अब ऐसे सामने आएगा साध्वियों का 'काला' सच
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चरखी दादरी के श्रीकृष्ण प्रणामी आश्रम की साध्वियों पर लगे यौन उत्पीड़न व किशोरी का समलैंगिक विवाह कराने के आरोपों की जांच में जुटी स्पेशल इनवेस्टिगेशन टीम ने अब साध्वियों का पॉलीग्राफ टेस्ट कराने का निर्णय लिया है। सच्चाई जानने के लिए दोनों साध्वियों का पॉलीग्राफ टेस्ट होगा। उधर एसआईटी की कुछ सदस्यों ने उन्हें जांच में शामिल नहीं करने का आरोप लगाया है।
चरखी दादरी के श्रीकृष्ण प्रणामी आश्रम की साध्वियों पर एक किशोरी के लगाए यौन उत्पीड़न और समलैंगिक विवाह कराने का मामला सुलझने की बजाए उलझता जा रहा है। शनिवार को पुलिस टीम ने चरखी दादरी जाकर मामले में जांच की।
पीड़िता से बातचीत की गई। मामले में कोई निचोड़ सामने नहीं आने और मामला एक किशोरी व एक धार्मिक संस्थान से जुड़ा होने के कारण पुलिस ने दोनों साध्वियों का पॉलीग्राफ टेस्ट कराने का निर्णय लिया है।
दिल्ली स्थित क्राइम फोरेंसिक साइंस लैब में यह टेस्ट होगा
दोनों साध्वियों का अगले दो-तीन दिन में दिल्ली स्थित क्राइम फोरेंसिक साइंस लैब में यह टेस्ट होगा। एसआईटी की एक सदस्य ने बताया कि पॉलीग्राफ टेस्ट कराने की तैयारी हो गई है। टीम इस टेस्ट के सहारे कुछ सबूत जुटाने का प्रयास करेगी ताकि केस को सुलझाया जा सके। चरखी दादरी सिटी एसएचओ सुखबीर सिंह ने बताया कि पॉलीग्राफ टेस्ट जल्द कराया जाएगा।
मामले की जांच कर रही स्पेशल इनवेस्टिगेशन टीम भी बिखरती नजर आ रही है। शुक्रवार को जहां टीम में शामिल सोशल वर्कर सुशील वर्मा ने एसआईटी से इस्तीफा दे दिया था, वहीं शनिवार को एसआईटी में शामिल चाइल्ड वेलफेयर कमेटी के सदस्यों ने भी उन्हें जांच की सूचना नहीं देने और जांच में शामिल नहीं करने के आरोप लगाए।
एसआईटी कमेटी सदस्य सीडब्ल्यूसी चेयपर्सन राजबाला श्योराण, सदस्य सुनीता यादव ने बताया कि उन्हें कोई जानकारी नहीं है कि टीम ने शनिवार को भी मामले में कोई जांच की है। उन्हें जांच में शामिल नहीं किया गया। नियमानुसार जांच में सभी सदस्यों का होना जरूरी होता है।
जबरन समलैंगिक विवाह और यौन शोषण
बालिग होते ही उसे साध्वी बनाया जाए। किशोरी ने बताया कि भगवान की प्रतिमा के सामने उससे पत्र लिखवाया गया कि किसी को कुछ बताया तो उसका सब कुछ खत्म हो जाएगा। उसका समलैंगिक विवाह करवाते हुए कहा कि यही असली भक्ति है। सिलाई सेंटर में भी उसे स्पेशल दर्जा दिया गया था। उसे साध्वी अपने पास बैठाती थी।
परिवार समेत डीसी, एसपी से मिलने पहुंची पीड़िता
यौन उत्पीड़न हुआ तब थी नाबालिग
आयु पर उठ रहे सवालों के बीच पीड़ित लड़की के परिजनों ने बताया कि जन्म प्रमाण पत्र में पीड़ित की उम्र 6 सितंबर 1996 है और स्कूल सर्टिफिकेट में 14 जुलाई 1997। 12 अगस्त 2013 में उसका पहली बार यौन उत्पीड़न किया गया।
13 दिसंबर में मुख्य साध्वी की मौजूदगी में और दो जनवरी 2014 में मुख्य साध्वी ने यौन उत्पीड़न किया। उस दौरान जन्म प्रमाण पत्र और स्कूल सर्टिफिकेट दोनों के ही अनुसार वह नाबालिग थी।
एसआईटी सदस्य का इस्तीफा
