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अनुबंध बढ़ाने पर बोले पार्षद, चार माह नहीं दो माह के लिए दे दें कर्मचारी
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चंडीगढ़। नगर निगम में 175 कर्मचारियों का अनुबंध बढ़ाने के साथ ही 22 नए कर्मचारियों को रखने के लिए एजेंडा लाया गया। इस पर सवाल उठाते हुए पार्षदों ने कहा कि हमें न डाटा एंट्री ऑपरेटर दिया गया और न ही चपरासी। हमारे नाम पर अधिकारी कर्मचारियों से काम ले रहे हैं। इस आयुक्त ने कहा कि यह सभी पुराने कर्मचारी हैं, जिनके अनुबंध की समय सीमा तय न होने के कारण वेतन रुका है। आयुक्त ने कहा कि चुनाव के दौरान सरकारी कर्मचारी नहीं दिए जा सकते। इस पर पार्षदों ने कहा कि एजेंडा पास करके हमें दो माह के लिए कर्मचारी दे दिए जाएं।
सदन में पुरानी कंपनी का अनुबंध खत्म होने के बाद पुराने कर्मचारियों का अनुबंध बढ़ाने और 22 नए कर्मचारी रखने का एजेंडा आया। इस दौरान पार्षदों ने सवाल उठाया कि सदन से पास एजेंडा दोबारा क्यों आया है। वहीं, इनमें शामिल कर्मचारी जो पार्षदों को मिलने थे, वह कहां हैं? कोविड काल में भर्ती आईटी के कर्मचारी सिर्फ एक बार ऑनलाइन बैठक के बारे में बताने आए। उसके बाद कोई नहीं आया। अतिरिक्त आयुक्त तिलकराज ने बताया कि कर्मचारियों को समायोजित किया गया है। ऑडिट ऑब्जेक्शन के बाद इनकी जानकारी सदन को दी गई है। प्रशासन की तरफ से निगम को कहा गया है कि छह माह से ज्यादा कर्मचारियों को नहीं रखा जा सकता है, इसलिए पार्षदों को कर्मचारी देने वाली फाइल वहीं अटकी है। इस पर भाजपा पार्षद अरुण सूद ने आयुक्त से कहा कि वह विशेष शक्ति का उपयोग कर दो माह के लिए कर्मचारी दे दें।
पेट्रोल व वेतन भत्ता बढ़ाने का खारिज हो चुका है प्रस्ताव
इससे पहले सदन से सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर को गाड़ी देने के साथ ही पेट्रोल भत्ता देने के लिए प्रशासन को प्रस्ताव भेजा गया था, लेकिन प्रशासन ने उसे खारिज कर दिया। वहीं पार्षदों का वेतन भत्ता बढ़ाने का प्रस्ताव भी खारिज हो चुका है।
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सदन में पुरानी कंपनी का अनुबंध खत्म होने के बाद पुराने कर्मचारियों का अनुबंध बढ़ाने और 22 नए कर्मचारी रखने का एजेंडा आया। इस दौरान पार्षदों ने सवाल उठाया कि सदन से पास एजेंडा दोबारा क्यों आया है। वहीं, इनमें शामिल कर्मचारी जो पार्षदों को मिलने थे, वह कहां हैं? कोविड काल में भर्ती आईटी के कर्मचारी सिर्फ एक बार ऑनलाइन बैठक के बारे में बताने आए। उसके बाद कोई नहीं आया। अतिरिक्त आयुक्त तिलकराज ने बताया कि कर्मचारियों को समायोजित किया गया है। ऑडिट ऑब्जेक्शन के बाद इनकी जानकारी सदन को दी गई है। प्रशासन की तरफ से निगम को कहा गया है कि छह माह से ज्यादा कर्मचारियों को नहीं रखा जा सकता है, इसलिए पार्षदों को कर्मचारी देने वाली फाइल वहीं अटकी है। इस पर भाजपा पार्षद अरुण सूद ने आयुक्त से कहा कि वह विशेष शक्ति का उपयोग कर दो माह के लिए कर्मचारी दे दें।
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पेट्रोल व वेतन भत्ता बढ़ाने का खारिज हो चुका है प्रस्ताव
इससे पहले सदन से सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर को गाड़ी देने के साथ ही पेट्रोल भत्ता देने के लिए प्रशासन को प्रस्ताव भेजा गया था, लेकिन प्रशासन ने उसे खारिज कर दिया। वहीं पार्षदों का वेतन भत्ता बढ़ाने का प्रस्ताव भी खारिज हो चुका है।
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