बेंच के झगड़े ने छीन ली जान: 10वीं के छात्र को सहपाठियों ने पीटा, मौत से परिवार में मचा कोहराम
इकलौते बेटे की मौत से मां आशा रानी सदमे में है। उनका रो-रोकर बुरा हाल है। उनके होठों पर यही पुकार है कि बेटा पढ़ लिखकर डीसी बनने का सपना देखता था। वह मेहनत से दिन रात पढ़ाई में डूबा रहता था। कहता था कि इस बार 10वीं में टॉप करूंगा।
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स्कूल में बेंच के विवाद में दो नाबालिग छात्रों ने अपने सहपाठी को बुरी तरह पीट दिया, जिससे उसकी मौत हो गई। 18 वर्षीय साहिल 10वीं कक्षा में पढ़ता था। भड़के परिजनों ने कार्रवाई के लिए थाने का घेराव किया तो पुलिस ने हत्या का केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। परिजनों ने चेतावनी दी है कि गिरफ्तारी न होने तक बेटे का अंतिम संस्कार नहीं करेंगे।
जानकारी के मुताबिक, 10वीं में पढ़ने वाला साहिल फिल्लौर निवासी जसविंदर सिंह का इकलौता बेटा था। जसविंदर पेशे से किसान हैं। शनिवार को स्कूल के दो छात्रों से बेंच पर बैठने को लेकर साहिल का झगड़ा हो गया था। काफी कहासुनी हुई लेकिन स्कूल प्रबंधन को कोई जानकारी नहीं थी। स्कूल की छुट्टी के बाद दोपहर 1:00 बजे के करीब साहिल घर लौट रहा था तो दोनों नाबालिग छात्रों ने उसे रास्ते में रोक लिया। इसके बाद उसकी बुरी तरह पिटाई कर दी।
मुंह से खून निकलता देख दोनों छात्र फरार हो गए। एक राहगीर ने साहिल को अस्पताल में भर्ती कराया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। शुरू में परिजनों ने इसे सामान्य मौत समझा लेकिन पोस्टमार्टम के दौरान उसके शरीर पर मिले चोट के निशान देख चौंक पड़े। इसके बाद परिजनों ने नाते रिश्तेदारों के साथ मिलकर थाने का घेराव कर डाला। पुलिस को चेतावनी दी कि जब तक आरोपी पकड़े नहीं जाते तब तक अंतिम संस्कार नहीं करेंगे। हालात की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने दोनों नाबालिग छात्रों के खिलाफ हत्या का केस दर्ज कर लिया। हालांकि उनकी गिरफ्तारी अभी नहीं हो सकी है।
डीएसपी बोले- घटना बेहद गंभीर
डीएसपी फिल्लौर जगदीश अत्री का कहना है कि मामला बेहद गंभीर है। पुलिस कार्रवाई में जुटी है। आजकल मामूली बातों पर बच्चे इस कदर उत्तेजित हो जाते हैं कि हिंसा पर उतर आते हैं। यह बेहद चिंताजनक है। परिजनों को अपने बच्चों के व्यवहार पर बारीक नजर रखनी चाहिए।
मां बेहाल बोलीं- बेटा कहता था पढ़कर डीसी बनूंगा, सपनों को नजर लग गई
इकलौते बेटे की मौत से मां आशा रानी सदमे में है। उनका रो-रोकर बुरा हाल है। उनके होठों पर यही पुकार है कि बेटा पढ़ लिखकर डीसी बनने का सपना देखता था। वह मेहनत से दिन रात पढ़ाई में डूबा रहता था। कहता था कि इस बार 10वीं में टॉप करूंगा। मुझे क्या पता था कि हम छोटे गांव वालों के बड़े सपनों को बुरी नजर लग जाती है जो सब कुछ छीन लेती है। छोटी सी बात पर माफी मांग लेने वाला मेरा बेटा किसी से बेंच पर बैठने के लिए झगड़ा नहीं कर सकता। बात कोई और है। भगवान किसी को ऐसी परिस्थितियां ना दिखाए कि दुख में आंसू पोंछने वाला घर का चिराग ही ना रहे।
फिल्म और वेब सीरीज बच्चों पर डाल रहीं गलत प्रभाव
स्टेट अवॉर्डी सेवानिवृत्त अध्यापक कुलविंदर सिंह गाखल का कहना है कि बच्चों का दिमाग काफी संवेदनशील होता है। फिल्में और सीरियल किलर वेब सीरीज उन पर गलत प्रभाव डाल रही हैं। वह आपस में झगड़ते हैं और आपा खो बैठते हैं। स्कूल में शिक्षकों और घर में परिजनों को उनके व्यवहार पर पैनी नजर रखनी चाहिए। स्कूल में होने वाली पैरेंट्स मीटिंग में इस पर चर्चा करनी चाहिए। आजकल हर बच्चे के पास मोबाइल है। वह इस पर किस तरह का कंटेंट देख रहा है, इसकी निगरानी कोई नहीं रखता। यह अभिभावकों की जिम्मेदारी है कि वह बच्चे की निगरानी करें।