साध्वी से जबरन समलैंगिक विवाह मामले में पुलिस कार्रवाई में देरी से नाराज स्पेशल इनवेस्टिगेशन कमेटी (एसआईटी) के एक सदस्य ने इस्तीफा दे दिया है। साथ ही अन्य कुछ सदस्यों ने भी खुद को जांच से अलग करने का अल्टीमेटम दिया है। वहीं, पीड़ित लड़की शुक्रवार को डीसी और एसपी से मिलने पहुंची। अधिकारियों के कार्यालय से बाहर होने के कारण मुलाकात नहीं हो सकी। पीड़ित ने चेतावनी दी है कि दो दिन में कार्रवाई नहीं हुई तो धरने पर बैठेगी।
आश्रम की साध्वियों पर जबरदस्ती समलैंगिक विवाह व यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाने वाली नाबालिग लड़की के साथ-साथ एसआईटी के सदस्यों ने कार्रवाई में देरी को लेकर शुक्रवार को तीखे तेवर दिखाए। डीएसपी के नेतृत्व में गठित एसआईटी सदस्य सोशल वर्कर सुशील वर्मा ने शुक्रवार को टीम अपने को अलग कर लिया।
उन्होंने सीडब्ल्यूसी चेयरपर्सन को अपना इस्तीफा सौंपा। जांच में देरी पर एसआईटी में शामिल सीडब्ल्यूसी चेयरपर्सन और सदस्य भी परेशान हैं। इन्होंने चेतावनी दी है कि सोमवार तक कोई कार्रवाई नहीं हुई तो वे भी एसआईटी से इस्तीफा दे देंगी।
यह है मामला
मामला नवंबर के प्रथम सप्ताह में सामने आया जब चरखी दादरी की एक महिला ने श्रीकृष्ण प्रणामी मंदिर की साध्वियों पर वशीकरण का आरोप लगाया। 14 नवंबर को चाइल्ड वेलफेयर सोसायटी ने जांच शुरू की। किशोरी ने आश्रम की साध्वियों पर समलैंगिक विवाह कराने, यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए। पुलिस ने वशीकरण का मामला दर्ज किया।
इस पर सीडब्ल्यूसी कमेटी ने आपत्ति जताई। पुलिस अधीक्षक ने मामले की जांच के लिए डीएसपी अमित भाटिया के नेतृत्व में स्पेशल इनवेस्टिगेशन कमेटी का गठन किया। कमेटी ने दोनों पक्षों के बयान लिए। इसके बावजूद मामले की जांच चल रही है।
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‘‘जांच बहुत धीमी गति से हो रही है। किशोरी मानसिक रूप से परेशान हो रही है और मामले में कोई कार्रवाई नहीं हो रही। जांच में देरी के कारण ही एसआईटी कमेटी से इस्तीफा दिया है।’’ - सुशील कुमार, सोशल वर्कर
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‘‘सोशल वर्कर सुशील कुमार ने स्पेशल इनवेस्टिगेशन कमेटी से इस्तीफा दे दिया है। वह जांच में देरी करने को कारण बता रहे है। जांच में ज्यादा देरी हो रही है। बृहस्पतिवार को डीएसपी ने बैठक ली थी और दो-तीन दिन में कार्रवाई की बात कही थी। अगर सोमवार तक कार्रवाई नहीं होती है तो सीडब्ल्यूसी सदस्य भी एसआईटी से इस्तीफा देंगे।’’- राजबाला श्योराण, चेयरपर्सन, चाइल्ड वेलफेयर सोसायटी
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‘‘स्पेशल इनवेस्टिगेशन टीम मामले की जांच कर रही है। जांच के बाद ही कोई कार्रवाई की जाएगी। केस के सभी पहलुओं से जांच की जा रही है। बिना जांच के कार्रवाई नहीं हो सकती।’’ - अमित भाटिया, डीएसपी
मामले में कुछ और चौंकाने वाले खुलासे
हरियाणा के भिवानी जिले के श्रीकृष्ण प्रणामी आश्रम में नाबालिग लड़की से समलैंगिक विवाह के सनसनीखेज मामले में साध्वियों पर कार्रवाई को लेकर प्रशासन असमंजस की स्थिति में है। पीड़ित लड़की के धारा 164 में ब्यान दर्ज होने के सात दिन बाद भी एफआईआर में कोई नई धारा नहीं जुड़ी है। पुलिस अभी तक वशीकरण का मामला ही मान कर चल रही है।
