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पंजाब पुलिस की एआईजी क्राइम के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज

Wed, 27 Jun 2018 09:46 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Wed, 27 Jun 2018 09:46 AM IST
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case ragister against Punjab police AIG Crime
डेमो - फोटो : डेमो
पंजाब से रिटायर्ड आईएएस सुखदीप बराड़ ने कनाडा निवासी बेटे अजीत बराड़ के बैंक खाते से 3.50 लाख रुपये की धोखाधड़ी समेत अन्य धाराओं में पंजाब पुलिस की एआईजी क्राइम अमृत बराड़ के खिलाफ चंडीगढ़ पुलिस में केस दर्ज कराया है। सेक्टर-11 थाना पुलिस ने एआईजी क्राइम अमृत बराड़ के खिलाफ आईपीसी की धारा 420, 467, 468, 471, 120बी और आईटी एक्ट 66 (सी) और 66 (डी) के तहत केस दर्ज किया है। फिलहाल चंडीगढ़ पुलिस मामले की जांच कर रही है।
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चंडीगढ़ पुलिस के डीजीपी को दी शिकायत में रिटायर्ड आईएएस सुखदीप बराड़ ने कहा है कि उनका बेटा अजीत सिंह बराड़ कनाडा का मूल निवासी है। वर्तमान में सुखदीप बराड़ बेटे अजीत और बेटी निमरत बराड़ के साथ वाशिंगटन डीसी, यूएसए में रह रही हैं। नवंबर 2013 में उनका बेटा अजीत मुक्तसर साहिब के मलोट तहसील स्थित अबुल खुराना गांव में अपने दादा गुरदर्शन सिंह बराड़ से मिलने आया था।
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 उनकी तबीयत उस वक्त बहुत खराब थी और वह अस्पताल में भर्ती थे। उस वक्त उसके दादा ने उसे बताया कि उन्होंने एचडीएफसी बैंक में एक खाता खोला हुआ है, जिसमें उन्होंने उसके लिए कुछ पैसे जमा किए हुए हैं। दादा की तबीयत बहुत खराब होने और इंडिया में केवल एक सप्ताह के लिए मौजूद होने पर वह उस वक्त अकाउंट संबंधी अधिक जानकारी नहीं ले सका। बाद में 30 नवंबर 2013 को उसके दादा का बीमारी के चलते देहांत हो गया।
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दिसंबर 2013 में अजीत फिर से इंडिया आया और बठिंडा में बैंक की शाखा में संपर्क किया। अजीत और उनकी मां ने ज्वाइंट खाता खोलने के लिए आवेदन किया तो बैंक अधिकारियों ने उन्हें बताया कि अजीत और उसके दादा के नाम से पहले ही 29 मार्च 2012 को चंडीगढ़ स्थित एक शाखा में एक ज्वाइंट खाता खुला हुआ है। उस वक्त उस खाते में 1.74 लाख रुपये थे।

बैंक की ओर से अजीत को एटीएम कार्ड जारी किया गया था, लेकिन इससे पहले कि वह एक्टिवेट हो पाता अजीत जनवरी 2014 में वापस कनाडा चला गया। मार्च में एक दिन अजीत के मोबाइल पर मैसेज आया कि उसके खाते में 79 हजार रुपये शेष हैं जबकि उसने इस बीच कोई पैसा नहीं निकाला था। बैंक से संपर्क किया गया तो उन्हें बताया गया कि उनके एटीएम से गुड़गांव और चंडीगढ़ के एटीएम से पैसे निकाले गए हैं। कुछ गड़बड़ होने की आशंका होते ही अजीत ने संयुक्त बैंक खाते को ब्लॉक करवा दिया। साथ ही बैंक खाते से जुड़े दस्तावेज मंगवाए।

बैंक में खाता खुलवाने के लिए अजीत के वोटर आईकार्ड का इस्तेमाल किया गया था जबकि उसने आज तक वोटर आईकार्ड के लिए आवेदन ही नहीं किया था। अकाउंट खोलने के लिए सौंपे गए बैंक खातों में उसके जाली साइन किए गए थे। वहीं, बैंक के तत्कालीन मैनेजर अनुज खरबंदा, कर्मचारी सुजीत कुमार सलुजा और मनीषा कौशिक ने अजीत की मौजूदगी दिखाते हुए फार्म वेरिफाई किया था जबकि अजीत उस वक्त इंडिया में ही नहीं था।

बैंक स्टेटमेंट के बाद उन्हें पता चला कि उनके संयुक्त खाते में 20 सितंबर 2013 को 3 लाख रुपये ट्रांसफर किए गए थे और 26 सितंबर 2013 को 3.50 लाख रुपये अमृत बराड़ की मां सुखपाल कौर के खाते में आरटीजीएस के जरिए ट्रांसफर किए गए थे।

आरोप के अनुसार बुआ अमृत बराड़ ने भतीजे अजीत बराड़ के फर्जी दस्तावेज बनवाकर उनके नाम से एटीएम कार्ड जारी करवाए और खाते पर पूरा नियंत्रण रखा। सुखदीप बराड़ के आरोप के अनुसार अमृत बराड़ ने ही वह पैसे अपनी मां के खाते में धोखाधड़ी से ट्रांसफर किए हैं। फिलहाल यूटी पुलिस की साइबर सेल मामले की जांच कर रही है। 

आईपीएस अविंदर सिंह की पत्नी हैं सुखदीप
मामले में शिकायतकर्ता सुखदीप बराड़ रिटायर्ड आईएएस हैं। उनके पति स्वर्गीय अविंदर सिंह बराड़ आईपीएस ऑफिसर थे। 1987 में हुए आतंकी हमले में वह शहीद हो गए थे। उस समय वह तत्कालीन एसएसपी पटियाला थे। अविंदर सिंह को भारत सरकार की ओर से मरणोपरांत पद्मश्री भी दिया गया है। उनके दोनों बच्चे अजीत और निमरत कनाडा के मूल निवासी हैं। अविंदर की मौत के बाद विशेष प्रावधान के तहत उनकी बहन अमृत बराड़ जो कि उस वक्त सीआरपीएफ में तैनात थीं, उन्हें पंजाब पुलिस में नौकरी दी गई थी।


पंजाब पुलिस की एआईजी क्राइम अमृत बराड़ ने कहा, मेरे पिता जी ने मेरी मां के खाते में पैसे ट्रांसफर किए हैं। इसमें मेरा कोई रोल नहीं है। मेरे खिलाफ झूठी शिकायत दी गई है। चंडीगढ़ पुलिस ने शिकायत की बिना जांच पड़ताल और बिना मुझे सूचना दिए मेरे खिलाफ केस दर्ज किया है। दोनों पक्षों में सिविल और प्रापर्टी विवाद के मामले अदालत में विचाराधीन हैं। वहीं, चंडीगढ़ पुलिस ने अब तक मुझे एफआईआर की कॉपी भी नहीं दी है।
 
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