसके बाद रामलाल और अमित को गिरफ्तार किया गया। हालांकि जांच में अमित की कोई भूमिका सामने न आने पर उसे पुलिस ने सरकारी गवाह बना लिया। इसके कुछ समय बाद मनप्रीत को रिवाल्वर की सप्लाई करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।
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पुलिस को दिए अवनीत के बयान
केस की शुरुआत में मृतक पुनीत की बहन अवनीत ने पुलिस को दिए बयान में आरोप लगाया था कि रामलाल चौधरी और उसकी बेटी अंजू ने उसकी बहन की हत्या करवाई है। क्योंकि रामलाल का बेटा अमित उसकी बहन के साथ लिव इन रिलेशन में था और अपने परिवार को नजरअंदाज कर रहा था। इसे लेकर अंजू और रामलाल पुनीत से रंजिश रखते थे।
कोर्ट में दिए अवनीत के बयान
4 मई को ट्रायल के पहले ही दिन पुनीत संधू की मां लखविंदर कौर और बहन अवनीत कौर ने एडीजे कोर्ट में दिए बयान में कहा कि उन्होंने कभी नहीं कहा कि रामलाल या अंजू ने उनकी बेटी का मर्डर किया है और न ही कभी उनके खिलाफ पुलिस को शिकायत दी। दोनों ने पुलिस पर ही सवाल उठाते कहा था कि पुलिस ने उनसे कोरे कागज पर साइन करवाए थे। दोनों ने कहा कि हादसे के बाद पुलिस ने उन्हें थाने बुलाया और कहा कि उनके अदालत में 164 के तहत बयान दर्ज होने हैं। अवनीत ने पुलिस पर आरोप लगाया कि उसे थाने में बुलाकर कहा गया कि उन्होंने बयान तैयार कर लिए हैं। अगर उन्होंने इसके तहत बयान दर्ज नहीं कराए तो पुलिस उन्हें भी इस केस में शामिल कर लेगी।
पुलिस के लूप होल्स का उठाया फायदा
बचाव पक्ष के वकील रबिंदरा पंडित के अनुसार पुलिस का केस काफी कमजोर था। हालांकि पुलिस ने केस में 40 गवाह बनाए थे, लेकिन कोई भी गवाह ऐसा नहीं था जो ठोस आधार और सबूत पेश कर सके और पुलिस के केस को साबित कर सके। उनके अनुसार केस में पुलिस की थ्योरी में कई लूप होल्स थे। इन पर बचाव पक्ष की ठोस दलीलों के चलते कोर्ट ने चारों आरोपियों के खिलाफ केस साबित न होता देख उन्हें बरी कर दिया।
एडवोकेट के अनुसार पुलिस ने पुनीत की लाश को सबसे पहले देखने वाले अमित (आरोपी रामलाल का बेटा) को ही केस का सबसे अहम और सरकारी गवाह बनाया था। हालांकि उसने कोर्ट में जो बयान दिया, उसने पुलिस के केस को ही कमजोर कर दिया। इसके अलावा मृतका पुनीत संधू की मां लखविंदर कौर और बहन अवनीत कौर भी ट्रायल के पहले ही दिन पुलिस को दिए बयान से अदालत में मुकर गए थे। इसके अलावा पुलिस की ओर से कराए गए कई गवाह पुलिस की कहानी के विपरीत बयान दे गए। इनमें आरोपी अंजू का पति आशीष भाटिया और मनप्रीत के पिता दविंदर सिंह भी शामिल थे।
पुलिस की कहानी की कमजोर कड़ियां
- पुलिस के अनुसार हत्या में इस्तेमाल रिवाल्वर सुप्रीत के घर से बरामद हुई, जबकि सरकारी गवाह बनाए गए अमित के अनुसार रिवाल्वर घटनास्थल पर ही थी। हत्या में इस्तेमाल पिस्टल और कारतूस के खोखे की रिकवरी संदेहजनक।
- वारदात के एक दिन बाद 17 अक्तूबर को पुलिस ने जब सीएफएसएल टीम को मौके पर बुलाया तो पहले इसे चाकू मारने का केस बताया। घटनास्थल की जांच के बाद कारतूस के दो खाली खोल बरामद हुए। 3 दिन बाद फिर से जांच में एक और खाली खोल बरामद हुआ। घटनास्थल की फोरेंसिक जांच ठीक से नहीं हुई।
