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ड्रग तस्करी केस में हाईकोर्ट ने सुनाया महत्वपूर्ण फैसला

Thu, 08 Oct 2015 08:03 AM IST
ब्यूरो/अमरउजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमरउजाला, चंडीगढ़ Updated Thu, 08 Oct 2015 08:03 AM IST
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CBI will not investigate of drug trafficking case: high court

पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने ड्रग्स तस्करी में फंसे जगदीश भोला और अन्य के खिलाफ दर्ज मामलों की सीबीआई से जांच कराने की मांग खारिज कर दी है।

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जस्टिस सूर्यकांत की डिवीजन बेंच ने मामलों की जांच के लिए तीन सदस्यीय आईपीएस अफसरों की कमेटी गठित की है, जो विभिन्न मामलों की सुनवाई के दौरान ट्रायल कोर्ट में अपनी अंतरिम रिपोर्ट देगी।
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सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर हाईकोर्ट बेंच ने कई मामलों पर एक साथ सुनवाई करते हुए अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। बुधवार दोपहर बाद बेंच ने अपना फैसला सुनाते हुए भोला की मांग खारिज कर दी, वहीं मुख्य ड्रग केस में फंसे जगजीत सिंह चहल की जमानत जारी रखी है, लेकिन उनके भाई परमजीत सिंह की जमानत खारिज कर दी। इनके अलावा भोला के सह अभियुक्तों व कुछ अन्य ने भी उनके खिलाफ दर्ज मामले की जांच सीबीआई से कराने की मांग और जमानत मांगी थी।
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तीन आईपीएस देखेंगे अलग-अलग मामले
बिट्टू औलख को मुख्य मामले में जमानत से हाईकोर्ट ने इनकार कर दिया है, लेकिन उनके खिलाफ जालंधर में दर्ज मामले में जमानत मंजूर कर ली गई। हाईकोर्ट ने ऐसे सभी 10 मामलों की जांच के लिए पंजाब के तीन आईपीएस ईश्वर सिंह, जी नागेश्वर राव व बी नीरजा की निरीक्षण कमेटी गठित कर मामलों में पुनर्विचार का निर्देश दिया है।

पंजाब सरकार के खिलाफ मानहानि केस किया था

CBI will not investigate of drug trafficking case: high court

भोला और उनके पिता बलछिंदर सिंह ने एडवोकेट अनमोल रत्न सिंह सिद्धू व एडवोकेट गोपाल सिंह नहेल के माध्यम से दायर याचिका में कहा था कि भोला की ओर से पंजाब सरकार के खिलाफ 20 लाख रुपये का मानहानि मामला दायर किया गया था।

इसमें गवाहियां शुरू होनी थीं, लेकिन मामले में वह पैरवी न कर सके, इसी मंशा से गवाहियां शुरू होने से पहले उसे ड्रग्स मामले में फंसा दिया गया। हवाला दिया गया कि इससे पहले भी भोला के खिलाफ वर्ष 2003 में मामला दर्ज किया गया था, जो बाद में झूठा निकला था।

आरोप था कि उस वक्त भोला अंतरराष्ट्रीय खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाला था, लेकिन उसके विरोधी पहलवान परमिंदर दूमछेड़ी के एक रिश्तेदार ने पुलिस में उच्च पद पर होने के प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए झूठे मामले में फंसाया था। ऐसे तीन मामले झूठे निकले। इसी कारण भोला ने मानहानि का केस दायर किया था।

दलील, भोला को नामजद करना गलत: बलछिंदर सिंह ने फतेहगढ़ साहिब में दर्ज मामले में अमनिंदर गिल के बयान पर भोला को इस मामले में नामजद करने के मामले की सीबीआई जांच की मांग की थी। उन्होंने दलील दी थी कि अमनिंदर गिल से पुलिस ने एक करोड़ रुपये लिए थे कि उसके खिलाफ मामला दर्ज नहीं किया जाएगा, लेकिन फिर भी मामला दर्ज कर लिया गया।

इस मामले में पैसे की मांग करना एवं लेनदेन संबंधी अन्य तथ्यों की वीडियो रिकार्डिंग भी बलछिंदर सिंह ने हाईकोर्ट में पेश की थी और हाईकोर्ट ने इसे रिकार्ड पर लिया था। इस वीडियोग्राफी के आधार पर दलील दी गई थी कि जिस मामले का आधार ही नहीं था, उसमें मुख्य आरोपी के बयान पर भोला को नामजद करना गलत है।

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