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रिहाई की सिफारिश के बावजूद गरीब व्यक्ति चार साल से जेल में, पंजाब सरकार की दयनीय स्थिति: हाईकोर्ट

Sat, 20 May 2023 06:46 PM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Sat, 20 May 2023 06:46 PM IST
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Court surprise over not taking decision on premature release
निर्णय में देरी के चलते 10 लाख रुपये जुर्माना लगाने पर हाईकोर्ट ने अधिकारियों से मांगा जवाब
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मामूली आपत्तियों के चलते रिहाई से जुड़ी फाइल काट रही एक से दूसरे दफ्तर के चक्कर

कोड ऑफ कंडक्ट की दलील देकर समय पूर्व रिहाई पर फैसला न लेने पर कोर्ट ने जताई हैरानी

अमर उजाला ब्यूरो

चंडीगढ़। जेल में सजा काट रहे कैदी की समय पूर्व रिहाई की 4 साल पहले रिहाई की सिफारिश के बावजूद इसपर फैसला न लेने पर हाईकोर्ट ने इसे पंजाब सरकार की दयनीय स्थिति बताया। कोर्ट ने कहा कि मामूली आपत्तियों के चलते यह फाइल एक दफ्तर से दूसरे दफ्तर तक गई, लेकिन इस पर फैसला नहीं लिया गया। ऐसे में अब इस देरी के चलते याचिकाकर्ता के पिछले चार साल से जेल में होने पर कड़ा रुख अपनाते हुए हाईकोर्ट ने 10 लाख रुपये जुर्माना लगाने को लेकर अधिकारियों को जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है।

याचिका दाखिल करते हुए कपूरथला निवासी याचिकाकर्ता ने बताया कि उसकी समय पूर्व रिहाई को लेकर जेल अधीक्षक व अन्य सक्षम अधिकारियों ने 2019 में सिफारिश की थी। इसके बाद याचिकाकर्ता की रिहाई को लेकर लंबे समय तक कोई फैसला नहीं लिया गया। ऐसा करने को हाईकोर्ट के पूर्व में जारी आदेशों का उल्लंघन बताते हुए अवमानना याचिका दाखिल की गई। अवमानना याचिका पर सरकार ने जल्द फैसला लेने की बात कही लेकिन ऐसा नहीं किया गया। ऐसे में याची को दोबारा अवमानना याचिका दाखिल करनी पड़ी। पंजाब सरकार ने बताया कि फाइल गवर्नर के पास थी और 35 मामलों को वापस भेजते हुए हर मामले पर कैबिनेट की अलग-अलग मंजूरी के बाद इन्हें भेजने को कहा गया। इसके बाद आचार संहिता लग गई और याची के केस पर विचार नहीं हो सका।
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पंजाब सरकार की सभी दलीलों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि यह वास्तव में पंजाब सरकार की दयनीय स्थिति है। याचिकाकर्ता, जो एक गरीब व्यक्ति है उसकी 2019 में समय से पहले रिहाई की सिफारिश के बावजूद उसकी केस की फाइल मामूली आपत्तियों के चलते एक कार्यालय से दूसरे कार्यालय में जाती रही। कोर्ट में अवमानना याचिका दाखिल होने के बाद फाइल कुछ आगे बढ़ी और वह भी करीब डेढ़ साल बाद। अब भी मामला राज्यपाल के पास विचाराधीन है और इस देरी के लिए कोई स्पष्टीकरण नहीं है। कोर्ट ने मामले में 10 लाख जुर्माना लगाने का निर्णय लिया है और याची की हिरासत के मामले में देरी पर अधिकारियों को जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है।
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