मामले में कुछ और चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। साध्वी के साथ विवाह का दावा करने वाली नाबालिग ने जांच अधिकारियों को यह बयान दिया था कि साध्वी ने शादी के लगभग दो माह बाद (13 दिसंबर 2013) पारंपरिक तरीके से सुहागरात मनाई थी। इस दिन उसे लाल साड़ी पहनाई और विवाह रचाने वाली साध्वी ने उसकी मांग में सिंदूर भरा।
साध्वी ने यह दिन इसलिए चुना, कि उसका (पीड़ित) परिवार खाटूश्यामजी धाम गया था। इस साल दो जनवरी को आश्रम की मुख्य साध्वी ने अपने जन्म दिन पर उसका यौन उत्पीड़न किया। जांच टीम के सामने पीड़ित लड़की से यह भी कहा कि विवाह रचाने वाली साध्वी के साथ उसके भावनात्मक रिश्ते तो थे, लेकिन शादी और यौन संबंध उसकी मर्जी के खिलाफ बनाए गए। स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) के सदस्य शिखर वर्मा ने इस बात की पुष्टि की है।
मामला कब और कैसे प्रकाश में आया
पिछले महीने की 14 तारीख को पीड़ित लड़की की मां ने बाल कल्याण समिति को शिकायत दी। शिकायत में आश्रम की साध्वी पर आरोप लगाया कि उसकी बेटी को बहलाकर कॉलेज जाने से रोका जा रहा है। उस दिन समिति के लोग पीड़ित लड़की से मिले, लेकिन लड़की ने साध्वी के पक्ष में ब्यान दिए। 17 नवंबर को समिति ने लड़की को भिवानी बुलाया।
लड़की ने पहली बार खुलासा किया कि साध्वी गले लगाती थी और अपने बिस्तर पर सुलाती थी। इसके बाद 20 नवंबर को समिति ने एसपी और डीसी को पत्र लिख कर जांच की मांग की। सात दिन बाद समिति ने दोनों अफसरों को नोटिस भेजा। अगले दिन चरखी दादरी पुलिस ने मुख्य साध्वी कौशल महाराज के खिलाफ (स्वतंत्रता भंग करने और जबरन कोई काम कराने के आरोप में) मामला दर्ज किया। अगले दिन समिति और पीड़ित पक्ष द्वारा पुलिस की कार्रवाई के प्रति नाराजगी जताने के बाद 164 के तहत मजिस्ट्रेट के सक्षम पीड़ित लड़की के ब्यान दर्ज हुए। लड़की ने जबरन समलैंगिक विवाह और यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए।
दो दिसंबर को बाल कल्याण समिति और एनजीओ शिखर चेतना संगठन का प्रतिनिधिमंडल एडीजीपी (क्राइम अगेंस्ट चिल्ड्रेन) डा. आरसी मिश्रा से मिला। एडीजीपी के निर्देश पर एसपी भिवानी ने एसईटी गठित की। चार दिसंबर को लड़की और अगले दिन साध्वियों से पुलिस ने पूछताछ की। लेकिन, लड़की के ब्यान के आधार पर पुलिस ने अब तक कोई कार्रवाई नहीं की है।
पोस्को के तहत दर्ज हो मामला
बाल कल्याण समिति की बेंच एक दिसंबर को आर्डर पास कर चुकी है कि पुलिस आरोपी साध्वी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 377, 354 और पोस्को के तहत मामला दर्ज करे। जांच से जुड़े शिखर चेतना संगठन के अध्यक्ष सुशील वर्मा ने कहा कि सात दिन पहले 164 के तहत ब्यान और समिति के आर्डर के बावजूद पुलिस ने साध्वी के खिलाफ मामला दर्ज नहीं किया है।
कोट्स
‘‘पीड़ित और दोनों साध्वियों के एसआईटी के समक्ष बयान हो चुके है। शनिवार को मामले में बैठक होनी थी, मगर डीएसपी की ड्यूटी किसी अन्य कार्यक्रम में लगने के कारण बैठक नहीं हो सकी। अब सोमवार को बैठक होगी। जिसमें एसआईटी दोनों पक्षों के बयान के आधार पर कोई फैसला लेगी।’’ - राजबाला श्योराण, चेयरपर्सन, चाइल्ड वेलफेयर कमेटी
