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‘मुझे मम्मी के पास जाना है, वो कहां चली गईं’
Updated Tue, 04 Sep 2018 01:40 AM IST
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‘मुझे मम्मी के पास जाना है, वो कहां चली गईं’
- सड़क हादसे में गंभीर दिल्ली निवासी महिला ने दम तोड़ा
- महिला की दोनों बच्चियों का रो-रोकर बुरा हाल
- परिजनों का आरोप, पुलिस उन्हें ही धमका रही
अमर उजाला ब्यूरो
पंचकूला। ‘मुझे मम्मी के पास जाना है। मेरी मम्मी कहां चली गई हैं। मुझे कोई कुछ बताता क्यों नहीं है। जहां मम्मी गई हैं वहां मुझे ले चलो। मुझे मम्मी के बिना नींद नहीं आती है।’ आंखों में आंसू लिए बार-बार इन्हीं शब्दों को दोहरा रही है नौ वर्षीय श्रेया चौरसिया। लेकिन उसे कोई कुछ बताने को तैयार नहीं है। परिजन भी स्तब्ध से हैं। वहीं, दूसरी ओर उसकी श्रेया की छोटी बहन माही चौरसिया जो करीब चार साल की है, वो गुमसुम सी है। उसकी ये स्थिति परिजनों से देखी नहीं जा रही है, डॉक्टर माही की इस स्थिति को लेकर चिंतित हैं। उनका कहना है कि माही का रोना बहुत जरूरी है। यदि ऐसा नहीं होता है तो उसे डॉक्टरों की निगरानी में रखना पड़ सकता है। बता दें कि श्रेया और माही चौरसिया की मम्मी शिखा चौरसिया 31 अगस्त को सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल हो गईं थीं। उन्हें पहले पंचकूला के सामान्य अस्पताल में भर्ती करवाया गया था, लेकिन स्थिति नाजुक होने के कारण पीजीआई चंडीगढ़ रेफर कर दिया था। जहां एक अगस्त की रात में उन्होंने दम तोड़ दिया था। सेक्टर-12ए निवासी प्रमोद चौरसिया की बेटी शिखा चौरसिया की शादी दिल्ली में हुई थी। वह दिल्ली में आशा वर्कर थीं और यहां से मिलने वाली सैलरी से ही परिवार का खर्च चलाती थीं। वह भाई की कलाई पर रक्षाबंधन बांधने के लिए पंचकूला आई थीं। 31 अगस्त को छोटी बेटी माही और पिता प्रमोद चौरसिया के साथ बाइक पर मनीमाजरा से करवा चौथ के सजावट का सामान लेकर लौट रहीं थी। माही बीच में बैठी हुई थी। जैसे ही वह 8/16 के राउंड अबाउट पर पहुंचीं पीछे से आ रही एक तेजरफ्तार कार (एचआर-20-वाई-3654) ने टक्कर मार दी। हादसे में प्रमोद चौरसिया समेत शिखा और उसकी बेटी माही घायल हो गईं। प्रमोद चौरसिया ने आरोपी कार चालक को लोगों की मदद से चौक पर ही दबोच लिया। इसके बाद वह शिखा और माही को लेकर उसी की कार में सामान्य अस्पताल में ले गए। जहां से बेटी को चंडीगढ़ पीजीआई रेफर कर दिया गया। एक अगस्त की रात में फोन आया कि शिखा चौरसिया का निधन हो गया है।
पुलिस पर परिवार को परेशान करने का आरोप
परिजन नीलम रानी ने बताया कि सेक्टर-5 थाना पुलिस ने भले ही हादसे के संबंधित केस दर्ज कर लिया है, लेकिन वह आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं कर रही है। उन्होंने बताया कि पुलिस आरोपी को गिरफ्तार के बजाय पीजीआई में पंप के सहारे सांस ले रही बेटी की देखभाल करने वालेे परिजन को चौकी में करीब चार घंटे तक बैठा कर रखा।
हादसे से बिखर गया शिखा का परिवार
परिजनों ने बताया कि शिखा चौरसिया का परिवार बिखर सा गया है। क्योंकि घर को चलाने वाली शिखा ही थी। पति दिल्ली में प्राइवेट नौकरी करते हैं। उनकी सैलरी से परिवार का चलना मुश्किल था। दोनों बेटियां दिल्ली में सीबीएसई स्कूल में पढ़ती थीं। शिखा की मौत के बाद अब बच्चियों की जिंदगी पर भी अंधेरा मंडराने लगा है।
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ब्रेक की जगह दबा दिया था एक्सीलेटर
परिजनों ने बताया कि राउंड अबाउट पर कार चालक ने ब्रेक की जगह एक्सीलेटर को दबा दिया। जिससे कार तेज रफ्तार में आकर सीधे मोटर साइकिल में टकरा गई। हादसे में तीनों लोग घायल हो गए। सोमवार को डॉक्टरों ने प्रमोद चौरसिया का भी अल्ट्रा साउंड किया है।
