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शामलात जमीन की सौदेबाजी पर मोहाली प्रशासन तलब
सुरजीत सिंह सत्ती/अमर उजाला, नई दिल्ली/चंडीगढ़
Updated Sun, 24 Jan 2016 10:34 AM IST
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यूटी से सटे मुल्लांपुर गरीबदास (मोहाली) की पांच सौ एकड़ शामलात की बंजर जमीन की अवैध खरीद-फरोख्त का मामला सामने आया है।
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जमीन बचाने के लिए सरपंच की ओर से प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन सरपंच का आरोप है कि आठ पंच इस मामले में पंचायत के खिलाफ हैं। यहां तक कि एक शिकायत पर उच्चाधिकारी ने सरपंच को बगैर सुने निलंबित कर दिया और जमीन से जुड़े केसों में पंचायत की ओर से पैरवी के लिए प्रबंधक को रिकार्ड सौंपने का आदेश भी दे दिया।
सरपंच के निलंबन पर रोक:
सरपंच जगदीश राय जंड ने पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर कर उसके निलंबन के आदेश को चुनौती दी। साथ ही जमीन की कथित अवैध सौदेबाजी की जांच सीबीआई जैसी स्वतंत्र एजेंसी से कराने की मांग की है। जस्टिस सूर्यकांत और पीबी बजंतरी ने सरपंच के निलंबन के आदेश पर रोक लगा दी है।
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उसे जमीन की पैरवी के लिए बतौर सरपंच अधिकृत कर दिया है। साथ ही मोहाली जिला प्रशासन से जवाब तलब करते हुए पूछा है कि आखिर कथित अवैध खरीद फरोख्त की स्वतंत्र जांच क्यों नहीं करवा लेते।
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रसूखदारों को शह का आरोप
याचिका में आरोप है कि बड़े नेताओं और अफसरों की शह पर ही चार व्यक्तियों ने यह जमीन खरीदी है, जो कि कभी बिक ही नहीं सकती। इसी कारण प्रशासनिक अमला सरपंच का सहयोग नहीं कर रहा है। उल्लेखनीय है कि मुल्लांपुर गरीबदास क्षेत्र को पंजाब सरकार न्यू चंडीगढ़ के तौर पर विकसित कर रही है। इस क्षेत्र की जमीन का कलेक्टर रेट दो करोड़ रुपये प्रति एकड़ से भी अधिक है।
यह है मामला
याचिका में आरोप लगाया है कि तीर्थ सिंह, केवल सिंह, मोहिंदर सिंह और बलविंदर सिंह ने करीब पांच सौ एकड़ बंजर शामलात गांव के लोगों से जीपीए के माध्यम से खरीद ली। चारों ने करीब साढ़े तीन सौ मामले कलेक्टर के पास दायर कर जमीन उनके नाम स्थानांतरित करने की मांग की। यह मामले विचाराधीन हैं। आरोप है कि बंजर शामलात तकसीम नहीं होती। जबकि जमीन का तकसीम होना जरूरी है।
साल 1950 से जमीन पर किसी का कब्जा होना जरूरी है। उधर, आरोप है कि इन मामलों में पंचायत की ओर से ठोस पैरवी करने में आठ पंच पंचायत का सहयोग नहीं दे रहे हैं। जमीन स्थानांतरण के जो केस कलेक्टर के पास विचाराधीन हैं, उनमें यह आठ पंच भी शामिल हैं। याचिका में आरोप लगाया गया है कि यह आठ पंच पंचायत की शामलात जमीन बचाने के लिए प्रस्ताव पारित नहीं होने दे रहे हैं।