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ज्योति मर्डरः आरोपियों के बयान ने पलटा केस

Tue, 15 Jul 2014 11:49 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, पंचकूला
ब्यूरो/अमर उजाला, पंचकूला Updated Tue, 15 Jul 2014 11:49 AM IST
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Jyoti Murder Case: Accused Refused to Indetify Ramkumar

बहुचर्चित ज्योति हत्याकांड में सोमवार को सात आरोपियों ने बयान दर्ज कराए और एयरटेल कंपनी के डिस्ट्रीब्यूटर, रिटेलर और मुख्य आरोपी रामकुमार चौधरी के भाई सहित सभी ने खुद को बेकसूर बताया।

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विधायक राम कुमार चौधरी का भाई हरभजन चौधरी जहां रामकुमार को पनाह देने का आरोपी है, वहीं निर्मल सिंह, बलजीत सिंह व कमलजीत सिंह पर भी आरोपी परमजीत उर्फ पम्मा को छिपाने के आरोप हैं। अब इस केस में सभी आरोपियों के बयान दर्ज हो चुके हैं। अब बचाव पक्ष अपने गवाहों की सूची कोर्ट में देगा, फिर जिरह शुरू होगी।

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रामकुमार को नहीं जानते, पनाह देने की बात गलत

Jyoti Murder Case: Accused Refused to Indetify Ramkumar

सोमवार को अपने बचाव में रामकुमार के भाई हरभजन चौधरी ने कहा कि रामकुमार को पनाह देने की बात गलत है। इस मामले में वह बेकसूर है।

वहीं, आरोपी पंकज भंडारी ने कहा कि वह न तो रामकुमार चौधरी को जानता है और न ही बब्लू कम्यूनिकेशन का मालिक है। अगर सिम फर्जी पते पर बेचे गए हैं, तो कंपनी को उन्हें बंद करना चाहिए था। अभी तक नंबर बंद नहीं हुए हैं।

दुकान पर काम करने वाले आशीष ने कहा कि वह रामकुमार व उसके ड्राइवर सतपाल को नहीं जानता। उसने इस नंबर के सिम भी नहीं बेचे हैं।

उधर, एयरटेल कंपनी के डिस्ट्रीब्यूटर सतीश कौशल ने कहा कि उसे एयरटेल कंपनी ने नियुक्त किया था। उसने आगे किसी रिटलेर को नियुक्त नहीं किया है। बब्लू कम्यूनिकेशन को भी एयरटेल ने ही नियुक्त किया है।

पुलिस के पास मजबूत सबूत

Jyoti Murder Case: Accused Refused to Indetify Ramkumar

पुलिस केस के मुताबिक, बद्दी स्थित बब्लू कम्यूनिकेशन से फर्जी पते पर 9416464060 व 9882239372 खरीदे गए थे। दोनों ही नंबर वारदात वाले दिन मौका-ए-वारदात पर हैं और साथ में रामकुमार चौधरी के असली आईडी का नंबर भी है। पुलिस ने फर्जी नंबरों से जुड़ा जो रिकार्ड कब्जे में लिया है, उसके एक्टीवेशन फार्म पर भी बब्लू कम्यूनिकेशन की मुहर है।

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मैच हुए सैंपल, दोनों जगहों पर ज्योति का खून

Jyoti Murder Case: Accused Refused to Indetify Ramkumar

बहुचर्चित ज्योति हत्याकांड में सीएफएसएल चंडीगढ़ की रिपोर्ट में ज्योति के कपड़ों और मौके से मिले खून के सैंपल मैच कर गए हैं। दोनों सैंपलों में पाया गया कि दोनों जगह ज्योति का ही खून है।

इससे पुलिस केस को मजबूती मिली। ज्योति के स्वेटर से मिले बाल के बारे में कहा गया है कि यह किसी इंसान का बाल है।

लेकिन किसका है, यह स्थिति स्पष्ट नहीं है। पुलिस ने ड्यूटी मजिस्ट्रेट की कोर्ट में सप्लीमेंट्री चालान दे दिया है और सोमवार को सेशन कोर्ट में यह दाखिल हो सकता है।

इससे पहले कोर्ट ने इस केस की सुनवाई के दौरान पिछले दिनों सीएफएसएल चंडीगढ़ के डायरेक्टर को नोटिस देकर सभी रिपोर्ट कोर्ट में दाखिल करने के आदेश दिए थे और अब सैंपलों की रिपोर्ट आई है।

खून और बालों की जांच रिपोर्ट

Jyoti Murder Case: Accused Refused to Indetify Ramkumar

इस रिपोर्ट में सामने आया कि मौका-ए-वारदात से मिला खून ज्योति के कपड़ों से मिले खून के साथ मैच करता है। हालांकि, वारदात में इस्तेमाल हुई कार के सीट कवर पर खून के धब्बों के बारे स्थिति स्पष्ट नहीं हुई है।

बालों की जांच रिपोर्ट
इस रिपोर्ट में सामने आया कि ज्योति के स्वेटर पर जो बाल मिला है, वह किसी इंसान का है, लेकिन यह पता नहीं चल पाया है कि यह किसके हैं? पुलिस ने मुख्य आरोपी राम कुमार चौधरी, गुरमीत व परमजीत के बालों के सैंपल जांच के लिए भेजे थे।

