पुलिस के जुल्म की दास्तां अदालत में बेपर्दा

ब्यूरो/अमर उजाला, मालेरकोटला (संगरूर)। Updated Thu, 08 May 2014 10:56 PM IST
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businessman was sent to prison by telling Drug traffickers, Released by Court

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भवानीगढ़ पुलिस थाने की ओर से एक दुकानदार को नशे का कारोबारी बताकर जेल की सलाखों के पीछे पहुंचाने के झूठे मामले को अदालत ने बेनकाब कर दिया है।
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दुकानदार डेढ़ साल से जेल में बंद है। अदालत ने वीरवार को उसे तुरंत रिहा करने के आदेश जारी कर दिए।
पीड़ित दुकानदार शांति स्वरूप गोयल के वकील सईद शब्बीह हैदर ने वीरवार को पत्रकारों को बताया कि पीड़ित कस्बा भवानीगढ़ के पास स्थित गांव माझी का रहने वाला है।
वह करियाने की दुकान चलाता है। अर्से से उसके गांव में कुछ लोगों के साथ राजनीतिक मतभेद चले आ रहे थे। उन्होंने भवानीगढ़ पुलिस के साथ बातचीत करके उसे अठारह सौ से अधिक नशीले कैप्सूल की तस्करी करने के आरोप में 2012 में गिरफ्तार करवा दिया।

पीड़ित पक्ष के वकील एसएस हैदर ने नशा तस्करी की स्पेशल अदालत में न्यायाधीश संदीप सिंगला को बताया कि पुलिस ने दर्ज मामले में दुकानदार को जिले के बिम्बनी पुल से गिरफ्तार किए जाने का दावा किया गया है जबकि गांव माझी के एक शख्स ने अदालत में पेश होकर दिए बयान में कहा है कि पुलिस दुकानदार शांति स्वरूप को उसके घर से उठा ले गई थी।

उस समय दुकानदार के पास कुछ भी नहीं था। इस संगीन मामले में सख्त धाराओं के कारण उसकी जमानत भी नहीं हो पाई थी इसलिए अगस्त 2012 से दुकानदार शांति स्वरूप जेल में बंद है।

पुलिस की इस हरकत पर नाराजगी जताते हुए जज संदीप सिंगला ने पीड़ित को बरी कर जेल से रिहा करने के आदेश दे दिए।
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