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60 करोड़ के भूमि मुआवजा घोटाले में रिकवरी सूट का विरोध ना करने पर बैरागी पर केस दर्ज
Updated Wed, 29 Aug 2018 01:30 AM IST
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बैरागी के साथ भूमि अधिग्रहण कलेक्टर, शहरी संपत्ति विभाग के एडीए के खिलाफ एफआईआर एवं निलंबन के आदेश
- 60 करोड़ के भूमि मुआवजा घोटाले में रिकवरी सूट का विरोध ना करने पर बैरागी केस दर्ज
- जिला बार एसोसिएशन ने जताया केस दर्ज करने का विरोध
अमर उजाला ब्यूरो
पंचकूला। 60 करोड़ के शामलात भूमि के मुआवजे घोटाले में रिकवरी सूट का विरोध ना करने पर सेक्टर-5 थाना पुलिस ने हरियाणा के अतिरिक्त मुख्य सचिव (एसीएस) न्याय विभाग एसएस प्रसाद के आदेश पर सरकारी वकील एसके बैरागी के खिलाफ धोखाधड़ी, आपराधिक षड्यंत्र, सरकारी कर्मचारी की ओर से तथ्य को छिपाने के मामले में केस दर्ज किया है। पंचकूला के वकीलों ने हरियाणा के अतिरिक्त मुख्य सचिव (एसीएस) न्याय विभाग एसएस प्रसाद के इस कदम की कड़ी निंदा की है।
सचिव डीबीए दिव्य प्रताप सिसोदिया ने कहा कि जिला बार एसोसिएशन (डीबीए) पंचकूला की कार्यकारी बॉडी द्वारा डिप्टी जिला अटॉर्नी एसके बैरागी के खिलाफ दर्ज एफआईआर रद्द करने के लिए सक्षम प्राधिकरणों को एक ज्ञापन देगा। प्रसाद ने बैरागी के साथ भूमि अधिग्रहण कलेक्टर, शहरी संपत्ति विभाग के एडीए मोहिंदर पाल के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने एवं निलंबन के आदेश भी जारी किए हैं। आरोप है कि बैरागी ने रिकवरी सूट के आदेश का विरोध नहीं किया था, लेकिन पंचकूला के वकीलों ने उनका बचाव किया और कहा कि रिकॉर्ड करने के लिए रिकॉर्ड पर कुछ भी नहीं था। जब आपने निलंबन का आदेश दिया है और आरोप पत्र जारी किया है तो एफआईआर की क्या आवश्यकता थी। वकीलों में से एक ने कहा जैसा कि बैरागी ने उच्च न्यायालय में बढ़े वेतनमान के लिए मामला दर्ज किया था, उसके चलते उन्हें निशाना बनाया गया है। चंडीगढ़ प्रशासन के पब्लिक प्रोस्टिक्यूटर वेलफेयर एसोसिएशन ने एसीएस एसएस प्रसाद की कार्रवाई की भी निंदा की।
क्या है मामला
हुडा पंचकूला के तत्कालीन प्रशासक संजीव वर्मा ने इस मुआवजा घोटाले का पर्दाफाश किया था। वर्मा की जांच रिपोर्ट के आधार पर भूमि अधिग्रहण अधिकारी एमएस सागवान, नायब तहसीलदार धूप सिंह एवं सेक्शन ऑफिसर कमल नयन को निलंबित किया गया था। पटवारी जैनाराम जो कि ठेके पर था, उसका ठेका समाप्त कर दिया गया था। हुडा द्वारा 1998 में 275 एकड़ भूमि चौकी, बीड़ घग्गर एवं नाडा साहिब में नोटिफाइड अंडर सेक्शन-4 भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 1894 के तहत सेक्टर-32 पंचकूला के लिए अधिसूचित की थी। इसका अवार्ड 30 जुलाई 2003 को 224.3 एकड़ भूमि शामलात सहित कर दिया गया। विवाद तब सामने आया जब 541 बीघा और 17 बिस्वा जमीन को कहीं और निकाल दिया गया। इसके बाद जनवरी 2014 में मामला कोर्ट में पहुंचा। जांच रिपोर्ट में पता चला कि सांगवान ने जो मुआवजा दिया, वह 541 बीघा और 17 बिस्वा के बजाय पूरी शामलात जमीन का भी दे दिया गया। रिपोर्ट के मुताबिक इन अधिकारियों ने तथ्यों को छुपाते हुए 60 करोड़ रुपये अधिक मुआवजे का भुगतान कर दिया था। भूमि अधिग्रहण अधिकारी ने धोखाधड़ी करके सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाया है। इसलिए उन पर सख्त कार्रवाई हो। संजीव वर्मा ने हुडा प्रशासक रहते हुए कई घोटाले उजागर किए थे। इस मामले में हरियाणा सतर्कता ने कमल नैन और जैनाराम को गिरफ्तार कर लिया था।