ये थे मुख्य गवाह और पुख्ता सबूत

Jyoti Murder Case: Accused Refused to Indetify Ramkumar

ज्योति की बहन और पिता बूटी राम। ज्योति की बहन कोर्ट में बयान दे चुकी है कि ज्योति ने उसे बताया था कि रामकुमार चौधरी के साथ उसके संबंध हैं और दोनों शादी करेंगे। वहीं, बूटी राम ने भी कोर्ट में ज्योति और रामकुमार के रिश्ते के बारे में बताया था।

मोबाइल की लोकेशन
ज्योति, रामकुमार व अन्य आरोपियों के मोबाइल वारदात वाले दिन साथ चल रहे थे। टावर लोकेशन के डिकोडेड डाटा में भी साफ हो गया है कि चंडीगढ़ से पंचकूला तक किस-किस टावर पर कैसे-कैसे नंबर एक साथ चले। कौन किस टावर से कहां तक पहुंचा।

चंडीमंदिर टोल प्लाजा की डिटेल्स

इसमें स्पष्ट है कि वारदात वाली रात वह ट्रक पंचकूला में आया था, जिससे ज्योति का सिर कुचला गया था।  

चौधरी के हस्ताक्षर
ज्योति का गर्भपात कराने के लिए मंजूरी फार्म पर साइन किए गए थे। ये साइन रामकुमार चौधरी के साइन थे, जो मैच हो चुके हैं।

ज्योति की कॉल डिटेल्स
हत्या के बाद डाटा डिलीट कर ज्योति के मोबाइल को फेंक दिया गया था। घग्गर नदी से मोबाइल रिकवर होने के बाद डाटा को रिट्राइव कराने पर पाया गया कि रामकुमार ने एक बार दो दिन में ज्योति को 40 फोन किए थे। ज्योति के मोबाइल से रामकुमार और उनकी पत्नी व एक जन्मदिन पार्टी की तस्वीरें भी रिट्राइव हो चुकी है।

एसएमएस
ज्योति के फोन से पुलिस को उसके नजदीकी दोस्त सिमी का पता चला। सिमी ने ज्योति को काफी एसएमएस कर रखे हैं। इनमें कुछ ऐसे एसएमएस हैं, जिनमें जिक्र है कि वह किसी और के लिए उसे छोड़ रही है। सिमी ने कोर्ट में बयान दिए हैं कि ज्योति ने उसे कहा था कि वह चौधरी के साथ है, जो उसकी काफी मदद करता है।

विधायक चौधरी के खिलाफ अब तक के अहम सबूत

Jyoti Murder Case: Accused Refused to Indetify Ramkumar

- ज्योति, रामकुमार व कई अन्य आरोपियों के मोबाइल की लोकेशन वारदात वाले दिन साथ थी।
- चंडीमंदिर टोल प्लाजा की डिटेल्स में साफ है कि वारदात वाली रात ट्रक पंचकूला आया, जिससे ज्योति का सिर कुचला गया।
- ज्योति का गर्भपात कराने के समय भरे गए फार्म पर रामकुमार चौधरी के साइन मैच हो चुके हैं। हालांकि इन साइन को काटकर दूसरे साइन किए गए थे, लेकिन फार्म पर पहले किए साइन से चौधरी के साइन मैच हैं।

- ज्योति की बहन ने कोर्ट में कहा था कि ज्योति ने बताया था कि रामकुमार के साथ उसके संबंध हैं और दोनों शादी करेंगे।
- ज्योति की बहन की शादी में रामकुमार चौधरी की तस्वीर भी साबित करती है कि ज्योति और रामकुमार एक साथ रहे हैं।
- ज्योति के पिता बूटी राम ने भी कोर्ट में ज्योति और रामकुमार के रिश्ते के बारे में बताया था।

- ज्योति की हत्या के बाद के डाटा डिलीट करके घग्गर नदी में मोबाइल फेंक दिया गया था। मोबाइल रिकवर होने के बाद जो डाटा रीट्राइव हुआ, उसमें पाया गया कि रामकुमार ने एक बार दो दिन में ज्योति को 40 फोन कॉल्स की थी।
- ज्योति के मोबाइल से रामकुमार व उसकी पत्नी व एक जन्मदिन पार्टी की तस्वीरें भी मिली थीं।

केस में अब तक ये हुआ

Jyoti Murder Case: Accused Refused to Indetify Ramkumar

- 22 नवंबर 2012 को सेक्टर-21 में ज्योति का मिला था शव
- सेक्टर-5 थाने में अज्ञात के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज हुआ
- हिमाचल के कांग्रेसी नेता रामकुमार चौधरी का नाम केस में आया
- पुलिस ने कई बार रेड की, लेकिन चौधरी नदारद
- 8 जनवरी को चौधरी ने कोर्ट में सरेंडर किया, पुलिस ने लिया हिरासत में
- इसके बाद अन्य आरोपियों की गिरफ्तारियां हुई
- पुलिस ने चार्जशीट तैयार की, जिस पर 37 आब्जेक्शन लगे
- जांच अधिकारी को हटाकर तत्कालीन डीसीपी अश्विन शेणवी की अगुवाई में एसआईटी बनी
- फिर कोर्ट में नया चालान आया और ट्रायल शुरू हुआ। इस दौरान सप्लीमेंटरी चालान भी आते रहे।

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