शर्मनाक करतूत पर डीएसपी नपे, एफआईआर
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फतेहाबाद के डीएसपी विजय कुमार को एक मामले में गलत रिपोर्ट बनाकर आरोपी को फायदा पहुंचाने की कोशिश भारी पड़ गई। जिला एवं सत्र न्यायाधीश बलजीत सिंह की अदालत ने इस मामले में सोमवार को डीएसपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने और एसपी और प्रदेश के मुख्य सचिव को डीएसपी की कार्यप्रणाली की जांच करके तीन महीने में रिपोर्ट देने के आदेश दिए हैं।
31 मई, 2013 को सिरसा पुलिस के एएसआई ओमप्रकाश की शिकायत पर शहर थाना पुलिस ने दरियापुर के सरपंच जितेंद्र, एनआरआई सुरेश कुमार और संदीप कुमार के खिलाफ कई संगीन धाराओं में मामला दर्ज किया था। ओमप्रकाश ने बताया कि वह हिसार से सिरसा पुलिस की बस लेकर जा रहा था।
उसने आरोप लगाया कि नेशनल हाईवे पर आजाद पेट्रोल पंप के पास रात के समय तीनों आरोपियों ने शराब के नशे में बस को रोक कर उससे मारपीट की और गंभीर रूप से घायल कर दिया। पुलिस ने सुरेश कुमार और संदीप कुमार को गिरफ्तार कर लिया था जबकि सरपंच जितेंद्र ने फतेहाबाद के सत्र न्यायालय में अग्रिम जमानत की याचिका लगाई, जिसे अदालत ने रद कर दिया।
उसके बाद उच्च न्यायालय से उसने अग्रिम जमानत ले ली। तत्कालीन जांच अधिकारी नृपजीत सिंह ने तफ्तीश करते हुए जितेंद्र सरपंच से गाड़ी बरामद करके उसे आरोपी बना लिया। नृपजीत सिंह के तबादले के बाद जांच डीएसपी विजय कुमार कक्कड़ के पास आ गई। डीएसपी ने सत्र न्यायालय से पुन: जांच के आदेश मांगे।
निजी स्वार्थों के लिए आरोपी को निर्दोष करार दिया
इस बीच, उच्च न्यायालय ने आरोपी जितेंद्र की अंतरिम जमानत रद कर दी। फतेहाबाद के सत्र न्यायालय ने भी आरोपी जितेंद्र से गाड़ी बरामद होने पर पुन: जांच की स्वीकृति न देकर डीएसपी की एप्लीकेशन को रद कर दिया। इसके बावजूद डीएसपी विजय कुमार ने इसकी पुन: जांच की और आरोपी को निर्दोष करार देते हुए डिस्चार्ज रिपोर्ट कोर्ट में दाखिल कर दी।
इस बीच, शिकायतकर्ता एएसआई ओमप्रकाश ने अदालत में एप्लीकेशन लगाई कि डीएसपी विजय कुमार ने अपने निजी स्वार्थों के लिए आरोपी को निर्दोष करार दिया है। जिला अदालत ने सोमवार को अपने फैसले में डीएसपी विजय कुमार के खिलाफ भादसं की धारा 167, 218 के तहत मामला दर्ज करने के आदेश दिए।
अदालत ने फतेहाबाद पुलिस अधीक्षक को फैसले की कॉपी मुहैया करवाते हुए आदेश दिया कि इस मामले की जांच तीन महीने में पूरी करके रिपोर्ट कोर्ट में प्रस्तुत की जाए। अदालत ने प्रदेश के मुख्य सचिव को लिखा कि डीएसपी विजय कुमार की किसी वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी से जांच करवाई जाए कि अब तक विजय कुमार ने कितने आरोपियों के हक में रिपोर्ट तैयार की है।
ऐसे मामलों की पुन: जांच की जाए। अदालत ने मुख्य सचिव को निर्देश दिया है कि वह तीन महीने में रिपोर्ट भेजना सुनिश्चित करें। अदालत ने स्पष्ट किया कि इस पूरे मामले की रिपोर्ट डीएसपी के सर्विस रिकॉर्ड में लगाया जाए। इस मामले में डीएसपी विजय कक्कड़ ने कहा कि इस मामले में वह कानून के जानकारों से राय लेकर अगला कदम उठाएंगे।