- एसआई अशोक कुमार के बयान के अनुसार जिस घर में हत्या हुई, उसकी दीवारों पर भी गोलियों के निशान थे, जबकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार पुनीत को बहुत पास से गोलियां मारे जाने की बात सामने आई।
- पोस्टमार्टम रिपोर्ट में पाया गया कि पुनीत को एक गोली करीब से सिर में ऊपर से नीचे की तरफ मारी गई। वहीं दूसरी गोली सिर के पीछे से मारी गई थी। बचाव पक्ष ने दलील दी कि हत्या के आरोपी बनाए गए सुप्रीत की लंबाई पुनीत से कम है। ऐसे में सिर पर ऊपर से नीचे की तरफ गोली मारना संदेहास्पद है।
- पुलिस ने सुप्रीत की खून के दाग वाली टी-शर्ट बरामद होने की बात कही, लेकिन वह कोई गवाह पेश नहीं कर सकी।
- पुलिस ने वारदात स्थल की वीडियोग्राफी नहीं कराई।
- पुलिस ने वारदात के बाद आरोपियों के बीच की कॉल डिटेल का रिकार्ड कोर्ट में पेश किया, उसकी एविडेंस एक्ट की सेक्शन 65 (ए) के तहत उसे प्रमाणित नहीं करवाया। जबकि, संबंधित मोबाइल नेटवर्क कंपनी से इसका सर्टिफिकेट लेना चाहिए था।
- जिस कॉल रिकार्ड के आधार पर पुलिस ने आरोपियों के बीच हत्या को लेकर योजना बनाने क ा दावा किया, वह अदालत में साबित नहीं हो सका। क्योंकि रामलाल के अलावा अंजू, मनप्रीत और सुप्रीत के नाम वह मोबाइल और नंबर ही नहीं थे। पुलिस ने इनके खुद के नाम पर रजिस्टर्ड नंबर वाले फोन की डिटेल नहीं ली। साथ ही उनके मोबाइल को बतौर सबूत पेश नहीं किया।
- पुलिस की क्राइम थ्योरी के अनुसार पुनीत की हत्या के बाद लाश को बोरी में डालकर फेंकने की योजना थी। पुलिस ने सेक्टर-22 की एक दुकानदार के बयान भी करवाए जिसकी दुकान से बोरी और रस्सी खरीदे जाने की बात कही थी। हालांकि उनके बयान कुछ खास साबित नहीं हो सके।
- पुलिस ने दावा किया था कि मनप्रीत उर्फ लाली ने मेरठ से 60 हजार रुपये में पिस्टल खरीदी थी। इससे पुनीत की हत्या करने की योजना थी। इस पर बचाव पक्ष ने दलील दी थी कि पुलिस एक तरफ रस्सी से गला घोंटने की बात कह रही है तो दूसरी तरफ रिवाल्वर से हत्या करने की। पुलिस दो अलग-अलग कहानी बयां कर रही है।
- पुलिस ने हत्या में इस्तेमाल पिस्टल की रिकवरी सुप्रीत के घर से दिखाई थी। रिकवरी विटनेस के तौर पर उसकी मां को गवाह बनाया, जो अदालत में इससे मुकर गई। वहीं एक पुलिसकर्मी ने बताया कि रिकवरी के दौरान सुप्रीत का घर खुला था और घर में उसकी मां थी। वहीं दूसरे पुलिसकर्मी ने अदालत में बताया कि घर पर ताला लगा था और उसकी चाबी गमले के नीचे से लेकर उन्होंने घर का ताला खोला था। दोनों के बयानों में अंतर था।
- पुलिस ने जिस पिस्टल से वारदात को अंजाम देने की बात कही, उससे हत्या के प्रयास और आर्म्स एक्ट का केस डेराबस्सी में दर्ज है।
टाइम लाइन:
16 अक्तूबर 2014 : सेक्टर-49 की पंजाब एंड सिंध बैंक सोसायटी के फ्लैट में मॉडल पुनीत संधू की गोली मारकर हत्या
20 अक्तूबर 2014 : हत्या में आरोप में सुप्रीत और अंजू को गिरफ्तार किया
21 अक्तूबर 2014 : सुप्रीत और अंजू के बयानों के आधार पर रामलाल की गिरफ्तारी
14 जनवरी 2015 : पुलिस ने सभी आरोपियों के खिलाफ जिला अदालत में चालान पेश किया
15 अप्रैल 2015: जिला अदालत ने सुप्रीत, अंजू, रामलाल और मनप्रीत के खिलाफ हत्या, साजिश रचने, और आर्म्स एक्ट की धाराओं में आरोप तय किए
1 मई 2015: हत्या के केस को महिला से जुड़े अपराधों के केसों के लिए गठित विशेष अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश अंशु शुक्ला की कोर्ट में ट्रांसफर किया
