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4 करोड़ समेत तस्कर पकड़वाए पर चली गई नौकरी
ब्यूरो/अमर उजाला, मोहाली
Updated Thu, 24 Jul 2014 01:54 PM IST
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राज्य सरकार या पुलिस विभाग ड्रग तस्करों की सूचना देने वालों को पुरस्कार देने के साथ ही नाम गुप्त रखने का दावा करती है। लेकिन, यह दावे सच्चाई से कोसों दूर हैं। यह आरोप बुधवार को प्रेस कान्फ्रेंस के दौरान लखमीर निवासी पलेहड़ी जिला मोहाली ने लगाया।
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लखमीर ने बताया कि 2010 में उसने एसएसपी खन्ना को हेरोइन बेचने वाले लोगों की सूचना दी थी। बाकायदा खन्ना पुलिस और सीआईए स्टाफ को साथ ले जाकर उन्होंने मोगा से साढे़ चार करोड़ रुपये की हेरोइन समेत तस्कर गिरफ्तार करवाए थे। उस समय सुखमिंदर सिंह मान एसएसपी खन्ना थे।
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उन्होंने भरोसा दिलाया कि उसे सरकार की ओर से सम्मानित करवाया जाएगा। लेकिन, पुलिस ने इनाम तो दूर ड्रग तस्कर को उसका नाम बता दिया। इसके बाद ड्रग तस्करों का एक गिरोह उसके पीछे पड़ गया। वह मजबूरी में किराए के मकान बदल-बदलकर छिपकर रह रहा है। लेकिन, फिर भी तस्कर उसे तलाश लेते हैं। साथ ही उस पर जानलेवा हमले हो रहे हैं।
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लखमीर ने बताया कि वह भाखड़ा ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड में बतौर गेट कीपर तैनात था, लेकिन तस्करों के डर से नौकरी पर भी नहीं जा पाया। ऐसे में उसकी नौकरी भी चली गई। विभाग ने उसे डिसमिस कर दिया। लखमीर ने बताया कि इंसाफ के लिए वह सीएम, डिप्टी सीएम और डीजीपी पंजाब को पत्र भेज चुका है।
डीजीपी पंजाब से वह इस मामले में खुद मिल भी चुका है। डीजीपी ने उसे आईजी नारकोटिक्स और एसएसपी खन्ना से मिलने को कहा था। साथ ही एसएसपी मोहाली को मिलकर पुलिस सुरक्षा लेने के लिए कहा था। फिर वह तत्कालीन एसएसपी मोहाली गुरप्रीत सिंह भुल्लर से मिला।
उन्होंने एसपीडी प्रीतम सिंह के पास भेजा। लखमीर ने कहा कि 40 हजार रुपये देने पड़ेंगे। जब वह इंतजाम नहीं कर पाया तो एसपीडी ने उससे लिखवा लिया कि उसे सिक्योरिटी की जरूरत नहीं है। उसने राज्य सरकार से मांग की है कि उसे सुरक्षा मुहैया करवाई जाए। साथ ही उसकी नौकरी बहाली की दिशा में कार्रवाई की जाए।