चंडीगढ़ में बड़े वाहन चोर गिरोह का खुलासा शातिर गिरफ्तार, साढ़े तीन करोड़ की 17 लग्जरी गाड़ियां बरामद
- हरियाणा की दो रजिस्टरिंग अथॉरिटी के कर्मचारियों से मिलीभगत कर फर्जी दस्तावेज तैयार कर बेचते थे गाड़ियां
- मेरठ के शातिर चोर सिक्योरिटी सिस्टम बंद चुराते थे नई गाड़ियां, पांच से सात लाख में रोहतक के आरोपियों को बेचते थे
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चंडीगढ़ के सेक्टर-31 थाना पुलिस ने चोरी की लग्जरी गाड़ियों के फर्जी दस्तावेज तैयार कर बेचने वाले गिरोह के दो शातिरों को दबोचा है। पकड़े गए दोनों आरोपियों से करीब साढ़े तीन करोड़ की 17 लग्जरी गाड़ियां बरामद की गई हैं। पुलिस जांच में सामने आया कि दोनों आरोपी मेरठ के 8 चोरों और हरियाणा की दो रजिस्टरिंग अथॉरिटी के कर्मचारियों के साथ मिलकर गोरखधंधा कर रहे थे।
सेक्टर-31 थाना पुलिस ने रोहतक के गांव सीसर खास निवासी रमेश (39) और दशहरा ग्राउंड वार्ड नंबर 5 निवासी अमित कुमार (37) के खिलाफ मामला दर्ज किया है। सेक्टर- 31 थाना प्रभारी राजदीप सिंह की अगुवाई में एएसआई अख्तर हुसैन इंडस्ट्रियल एरिया फेस-2 स्थित शिव मंदिर के पास पेट्रोलिंग कर रहे थे। इसी बीच वाहन चोर गिरोह के आने की सूचना मिलने पर इंडस्ट्रियल एरिया फेस-2 डिवाइडिंग रोड पर नाका लगा दिया गया। इस दौरान कालीबाड़ी लाइट प्वाइंट की तरफ से ट्रिब्यून चौक की ओर गुजर रही एक सफेद रंग की क्रेटा नंबर (एचआर-15ई 8648) गाड़ी को पुलिस ने रुकवा लिया।
चालक ने अपना नाम रोहतक के गांव सीसर खास निवासी रमेश बताया। जांच में सामने आया कि गाड़ी दिल्ली से चोरी की गई है, जिसका असली रजिस्ट्रेशन नंबर (डीएल-08 सीएएम 0936) है। वहीं, गाड़ी में लगा इंजन और चेसिस नंबर भी फर्जी है। इसके बाद पुलिस ने आरोपी रमेश को गिरफ्तार कर लिया।
गैंग में 10 से 12 लोग शामिल
पूछताछ में आरोपी रमेश ने अपने दूसरे साथी रोहतक निवासी अमित कुमार के नाम का खुलासा किया। इसके बाद पुलिस ने अमित को सेक्टर- 31 थाने के अंतर्गत गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में सामने आया कि दोनों ने 16 लग्जरी गाड़ियां जींद, रोहतक, भिवानी व हिसार में बेची हैं। इनकी निशानदेही पर पुलिस ने सभी लग्जरी गाड़ियां बरामद कर लीं।
ऐसे चल रहा था खेल
