रफ्तार का कहर : चंडीगढ़ में सड़कों पर दौड़ रही मौत, हाई स्पीड से हर तीसरे दिन जा रही एक जान
- पिछले साल के मुकाबले हादसे में होने वाली मौत हुई दोगुनी
- सबसे ज्यादा हादसे दोपहर 3 से रात 9 के बीच
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चंडीगढ़ की सड़कों पर तेज रफ्तार से वाहन चलाए जा रहे हैं। इस वजह से सड़क हादसों में होने वाली मौत का आंकड़ा दोगुना हो गया है। जनवरी से अब तक हर तीसरे दिन एक व्यक्ति सड़क दुर्घटना में तेज रफ्तार की वजह से अपनी जान गंवा रहा है। पिछले साल यही आंकड़ा छह दिनों का था। सबसे ज्यादा हादसे दोपहर 3 से रात 9 बजे के बीच हो रहे हैं।
आंकड़ों के अनुसार जनवरी 2021 से अब तक 30 लोग सड़क हादसे में जान गंवा चुके हैं जबकि जनवरी 2020 से मार्च तक यह आंकड़ा 15 था। यातायात पुलिस के आंकड़ों के अनुसार ज्यादातर हादसे तेज रफ्तार वाहनों के कारण हुए हैं। वाहन देर रात के अलावा अब दिन में भी सड़कों पर तेजी से दौड़ रहे हैं। सड़क हादसे में होने वाली मौतों में अधिकतर दोपहिया वाहन सवार हैं।
मौत के कुल आंकड़ों में 80 फीसदी पुरुष और 20 फीसदी महिलाएं शामिल हैं। नियमों की अवहेलना की जानकारी देने और लोगों को जागरूक करने के लिए यातायात पुलिस आए दिन सड़क हादसों को कम करने के लिए अभियान चलाती है। संकल्प लिया जाता है कि सड़क हादसों में कमी लाएंगे, बावजूद इसके दुर्घटनाएं कम होने का नाम नहीं ले रही।
रफ्तार पर लगाम लगाने के लिए बढ़ाए नाके
जागरूकता और स्पीड बोर्ड की जरूरत
अराइव सेफ संस्था के संस्थापक हरमन सिंह सिद्धू का कहना है कि सड़क हादसे की बढ़ती वजह रफ्तार का कहर है। इसे रोकने के लिए यातायात पुलिस को ज्यादा से ज्यादा लोगों को जागरूक करना चाहिए। साथ ही सेक्टरों में लगे स्पीड बोर्ड को बेहतर तरीके से सड़कों पर लगाना चाहिए ताकि चालकों को पता चल सके कि किन-किन सेक्टरों में वाहन चलाने की कितनी लिमिट है।
किस समय कितनी मौत
सुबह 6 से 9 2
सुबह 9 से 12 3
दोपहर 12 से 3 1
दोपहर 3 से 6 7
शाम 6 से 9 7
रात 9 से 12 5
रात 12 से 3 4
तड़के 3 से 6 1
वाहन मौत
पैदल 7
साइकिल 7
रेहड़ी 1
बाइक 12
चार पहिया 2
तीन पहिया 1
सड़क हादसों को रोकने के लिए यातायात पुलिस आए दिन वाहन चालकों को जागरूक करती रहती है। इसके अलावा वाहनों के रफ्तार को कम करने के लिए जगह-जगह नाका लगाया जा रहा है। जो गाड़िया तेज रफ्तार में होती हैं, उनके चालान काटे जा रहे हैं। -एसपीएस सोंधी, डीएसपी एडमिन यातायात पुलिस