35 साल...100 करोड़ की प्रॉपर्टी...7 मर्डर...वारिस कौन?
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हरियाणा के हांसी में करोड़ों की प्रॉपर्टी हड़पने के मामले में हुई मां-बेटे की हत्या के आरोप में हिसार पुलिस ने चंडीगढ़ की महिला इंस्पेक्टर सत्यबाला, उसकी बहन सब इंस्पेक्टर राजबाला और उसके कांस्टेबल भाई दलजीत सिंह को गिरफ्तार किया है।
पुलिस ने तीनों को कोर्ट में पेश किया। कोर्ट ने तीनों को जेल भेज दिया है। जबकि वारदात में शामिल मुख्य आरोपी इनका एक अन्य भाई जगजीत सिंह अभी फरार है। आरोपी सत्यबाला जेवलिन थ्रो की नेशनल खिलाड़ी रह चुकी है। पुलिस के अनुसार हांसी के घिराय गांव निवासी गुड्डी और उसके बेटे संदीप की हत्या हुई थी।
उनकी हत्या महिला इंस्पेक्टर के भाई जगजीत सिंह ने अपने साथियों के साथ मिलकर की है। पुलिस के अनुसार महिला इंस्पेक्टर सत्यबाला, एसआई राजबाला पुलिस लाइन और कांस्टेबल दलजीत सिंह आईआरबी में तैनात हैं।
हिसार पुलिस के अनुसार हिसार और हांसी बॉर्डर पर जीप में दो जली लाशें मिली हैं। पुलिस का कहना है कि हत्या के बाद जगजीत ने जीप के साथ शव को जला दिया है। हांसी पुलिस ने मामले में हत्या की धारा भी जोड़ दी है।
तीनों ने रची साजिश, चौथे ने की हत्या
डीएसपी भगवान दास ने बताया कि घिराय गांव में करोड़ों की प्रॉपर्टी को हड़पने के लिए गुड्डी और उसके बेटे संदीप की हत्या की साजिश चंडीगढ़ पुलिस की महिला इंस्पेक्टर सत्यबाला ने अपनी बहन सब इंस्पेक्टर राजबाला और भाई कांस्टेबल दलजीत सिंह के साथ मिलकर रची थी।
तीनों ने हत्या की वारदात को अंजाम देने के लिए अपने भाई जगजीत को तैयार किया था। तीनों आरोपियों ने जगजीत को आश्वास दिया था कि अगर हत्या के बाद वह पकड़ा जाता है तो वे उसे केस से बचा लेंगे।
मामला संज्ञान में आया है। जैसे ही तीनों की गिरफ्तारी की कॉपी चंडीगढ़ पुलिस के पास आ जाएगी। उन्हें सस्पेंड कर दिया जाएगा।
-डॉ., सुखचैन सिंह गिल, एसएसपी, चंडीगढ़
35 साल का विवाद और 7 हत्याएं
रिश्तों में चल रही खून की जंग से घिराय एक बार फिर दहल गया है। रणधीर सिंह पहलवान की 100 करोड़ रुपये की प्रॉपर्टी में 339 दिन बाद ठीक उसी अंदाज में संदीप और उसकी मां गुड्डी की हत्या कर दी गई। जैसे की पिछले साल 7 जून को हिसार के टिब्बा दानाशेर क्षेत्र में मंजीत की हत्या हुई थी।
आरोप सौतेले भाई संदीप पर था। प्रॉपर्टी के इस विवाद में अब तक पहलवान की दो पत्नियों का कत्ल हो चुका है। अब तक इस विवाद में सात जानें जा चुकी हैं।
पहलवान ने तीन विवाह किए थे और प्रॉपर्टी को लेकर तीनों ही पत्नियों के परिवार वर्षों से ही एक-दूसरे के खून के प्यासे रहे हैं। वर्ष 1980 में शुरू हुए परिवार के गैंगवार में एक-दूसरे की हत्या आम बात हो चुकी है। परिजनों को फांसी तक की सजा पा चुके हैं।
यूं हुआ खुलासा, वाट्स एप से हुई पहचान
एएसपी जशनदीप सिंह रंधावा ने बताया कि संदीप तथा उसकी मां की हत्या करने के बाद आरोपी उनके शव को फोर्ड आईकॉन कार में डालकर अपने साथ ले गए थे। खोखा के नजदीक उन्होंने कार बदल ली तथा शव को खुर्द-बुर्द करना चाहते थे, लेकिन ऐसा कर नहीं सके।
हनुमानगढ़ टाउन के नजदीक इंदिरा गांधी नगर के पास एक नहर में उन्होंने शव डालने की कोशिश की, मगर नहर में पानी कम होने के चलते दोनों शव अधजली हालत में झाड़ियों में अटक गए। वहां के स्थानीय व्यक्ति ने शव देखकर पुलिस को सूचना दी।
बाद में राजस्थान पुलिस ने हांसी पुलिस के पास वाट्स एप से मृतकों की फोटो भेजी। हांसी पुलिस पहले से ही अपहृत दोनों को ढूंढने में लगी हुई थी। दोनों की पहचान होने के बाद मामले का खुलासा हो गया।
ये हुआ था सात जून को
पिछले साल सात जून को प्रॉपर्टी के विवाद में पहलवान के परिवार की जान गई थी। मंजीत रणधीर सिंह पहलवान की दूसरी पत्नी रामप्यारी का बेटा था।
मंजीत को टिब्बादानाशेर के एक मकान में गोली मारी गई थी और हमलावर उसके शव को गाड़ी में डालकर ले गए थे। शव राजस्थान बॉर्डर पर नहर किनारे अधजली हालत में मिला था।
हत्या का आरोप संदीप उर्फ बोरी पर लगा था। अब संदीप और उसकी मां की हत्या भी ठीक इसी अंदाज में की गई है। बदमाशों ने घिराय में दोनों को गोलियों से छलनी किया और उन्हें गाड़ी में डालकर ले गए।
दोनों के शव राजस्थान में ठीक उसी अंदाज में अधजली हालात में मिले, जैसे ही 339 दिन पहले मंजीत का शव मिला था।