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'पैसे दो और बताओ, पुलिस में भर्ती होना है या आर्मी में'

Tue, 04 Feb 2014 11:49 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Tue, 04 Feb 2014 11:49 AM IST
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Fraud IPS and Chandigarh Police
फर्जी आईपीएस की वर्दी पहने पकड़े गए युवक रविकांत ने आर्मी और हरियाणा पुलिस में भर्ती करवाने के लिए युवकों से रुपये लिए थे। यह खुलासा पूछताछ के दौरान रविकांत ने किया।
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आर्मी में भर्ती करवाने के लिए रविकांत खुद को आर्मी में कैप्टन बताता था। वह दावा करता था आईपीएस में सलेक्ट होने पर कैप्टन की नौकरी छोड़नी पड़ी थी। उसने कैप्टन की वर्दी में फोटो भी खिंचवा रखी थी। जिससे पुलिस ने बरामद कर लिया है।
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वहीं, फर्जी आईपीएस रविकांत ने हरियाणा स्थित रेवाड़ी के इंद्रजीत सिंह, महेंद्र गढ़ के गांव नारनौल निवासी बलवंत और विष्णु भगवान से तीन लाख रुपये लिए थे।
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यही नहीं पूछताछ के दौरान पता चला कि आरोपी का एक भाई दिल्ली पुलिस में बतौर कांस्टेबल और पिता कस्टम विभाग में तैनात है। फोर्स में भर्ती न होने पर रविकांत ने अपना शौक पूरा करने के लिए फर्जी आईपीएस बनने की योजना बनाई थी।

रविकांत नौकरी के नाम पर रुपये ठगने के दौरान लोगों को बताता था कि वह पहले आर्मी में कैप्टन था। आईपीएस में सलेक्ट होने पर उसने आर्मी की नौकरी छोड़ दी। वह दावा करता था कि उसके आर्मी में अफसरों से संबंध और उन्हें कांस्टेबल भर्ती करवा देगा।

क्राइम ब्रांच की टीम ने तीनों युवकों से संपर्क कर रविकांत के खिलाफ शिकायत ले रही है। जांच में पता चला है कि फर्जी आईपीएस के खिलाफ एक और धोखाधड़ी का मामला दर्ज हो सकता है।

सेक्टर 17 से खरीदी थी वर्दी
रविकांत ने यहां आते ही सबसे पहले सेक्टर-17 स्थित हरमन दुकानदार से खाकी वर्दी खरीदी। वर्दी खरीदते समय हरमन ने खुद को आईपीएस बताया था। इसके अलावा उसने डिस्काउंट भी हासिल किया था। पूछताछ में बताया कि उसने दुकानदार से चार जोड़ी वर्दी खरीदी हैं।


महिला कांस्टेबल गई छुट्टी पर
फर्जी आईपीएस को टाटा सफारी गाड़ी अपने नाम पर दिलाने वाली महिला कांस्टेबल छुट्टी पर चली गई है। पीसीआर पर तैनात महिला कांस्टेबल को रविकांत ने जाल में फंसाकर उसके नाम पर टाटा सफारी गाड़ी खरीदी थी। पुलिस जल्द ही महिला कांस्टेबल के बयान भी दर्ज करेगी।
 
खाकी रंग की वर्दी बेचने पर दुकानदार को रोकने का कोई नियम नहीं है। अगर, वर्दी का कोई मिसयूज करता है तो उसके खिलाफ मामला दर्ज किया जाता है।
आरपी उपाध्याय, आईजी, चंडीगढ़
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