‘‘दोनों पक्षों के बयान लिए जा चुके हैं। मामले की जांच एसआईटी कर रही है। सभी सदस्यों की मौजूदगी में आगे की जांच कर कोई फैसला लिया जाएगा।’’ - अमित भाटिया, डीएसपी
आश्रम की साध्वी ने यौन उत्पीड़न किया
आश्रम में साध्वियां सवा साल से युवती का यौन शोषण कर रही थीं। कहानी सुन जांच टीम सकते में आ गई। घटना हरियाणा के चरखी दादरी की है।
स्पेशल इनवेस्टिगेशन टीम के समक्ष साढ़े 17 वर्षीय पीड़ित लड़की ने साध्वियों के खिलाफ आरोपों की ऐसी झड़ी लगाई कि जांच से जुड़े लोग भी सकते में आ गए। तारीख दर तारीख का ब्योरा देते हुए पीड़िता ने पिछले सवा साल से यौन शोषण की बात कही।
चेतना संगठन अध्यक्ष ने किशोरी के लिखित में दर्ज बयान के हवाले से बताया कि समलैंगिक विवाह से पहले ही आश्रम की एक साध्वी ने यौन उत्पीड़न किया। 12 अगस्त 2013 को किशोरी का पहली बार यौन शोषण किया गया।
किशोरी ने टीम के समक्ष बताया कि पहली बार यौन उत्पीड़न के दो महीने बाद यानी अक्तूबर 2013 को आश्रम की एक साध्वी के साथ किशोरी का समलैंगिक विवाह कर दिया गया। शादी आश्रम में बनी श्रीकृष्ण की प्रतिमा को साक्षी मानकर कराई गई। बाकायदा शादी की माला डलवाई गई। बाद में उक्त साध्वी व किशोरी को पति-पत्नी बनकर रहने को कहा गया।
सहायक साध्वी से समलैंगिक विवाह
युवती ने आरोप लगाया कि शादी के बाद तो उसके साथ पति के रूप में रह रही साध्वी ने कई बार यौन शोषण किया। किशोरी ने आश्रम की प्रमुख साध्वी पर भी यौन शोषण के आरोप लगाए।
चेतना संगठन अध्यक्ष सुशील वर्मा ने किशोरी के दर्ज बयानों के आधार पर बताया कि एक रात तो प्रमुख साध्वी व पति बनी साध्वी ने मिलकर उसके साथ यौन शोषण किया। किशोरी पर पति बनी साध्वी ने यह दबाव बनाया कि प्रमुख साध्वी को खुश रखना भी जरूरी है।
वर्मा ने बताया कि बयानों में यह भी बात उभरकर सामने आई कि प्रमुख साध्वी ने सहायक साध्वी से समलैंगिक विवाह कर रखा था। किशोरी ने जांच अधिकारियों के समक्ष लिखित में बताया कि तीन जनवरी 2014 को रात के समय सर्कस देखकर लौटने पर प्रमुख साध्वी व सहायक एवं पति बनी साध्वी ने उसकेसाथ यौन उत्पीड़न किया।
डीएसपी (हेड क्वार्टर) अमित भाटिया ने बताया कि इसके लिए गठित एसआईटी कमेटी जो फैसला करेगी उसके आधार पर अगली कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उनकी मौजूदगी में किशोरी व साध्वी से पूछताछ की गई है।
आश्रम की ओर से रिचार्ज होता था मोबाइल
किशोरी ने लिखित में बताया है कि किशोरी को साध्वी ने अलग से मोबाइल सिम दे रखा था। उसे इस नंबर से ही बात करने को कहा गया था। आश्रम की ओर से ही इस सिम को रिचार्ज करवाया जाता था।
आश्रम में ही रहने पर दबाव बनाया जाता था। कॉलेज जाने से भी यह कहकर रोका जाता था कि आश्रम की पढ़ाई ही जीवन में काम आएगी। किशोरी की साइकिल को अंदर एक अलग कमरे में रखा जाता था।
साध्वियों ने नकारे आरोप
जांच अधिकारियों की टीम ने प्रमुख व सहायक साध्वी के भी बयान दर्ज किए। बयानों में दोनों ने इन आरोपों को नकार दिया। साध्वी ने जांच अधिकारियों के समक्ष बताया कि आश्रम में केवल धार्मिक आयोजन होते रहे हैं। साध्वी ने जांच टीम के समक्ष यौन शोषण व समलैंगिक विवाह जैसे आरोपी को सिरे से खारिज कर दिया।