आरोपियों ने खुलासा किया कि उनके गैंग में मेरठ निवासी 8 चोर भी शामिल हैं। ये पंजाब व दिल्ली के अलग-अलग हिस्सों से गाड़ियों के सिक्योरिटी सिस्टम बंद कर सिर्फ नई गाड़ियां चोरी कर रमेश और अमित से संपर्क करते थे। इसके बाद दोनों एक गाड़ी को पांच से सात लाख के बीच खरीदकर रजिस्ट्रेशन की फाइल तैयार कराते थे और फिर हरियाणा के महम व चरखी दादरी की रजिस्टरिंग अथॉरिटी के कर्मचारियों की मिलीभगत से फर्जी इंजन व चेसिस नंबर की आरसी बनवा लेते थे फिर इन गाड़ियों को हरियाणा, पंजाब, दिल्ली व राजस्थान में 10 से 25 लाख रुपये में बेच देते थे। पुलिस का दावा है जल्द ही गैंग में शामिल अन्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
पुलिस इन पहलुओं पर कर रही है जांच
- पकड़ी गई गाड़ियों से गैंगस्टरों के कहने पर कहीं रेकी तो नहीं की गई।
- इन गाड़ियों से शराब तस्करी तो नहीं हुई।
- क्या कहीं कोई गाड़ी गैंगस्टर को तो नहीं बेची गई।
- किसी वारदात में यह गाड़ियां शामिल तो नहीं।
- किसी गाड़ी से कोई हादसा तो नहीं हुआ।
- रजिस्टरिंग अथॉरिटी का कौन-कौन कर्मचारी शामिल है।
- कब से अथॉरिटी के लोग इस धंधे में शामिल हैं।
जल्द होगी अन्य की गिरफ्तारी
पुलिस का दावा है कि मेरठ निवासी आठ आरोपियों समेत रजिस्टरिंग अथॉरिटी में शामिल लोगों की गिरफ्तारी जल्द की जाएगी। पुलिस को उम्मीद है कि आरोपियों से और लग्जरी गाड़ियां बरामद हो सकती हैं।
पिछले 9 साल से गिरोह सक्रिय
पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ 420, 467, 468, 471, 473, 484, 411, 201 और 120बी के तहत मामला दर्ज कर दोनों का 12 जून तक रिमांड हासिल किया है। पुलिस जांच में रमेश का कोई आपराधिक रिकॉर्ड सामने नहीं आया है, जबकि अमित कुमार के खिलाफ सेक्टर-3 थाने में इसी तरह का केस 24 दिसंबर 2011 को दर्ज किया गया था।
17 गाड़ियां हुई हैं बरामद
फॉर्च्यूनर (एचआर-15डी 9247), फॉर्च्यूनर (एचआर- 10 -0121), फॉर्च्यूनर (एचआर-26 ईए 2500), फॉर्च्यूनर (एचआर-10- 1111), फॉर्च्यूनर (एचआर-15डी 5948), फॉर्च्यूनर (एचआर-12 एल 2525), फॉर्च्यूनर (एचआर-15डी 6975), इनोवा (एचआर-34जी 0444), इनोवा (एचआर-19जी 0999), इनोवा (एचआर-10-1617 ), क्रेटा (एचआर-19जी 0555), क्रेटा (एचआर-15ई 8648), क्रेटा (एचआर-21एच 0666), क्रेटा (एचआर-15डी 2681), क्रेटा (एचआर-10-2002), ब्रेजा (एचआर-10-8055), ब्रेजा (एचआर-15-0120)।
क्राइम ब्रांच ने पकड़ी थीं 16 लग्जरी गाड़ी
बता दें कि फरवरी 2020 में क्राइम ब्रांच ने दो आरोपियों को गिरफ्तार कर दो करोड़ कीमत की 16 लग्जरी गाड़ियां बरामद की थीं। इनमें फॉर्च्यूनर, इनोवा, होंडा सिटी, क्रेटा, वरना, पजेरो, स्विफ्ट डिजायर, बलेनो समेत ऑल्टो कार शामिल थी। जांच में सामने आया था कि आरोपी इंश्योरेंस कंपनी से एक्सीडेंटल व खराब गाड़ियां खरीदते थे और चोरी की गाड़ियों पर उनके चेसिस और इंजन नंबर चढ़ा देते थे। इसके बाद उन गाड़ियों का फर्जी दस्तावेज बनाकर पंजाब व महाराष्ट्र में बेच देते थे।