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- 60 करोड़ के भूमि मुआवजा घोटाले में रिकवरी सूट का विरोध ना करने पर बैरागी केस दर्ज
- जिला बार एसोसिएशन ने जताया केस दर्ज करने का विरोध
अमर उजाला ब्यूरो
पंचकूला। 60 करोड़ के शामलात भूमि के मुआवजे घोटाले में रिकवरी सूट का विरोध ना करने पर सेक्टर-5 थाना पुलिस ने हरियाणा के अतिरिक्त मुख्य सचिव (एसीएस) न्याय विभाग एसएस प्रसाद के आदेश पर सरकारी वकील एसके बैरागी के खिलाफ धोखाधड़ी, आपराधिक षड्यंत्र, सरकारी कर्मचारी की ओर से तथ्य को छिपाने के मामले में केस दर्ज किया है। पंचकूला के वकीलों ने हरियाणा के अतिरिक्त मुख्य सचिव (एसीएस) न्याय विभाग एसएस प्रसाद के इस कदम की कड़ी निंदा की है।
सचिव डीबीए दिव्य प्रताप सिसोदिया ने कहा कि जिला बार एसोसिएशन (डीबीए) पंचकूला की कार्यकारी बॉडी द्वारा डिप्टी जिला अटॉर्नी एसके बैरागी के खिलाफ दर्ज एफआईआर रद्द करने के लिए सक्षम प्राधिकरणों को एक ज्ञापन देगा। प्रसाद ने बैरागी के साथ भूमि अधिग्रहण कलेक्टर, शहरी संपत्ति विभाग के एडीए मोहिंदर पाल के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने एवं निलंबन के आदेश भी जारी किए हैं। आरोप है कि बैरागी ने रिकवरी सूट के आदेश का विरोध नहीं किया था, लेकिन पंचकूला के वकीलों ने उनका बचाव किया और कहा कि रिकॉर्ड करने के लिए रिकॉर्ड पर कुछ भी नहीं था। जब आपने निलंबन का आदेश दिया है और आरोप पत्र जारी किया है तो एफआईआर की क्या आवश्यकता थी। वकीलों में से एक ने कहा जैसा कि बैरागी ने उच्च न्यायालय में बढ़े वेतनमान के लिए मामला दर्ज किया था, उसके चलते उन्हें निशाना बनाया गया है। चंडीगढ़ प्रशासन के पब्लिक प्रोस्टिक्यूटर वेलफेयर एसोसिएशन ने एसीएस एसएस प्रसाद की कार्रवाई की भी निंदा की।
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क्या है मामला
हुडा पंचकूला के तत्कालीन प्रशासक संजीव वर्मा ने इस मुआवजा घोटाले का पर्दाफाश किया था। वर्मा की जांच रिपोर्ट के आधार पर भूमि अधिग्रहण अधिकारी एमएस सागवान, नायब तहसीलदार धूप सिंह एवं सेक्शन ऑफिसर कमल नयन को निलंबित किया गया था। पटवारी जैनाराम जो कि ठेके पर था, उसका ठेका समाप्त कर दिया गया था। हुडा द्वारा 1998 में 275 एकड़ भूमि चौकी, बीड़ घग्गर एवं नाडा साहिब में नोटिफाइड अंडर सेक्शन-4 भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 1894 के तहत सेक्टर-32 पंचकूला के लिए अधिसूचित की थी। इसका अवार्ड 30 जुलाई 2003 को 224.3 एकड़ भूमि शामलात सहित कर दिया गया। विवाद तब सामने आया जब 541 बीघा और 17 बिस्वा जमीन को कहीं और निकाल दिया गया। इसके बाद जनवरी 2014 में मामला कोर्ट में पहुंचा। जांच रिपोर्ट में पता चला कि सांगवान ने जो मुआवजा दिया, वह 541 बीघा और 17 बिस्वा के बजाय पूरी शामलात जमीन का भी दे दिया गया। रिपोर्ट के मुताबिक इन अधिकारियों ने तथ्यों को छुपाते हुए 60 करोड़ रुपये अधिक मुआवजे का भुगतान कर दिया था। भूमि अधिग्रहण अधिकारी ने धोखाधड़ी करके सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाया है। इसलिए उन पर सख्त कार्रवाई हो। संजीव वर्मा ने हुडा प्रशासक रहते हुए कई घोटाले उजागर किए थे। इस मामले में हरियाणा सतर्कता ने कमल नैन और जैनाराम को गिरफ्तार कर लिया था।
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