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- सड़क हादसे में गंभीर दिल्ली निवासी महिला ने दम तोड़ा
- महिला की दोनों बच्चियों का रो-रोकर बुरा हाल
- परिजनों का आरोप, पुलिस उन्हें ही धमका रही
अमर उजाला ब्यूरो
पंचकूला। ‘मुझे मम्मी के पास जाना है। मेरी मम्मी कहां चली गई हैं। मुझे कोई कुछ बताता क्यों नहीं है। जहां मम्मी गई हैं वहां मुझे ले चलो। मुझे मम्मी के बिना नींद नहीं आती है।’ आंखों में आंसू लिए बार-बार इन्हीं शब्दों को दोहरा रही है नौ वर्षीय श्रेया चौरसिया। लेकिन उसे कोई कुछ बताने को तैयार नहीं है। परिजन भी स्तब्ध से हैं। वहीं, दूसरी ओर उसकी श्रेया की छोटी बहन माही चौरसिया जो करीब चार साल की है, वो गुमसुम सी है। उसकी ये स्थिति परिजनों से देखी नहीं जा रही है, डॉक्टर माही की इस स्थिति को लेकर चिंतित हैं। उनका कहना है कि माही का रोना बहुत जरूरी है। यदि ऐसा नहीं होता है तो उसे डॉक्टरों की निगरानी में रखना पड़ सकता है। बता दें कि श्रेया और माही चौरसिया की मम्मी शिखा चौरसिया 31 अगस्त को सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल हो गईं थीं। उन्हें पहले पंचकूला के सामान्य अस्पताल में भर्ती करवाया गया था, लेकिन स्थिति नाजुक होने के कारण पीजीआई चंडीगढ़ रेफर कर दिया था। जहां एक अगस्त की रात में उन्होंने दम तोड़ दिया था। सेक्टर-12ए निवासी प्रमोद चौरसिया की बेटी शिखा चौरसिया की शादी दिल्ली में हुई थी। वह दिल्ली में आशा वर्कर थीं और यहां से मिलने वाली सैलरी से ही परिवार का खर्च चलाती थीं। वह भाई की कलाई पर रक्षाबंधन बांधने के लिए पंचकूला आई थीं। 31 अगस्त को छोटी बेटी माही और पिता प्रमोद चौरसिया के साथ बाइक पर मनीमाजरा से करवा चौथ के सजावट का सामान लेकर लौट रहीं थी। माही बीच में बैठी हुई थी। जैसे ही वह 8/16 के राउंड अबाउट पर पहुंचीं पीछे से आ रही एक तेजरफ्तार कार (एचआर-20-वाई-3654) ने टक्कर मार दी। हादसे में प्रमोद चौरसिया समेत शिखा और उसकी बेटी माही घायल हो गईं। प्रमोद चौरसिया ने आरोपी कार चालक को लोगों की मदद से चौक पर ही दबोच लिया। इसके बाद वह शिखा और माही को लेकर उसी की कार में सामान्य अस्पताल में ले गए। जहां से बेटी को चंडीगढ़ पीजीआई रेफर कर दिया गया। एक अगस्त की रात में फोन आया कि शिखा चौरसिया का निधन हो गया है।
पुलिस पर परिवार को परेशान करने का आरोप
परिजन नीलम रानी ने बताया कि सेक्टर-5 थाना पुलिस ने भले ही हादसे के संबंधित केस दर्ज कर लिया है, लेकिन वह आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं कर रही है। उन्होंने बताया कि पुलिस आरोपी को गिरफ्तार के बजाय पीजीआई में पंप के सहारे सांस ले रही बेटी की देखभाल करने वालेे परिजन को चौकी में करीब चार घंटे तक बैठा कर रखा।
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हादसे से बिखर गया शिखा का परिवार
परिजनों ने बताया कि शिखा चौरसिया का परिवार बिखर सा गया है। क्योंकि घर को चलाने वाली शिखा ही थी। पति दिल्ली में प्राइवेट नौकरी करते हैं। उनकी सैलरी से परिवार का चलना मुश्किल था। दोनों बेटियां दिल्ली में सीबीएसई स्कूल में पढ़ती थीं। शिखा की मौत के बाद अब बच्चियों की जिंदगी पर भी अंधेरा मंडराने लगा है।
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ब्रेक की जगह दबा दिया था एक्सीलेटर
परिजनों ने बताया कि राउंड अबाउट पर कार चालक ने ब्रेक की जगह एक्सीलेटर को दबा दिया। जिससे कार तेज रफ्तार में आकर सीधे मोटर साइकिल में टकरा गई। हादसे में तीनों लोग घायल हो गए। सोमवार को डॉक्टरों ने प्रमोद चौरसिया का भी अल्ट्रा साउंड किया है।