हत्या मामले में 5 आरोपियों को उम्रकैद
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हरियाणा के सोनीपत में बैंक के सिक्योरिटी गार्ड की हत्या के मामले में कोर्ट ने 5 आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। दोषियों पर पांच-पांच हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना नहीं भरने पर अतिरिक्त सजा भुगतनी पड़ सकती है। दोषियों में दो सगे भाई भी हैं।
एटलस रोड स्थित आईसीआईसीआई बैंक की शाखा पर गांव राजलूगढ़ी का रहने वाला राजेश पुत्र ईश्वर सिक्योरिटी गार्ड के पद पर कार्यरत था। 32 साल के राजेश की 26 नवंबर 2011 को सुबह लगभग 8.30 बजे हत्या कर दी गई थी। वारदात को उस समय अंजाम दिया गया जब वह बैंक का शटर उठा रहा था।
इसी दौरान एक बाइक पर सवार होकर आए दो युवकों ने उस पर गोली चला दी। गोली सीधे राजेश की पीठ में लगी। हमलावर तुरंत मौके से फरार हो गए थे। वहीं घायल अवस्था में राजेश को सामान्य अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां पर उसकी मौत हो गई थी। इस मामले में राजेश के चचेरे भाई राजलूगढ़ी के ही मुकेश ने पुलिस को शिकायत दी थी।
शिकायत पर हत्या का मामला दर्ज किया गया था। इस मामले में पुलिस ने गांव रिवाड़ी खेड़ा निवासी संजय, राजलूगढ़ी निवासी कृष्ण, महलाना निवासी प्रवीण, मूलरूप से राजलूगढ़ी फिलहाल एकता विहार, पानीपत निवासी विनोद और उसके भाई अनिल को दोषी करार दिया है। अदालत ने पांचों को उम्रकैद की सजा सुनाई है।
पिता की हत्या मामले में था गवाह
6 अप्रैल 2010 को ईश्वर की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस दौरान ईश्वर के पुत्र राजेश पर भी गोली चलाते हुए जानलेवा हमला किया गया था। इस मामले में राजेश ही गवाह था।
राजेश ने ही इस मामले में आरोपी अनिल निवासी राजलूगढ़ी और उसके खिलाफ गवाही दी थी। राजेश की हत्या के बाद पुलिस ने इस पुरानी रंजिश को लेकर ही जांच शुरू की थी। घटना के दिन राजेश के चचेरे भाई की शादी थी। जिससे शादी की खुशियां मातम में बदल गई थी।
बंद होटल से पकड़े थे आरोपी
28 नवंबर को पुलिस ने जाहरी-कामी रोड पर एक बंद होटल में छापामार कार्रवाई की थी। उस दौरान वहां से चार अपराधियों को गिरफ्तार किया था। गिरफ्तार आरोपी गांव रिवाड़ी खेड़ा, बहादुरगढ़ निवासी संजय, जींद के रामनगर निवासी अनिल, महलाना निवासी नवीन और प्रह्लादपुर किड़ौली निवासी मुनीश थे। इन्होंने ही राजेश की हत्या करना कबूल किया था।
जेल में मुलाकात ने तय की राजेश की हत्या
राजेश की गवाही के बाद अनिल जेल में बंद था। वहीं जेल में मुनीश और उसका चाचा दीपक ठेकेदार मामन की हत्या के मामले में बंद थे। मुनीश की अनिल के साथ दोस्ती हो गई थी। जेल में ही दोनों ने राजेश को ठिकाने लगाने की साजिश रच डाली।
इसी साजिश को अंजाम देने के लिए मुनीश को 11 नवंबर 2011 को जमानत दिलवाई गई थी। मुनीश ने तय साजिश के तहत बाहर आकर संजय, नवीन और अनिल निवासी जींद के साथ वारदात के लिए बंदोबस्त किया। इसके बाद नवीन और संजय ने राजेश की हत्या की।