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पैसा देकर भी बेटे को नौकरी न मिली, फंदा लगाया

Mon, 13 Apr 2015 05:13 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, सिरसा(हरियाणा)
ब्यूरो/अमर उजाला, सिरसा(हरियाणा) Updated Mon, 13 Apr 2015 05:13 PM IST
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in name of son's job fraud with canteen owner, suicide

बेटे की नौकरी लगवाने के लिए साढे़ तीन लाख रुपये कर्ज लेकर दिया जब बेटे को नहीं मिली नौकरी तो उठाया खौफनाक कदम। मामला हरियाणा के सिरसा की है। पुलिस अधीक्षक कार्यालय में स्थित कैंटीन के संचालक ने रविवार को कार्यालय के पीछे फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली।

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पुलिस को शव के पास से सुसाइड नोट मिला। इसके आधार पर दो लोगों के खिलाफ पुलिस ने आत्महत्या करने के लिए मजबूर करने का केस दर्ज किया है।

भिवानी जिले के गांव रूदढोल निवासी सतबीर सिंह सिरसा पुलिस अधीक्षक कार्यालय स्थित चाय की कैंटीन में काम करता था। करीब ढाई साल पहले उसके गांव के ही ऋषि त्यागी और धनपत नामक व्यक्ति ने उससे उसके पुत्र को सरकारी नौकरी लगवाने की एवज में साढ़े तीन लाख रुपये मांगे।
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कई साल से कैंटीन में काम करते हुए सतबीर का पुलिस कर्मचारियों और अधिकारियों से अच्छा भाईचारा बन गया था। कई पुलिस कर्मचारियों से उसने कर्जा लेकर साढे़ तीन लाख रुपये उक्त दोनों व्यक्तियों को दिए। दोनों व्यक्तियों ने सतबीर के साथ धोखा किया और उसके पुत्र को नौकरी नहीं लगाई। सतबीर ने अपने रुपये मांगे तो वे देने में आनाकानी करने लगे। सतबीर ने भिवानी पुलिस अधीक्षक से आरोपियों के बारे में शिकायत की लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।
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सतबीर ने सिरसा पुलिस अधीक्षक अश्विन शैणवी से भी आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की गुहार लगाई थी। कर्ज का रुपया ब्याज सहित पांच लाख रुपये तक पहुंच गया। कर्जा देने वाले उससे अपने रुपये मांगने लगे, जिससे सतबीर की परेशानी बढ़ती रही और तनाव में आकर रविवार अल सुबह उसने पुलिस अधीक्षक कार्यालय के पीछे जनरेटर रूम से गली लोहे की पाइप पर रस्सी से फंदा डालकर जान दे दी।

हॉकर ने दी घटना की जानकारी

in name of son's job fraud with canteen owner, suicide

सतबीर पुलिस अधीक्षक कार्यालय में ही रात को सोया करता। शनिवार को भी वह रात को गारद में तैनात कृष्ण कुमार के साथ सोया था। दोनों ने एक साथ भोजन बनाकर खाया और गारद रूम में सो गए। कृष्ण कुमार का कहना है कि सतबीर की बातों से ऐसा नहीं लग रहा था कि वह परेशान है। हां, वो कर्ज को लेकर थोड़ा चिंतित रहता था।

रात करीब दो बजे सतबीर उठा और पानी पीकर फिर लेट गया। वह रोज सुबह सैर पर जाता था। सुबह तीन बजे वह उठा और गेट खोलकर बाहर की तरफ चला गया। प़ुलिस कर्मी क़ृष्ण कुमार ने सोचा कि सतबीर सैर करने चला गया है। वह चाय बनाने लगा ताकि सतबीर सैर से लौटे तो चाय तैयार मिले, लेकिन सतबीर वापस नहीं आया।

सुबह सात बजे पुलिस अधीक्षक कार्यालय में हॉकर अखबार देने आया और गार्ड कृष्ण कुमार ने उससे अखबार लिया। हॉकर कार्यालय के पीछे कोर्ट परिसर की तरफ जाने लगा तो उसने जनरेटर रूम में फंदे पर व्यक्ति का शव लटकते देखा। वह दौड़कर गार्ड कृष्ण के पास गया और इसकी जानकारी दी।

कृष्ण कुमार भागकर वहां आया तो सतबीर को फंदे पर लटका पाया। कृष्ण ने साथी पुलिस वालों को इसकी सूचना दी। कंट्रोल रूम से वीटी करवाई और हुडा चौकी को फोन किया, लेकिन आधा घंटे तक कोई भी मौके पर नहीं पहुंचा। इसके बाद शहर थाना प्रभारी अनिल कुंडू को फोन पर जानकारी दी गई।

थाना प्रभारी मौके पर पहुंचे और पुलिस अधीक्षक को घटनाक्रम के बारे में बताया। एसपी अश्विन शैणवी भी मौके पर पहुंचे। थाना प्रभारी को उसके पास से सुसाइड नोट मिला। एसपी ने सुसाइड नोट में अंकित आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने को कहा।

आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज
हुडा चौकी पुलिस शव को कब्जे में लेकर सामान्य अस्पताल पहुंची। प्रवक्ता सुरजीत सहारण ने बताया कि पुलिस ने मृतक के परिजनों का बयान दर्ज किया और सुसाइड नोट के आधार पर आरोपी ऋषि त्यागी और धनपत के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया। दोपहर को शव का पोस्टमार्टम करवाकर परिजनों को सौंप दिया गया।

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