4 मई 2015: मृतका पुनीत संधू की मां लखविंदर कौर और बहन अवनीत कौर पुलिस को दिए बयान से अदालत में पलटे
4 जून 2015: हत्याकांड के सबसे अहम और सरकारी गवाह बनाए गए अमित चौधरी (आरोपी रामलाल के बेटे) के बयान हुए, पुलिस की कहानी को ही पलटा
20 जनवरी 2016: अमित चौधरी के फिर से बयान हुए, फिर पुलिस की कहानी के उलट दिए बयान, पुलिस की रिवाल्वर की रिकवरी को गलत साबित किया
25 जनवरी 2016: केस के जांच अधिकारियों इंस्पेक्टर मनिंदर सिंह और एसआई अशोक कुमार के बयान हुए
10 मार्च 2016: पुलिस के दो और गवाह अंजू का पति आशीष और सहआरोपी मनप्रीत के पिता दविंदर दे गए पुलिस को ही दगा
15 मार्च 2016: एडीजे कोर्ट ने चारों आरोपियों सुप्रीत, अंजू, रामलाल और मनप्रीत को किया बरी
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सेक्टर-34 पुलिस थाने में दर्ज हत्या के इस केस में पुलिस की थ्योरी अदालत में साबित नहीं हो सकी। पुलिस अदालत में केस से जुड़े तथ्यों और सबूतों की कड़ी नहीं जोड़ पाई, जिसका फायदा बचाव पक्ष ने उठाया। साथ ही पुलिस हत्या के पीछे का मकसद भी साबित नहीं कर पाई। हत्याकांड में इस्तेमाल किए गए रिवॉल्वर की रिकवरी पर पुलिस का अहम सरकारी गवाह ही दगा दे गया। इस पर पुलिस और सरकारी गवाह के अलग-अलग बयान सामने आए। इस पर कोर्ट ने रिकवरी को भी संदिग्ध करार दिया। केस के ट्रायल के पहले ही दिन शिकायतकर्ता मृतका की मां और बेटी दोनों ही अदालत में मुकर गए। यहीं से पुलिस की चुनौती शुरू हो गई थी, जिसे पार करने में यूटी पुलिस नाकाम रही।
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16 अक्तूबर 2014 को हुई थी हत्या
16 अक्तूबर 2014 को शाम करीब साढ़े 8 बजे पंजाब एंड सिंध बैंक सोसायटी, सेक्टर-49 के फ्लैट में मॉडल पुनीत संधू की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। जांच में सामने आया कि मामला कांट्रैक्ट किलिंग का है। आरोप के अनुसार बैंक सोसायटी में रहने वाली 27 साल की पुनीत संधू की उसके प्रेमी अमित की बहन अंजू ने कांट्रैक्ट किलर से उसकी हत्या करवाई थी। इसके लिए कांट्रैक्ट किलर को छह लाख रुपये दिए जाने थे। इसमें से एक लाख रुपये किलर को पिस्तौल खरीदने के लिए दिए गए थे। जांच के बाद पुलिस ने कांट्रैक्ट किलर सुप्रीत और अमित की बहन अंजू को गिरफ्तार किया था। इसके बाद रामलाल और अमित को गिरफ्तार किया गया। हालांकि जांच में अमित की कोई भूमिका सामने न आने पर उसे पुलिस ने सरकारी गवाह बना लिया। इसके कुछ समय बाद मनप्रीत को रिवाल्वर की सप्लाई करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।
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पुलिस को दिए अवनीत के बयान
केस की शुरुआत में मृतक पुनीत की बहन अवनीत ने पुलिस को दिए बयान में आरोप लगाया था कि रामलाल चौधरी और उसकी बेटी अंजू ने उसकी बहन की हत्या करवाई है। क्योंकि रामलाल का बेटा अमित उसकी बहन के साथ लिव इन रिलेशन में था और अपने परिवार को नजरअंदाज कर रहा था। इसे लेकर अंजू और रामलाल पुनीत से रंजिश रखते थे।
कोर्ट में दिए अवनीत के बयान
