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PGI चंडीगढ़ के खाते से निकले लाखों रुपये, तरीका देख पुलिस चकराई
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Mon, 06 Nov 2017 02:08 PM IST
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पैसों के लालच में ठगों ने पीजीआई चंडीगढ़ को भी नहीं छोड़ा और खाते से 48 लाख रुपये निकाल लिए। तरीका इतना शातिर कि पुलिस भी चकरा गई। पैसे इंदौर में निकाले गए, जिससे पीजीआई प्रशासन में हड़कंप मच गया है। मामले की शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। पीजीआई में यह इस तरह का पहला मामला है। इसमें बैंक और पीजीआई के कर्मचारियों की भी मिलीभगत की आशंका जताई जा रही है।
25 अक्तूबर को पीजीआई को सूचना मिली कि उसके अकाउंट से इंदौर स्थित एसबीआई की शाखा से 48 लाख रुपये निकाले गए हैं। पीजीआई ने इस बारे में स्थानीय एसबीआई बैंक से कंफर्म किया तो पता चला कि 23 अक्तूबर को इंदौर की ब्रांच से सनराइज टेलीशॉपिंग के अकाउंट में 48 लाख रुपये ट्रांसफर हो गए हैं। सूचना मिलते ही पीजीआई ने अपनी पैमेंट रुकवाने की कोशिश की। हालांकि तब तक 32 लाख रुपये फर्म की अकाउंट में जा चुके थे।
16 लाख रुपये बैंक ने फ्रीज कर दिए हैं। जांच में पता चला है कि नौवें महीने में पीजीआई का 17 हजार रुपये का चेक एक फर्म के नाम पर जमा हुआ था। उस चेक नंबर को कापी कर डुप्लीकेट चेक बनाया गया और उससे 48 लाख रुपये निकाल लिए गए। जांच में यह भी सामने आया है कि स्थानीय बैंक के कर्मचारियों ने पुराने वाले चेक को पंच नहीं किया था। मतलब उसे साफ्टवेयर में अपडेट नहीं किया गया यदि होता तो चेक क्लीयर ही नहीं होता। पीजीआई की ओर से किसी फर्म को 25 हजार से ऊपर का चेक जारी नहीं होता है।
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इससे ऊपर की रकम एनईएफटी के जरिए ट्रांसफर की जाती है। फिर बैंक ने इस पर चेक क्यों नहीं रखा। दूसरी खास बात यह है कि जिस फर्म के अकाउंट में रुपये ट्रांसफर हुए हैं, उसमें न्यूनतम रकम भी नहीं थी। बैंक न्यूनतम रकम नहीं रखने पर रुपये भी काट रहा था। ऐसे में जब फर्म के अकाउंट में रुपये आए तो इंदौर के बैंक ने चेक क्यों किया। जबकि अब तो दो लाख रुपये से ऊपर की रकम निकालने पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है। पीजीआई को शक है कि इस पूरे मामले में बैंक के कर्मचारी मिले हो सकते हैं। पुलिस भी इस दिशा में जांच कर रही है।
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25 अक्तूबर को पीजीआई को सूचना मिली कि उसके अकाउंट से इंदौर स्थित एसबीआई की शाखा से 48 लाख रुपये निकाले गए हैं। पीजीआई ने इस बारे में स्थानीय एसबीआई बैंक से कंफर्म किया तो पता चला कि 23 अक्तूबर को इंदौर की ब्रांच से सनराइज टेलीशॉपिंग के अकाउंट में 48 लाख रुपये ट्रांसफर हो गए हैं। सूचना मिलते ही पीजीआई ने अपनी पैमेंट रुकवाने की कोशिश की। हालांकि तब तक 32 लाख रुपये फर्म की अकाउंट में जा चुके थे।
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16 लाख रुपये बैंक ने फ्रीज कर दिए हैं। जांच में पता चला है कि नौवें महीने में पीजीआई का 17 हजार रुपये का चेक एक फर्म के नाम पर जमा हुआ था। उस चेक नंबर को कापी कर डुप्लीकेट चेक बनाया गया और उससे 48 लाख रुपये निकाल लिए गए। जांच में यह भी सामने आया है कि स्थानीय बैंक के कर्मचारियों ने पुराने वाले चेक को पंच नहीं किया था। मतलब उसे साफ्टवेयर में अपडेट नहीं किया गया यदि होता तो चेक क्लीयर ही नहीं होता। पीजीआई की ओर से किसी फर्म को 25 हजार से ऊपर का चेक जारी नहीं होता है।
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इससे ऊपर की रकम एनईएफटी के जरिए ट्रांसफर की जाती है। फिर बैंक ने इस पर चेक क्यों नहीं रखा। दूसरी खास बात यह है कि जिस फर्म के अकाउंट में रुपये ट्रांसफर हुए हैं, उसमें न्यूनतम रकम भी नहीं थी। बैंक न्यूनतम रकम नहीं रखने पर रुपये भी काट रहा था। ऐसे में जब फर्म के अकाउंट में रुपये आए तो इंदौर के बैंक ने चेक क्यों किया। जबकि अब तो दो लाख रुपये से ऊपर की रकम निकालने पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है। पीजीआई को शक है कि इस पूरे मामले में बैंक के कर्मचारी मिले हो सकते हैं। पुलिस भी इस दिशा में जांच कर रही है।