4 मई को ट्रायल के पहले ही दिन पुनीत संधू की मां लखविंदर कौर और बहन अवनीत कौर ने एडीजे कोर्ट में दिए बयान में कहा कि उन्होंने कभी नहीं कहा कि रामलाल या अंजू ने उनकी बेटी का मर्डर किया है और न ही कभी उनके खिलाफ पुलिस को शिकायत दी। दोनों ने पुलिस पर ही सवाल उठाते कहा था कि पुलिस ने उनसे कोरे कागज पर साइन करवाए थे। दोनों ने कहा कि हादसे के बाद पुलिस ने उन्हें थाने बुलाया और कहा कि उनके अदालत में 164 के तहत बयान दर्ज होने हैं। अवनीत ने पुलिस पर आरोप लगाया कि उसे थाने में बुलाकर कहा गया कि उन्होंने बयान तैयार कर लिए हैं। अगर उन्होंने इसके तहत बयान दर्ज नहीं कराए तो पुलिस उन्हें भी इस केस में शामिल कर लेगी।
पुलिस के लूप होल्स का उठाया फायदा
बचाव पक्ष के वकील रबिंदरा पंडित के अनुसार पुलिस का केस काफी कमजोर था। हालांकि पुलिस ने केस में 40 गवाह बनाए थे, लेकिन कोई भी गवाह ऐसा नहीं था जो ठोस आधार और सबूत पेश कर सके और पुलिस के केस को साबित कर सके। उनके अनुसार केस में पुलिस की थ्योरी में कई लूप होल्स थे। इन पर बचाव पक्ष की ठोस दलीलों के चलते कोर्ट ने चारों आरोपियों के खिलाफ केस साबित न होता देख उन्हें बरी कर दिया।
एडवोकेट के अनुसार पुलिस ने पुनीत की लाश को सबसे पहले देखने वाले अमित (आरोपी रामलाल का बेटा) को ही केस का सबसे अहम और सरकारी गवाह बनाया था। हालांकि उसने कोर्ट में जो बयान दिया, उसने पुलिस के केस को ही कमजोर कर दिया। इसके अलावा मृतका पुनीत संधू की मां लखविंदर कौर और बहन अवनीत कौर भी ट्रायल के पहले ही दिन पुलिस को दिए बयान से अदालत में मुकर गए थे। इसके अलावा पुलिस की ओर से कराए गए कई गवाह पुलिस की कहानी के विपरीत बयान दे गए। इनमें आरोपी अंजू का पति आशीष भाटिया और मनप्रीत के पिता दविंदर सिंह भी शामिल थे।
पुलिस की कहानी की कमजोर कड़ियां
- पुलिस के अनुसार हत्या में इस्तेमाल रिवाल्वर सुप्रीत के घर से बरामद हुई, जबकि सरकारी गवाह बनाए गए अमित के अनुसार रिवाल्वर घटनास्थल पर ही थी। हत्या में इस्तेमाल पिस्टल और कारतूस के खोखे की रिकवरी संदेहजनक।
- वारदात के एक दिन बाद 17 अक्तूबर को पुलिस ने जब सीएफएसएल टीम को मौके पर बुलाया तो पहले इसे चाकू मारने का केस बताया। घटनास्थल की जांच के बाद कारतूस के दो खाली खोल बरामद हुए। 3 दिन बाद फिर से जांच में एक और खाली खोल बरामद हुआ। घटनास्थल की फोरेंसिक जांच ठीक से नहीं हुई।
- एसआई अशोक कुमार के बयान के अनुसार जिस घर में हत्या हुई, उसकी दीवारों पर भी गोलियों के निशान थे, जबकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार पुनीत को बहुत पास से गोलियां मारे जाने की बात सामने आई।
- पोस्टमार्टम रिपोर्ट में पाया गया कि पुनीत को एक गोली करीब से सिर में ऊपर से नीचे की तरफ मारी गई। वहीं दूसरी गोली सिर के पीछे से मारी गई थी। बचाव पक्ष ने दलील दी कि हत्या के आरोपी बनाए गए सुप्रीत की लंबाई पुनीत से कम है। ऐसे में सिर पर ऊपर से नीचे की तरफ गोली मारना संदेहास्पद है।
- पुलिस ने सुप्रीत की खून के दाग वाली टी-शर्ट बरामद होने की बात कही, लेकिन वह कोई गवाह पेश नहीं कर सकी।
- पुलिस ने वारदात स्थल की वीडियोग्राफी नहीं कराई।
- पुलिस ने वारदात के बाद आरोपियों के बीच की कॉल डिटेल का रिकार्ड कोर्ट में पेश किया, उसकी एविडेंस एक्ट की सेक्शन 65 (ए) के तहत उसे प्रमाणित नहीं करवाया। जबकि, संबंधित मोबाइल नेटवर्क कंपनी से इसका सर्टिफिकेट लेना चाहिए था।
- जिस कॉल रिकार्ड के आधार पर पुलिस ने आरोपियों के बीच हत्या को लेकर योजना बनाने क ा दावा किया, वह अदालत में साबित नहीं हो सका। क्योंकि रामलाल के अलावा अंजू, मनप्रीत और सुप्रीत के नाम वह मोबाइल और नंबर ही नहीं थे। पुलिस ने इनके खुद के नाम पर रजिस्टर्ड नंबर वाले फोन की डिटेल नहीं ली। साथ ही उनके मोबाइल को बतौर सबूत पेश नहीं किया।
- पुलिस की क्राइम थ्योरी के अनुसार पुनीत की हत्या के बाद लाश को बोरी में डालकर फेंकने की योजना थी। पुलिस ने सेक्टर-22 की एक दुकानदार के बयान भी करवाए जिसकी दुकान से बोरी और रस्सी खरीदे जाने की बात कही थी। हालांकि उनके बयान कुछ खास साबित नहीं हो सके।
- पुलिस ने दावा किया था कि मनप्रीत उर्फ लाली ने मेरठ से 60 हजार रुपये में पिस्टल खरीदी थी। इससे पुनीत की हत्या करने की योजना थी। इस पर बचाव पक्ष ने दलील दी थी कि पुलिस एक तरफ रस्सी से गला घोंटने की बात कह रही है तो दूसरी तरफ रिवाल्वर से हत्या करने की। पुलिस दो अलग-अलग कहानी बयां कर रही है।
- पुलिस ने हत्या में इस्तेमाल पिस्टल की रिकवरी सुप्रीत के घर से दिखाई थी। रिकवरी विटनेस के तौर पर उसकी मां को गवाह बनाया, जो अदालत में इससे मुकर गई। वहीं एक पुलिसकर्मी ने बताया कि रिकवरी के दौरान सुप्रीत का घर खुला था और घर में उसकी मां थी। वहीं दूसरे पुलिसकर्मी ने अदालत में बताया कि घर पर ताला लगा था और उसकी चाबी गमले के नीचे से लेकर उन्होंने घर का ताला खोला था। दोनों के बयानों में अंतर था।
- पुलिस ने जिस पिस्टल से वारदात को अंजाम देने की बात कही, उससे हत्या के प्रयास और आर्म्स एक्ट का केस डेराबस्सी में दर्ज है।
टाइम लाइन:
16 अक्तूबर 2014 : सेक्टर-49 की पंजाब एंड सिंध बैंक सोसायटी के फ्लैट में मॉडल पुनीत संधू की गोली मारकर हत्या
20 अक्तूबर 2014 : हत्या में आरोप में सुप्रीत और अंजू को गिरफ्तार किया
21 अक्तूबर 2014 : सुप्रीत और अंजू के बयानों के आधार पर रामलाल की गिरफ्तारी
14 जनवरी 2015 : पुलिस ने सभी आरोपियों के खिलाफ जिला अदालत में चालान पेश किया
15 अप्रैल 2015: जिला अदालत ने सुप्रीत, अंजू, रामलाल और मनप्रीत के खिलाफ हत्या, साजिश रचने, और आर्म्स एक्ट की धाराओं में आरोप तय किए
1 मई 2015: हत्या के केस को महिला से जुड़े अपराधों के केसों के लिए गठित विशेष अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश अंशु शुक्ला की कोर्ट में ट्रांसफर किया
4 मई 2015: मृतका पुनीत संधू की मां लखविंदर कौर और बहन अवनीत कौर पुलिस को दिए बयान से अदालत में पलटे
4 जून 2015: हत्याकांड के सबसे अहम और सरकारी गवाह बनाए गए अमित चौधरी (आरोपी रामलाल के बेटे) के बयान हुए, पुलिस की कहानी को ही पलटा
20 जनवरी 2016: अमित चौधरी के फिर से बयान हुए, फिर पुलिस की कहानी के उलट दिए बयान, पुलिस की रिवाल्वर की रिकवरी को गलत साबित किया
25 जनवरी 2016: केस के जांच अधिकारियों इंस्पेक्टर मनिंदर सिंह और एसआई अशोक कुमार के बयान हुए
10 मार्च 2016: पुलिस के दो और गवाह अंजू का पति आशीष और सहआरोपी मनप्रीत के पिता दविंदर दे गए पुलिस को ही दगा
15 मार्च 2016: एडीजे कोर्ट ने चारों आरोपियों सुप्रीत, अंजू, रामलाल और मनप्रीत को किया बरी