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चंडीगढ़ः जेपी प्लांट के स्टे ऑर्डर के खिलाफ नगर निगम को 6 दिन में देना होगा कोर्ट में जवाब

Thu, 25 Jun 2020 12:22 PM IST
पंचकुला ब्‍यूरो अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: पंचकुला ब्‍यूरो Updated Thu, 25 Jun 2020 12:22 PM IST
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Chandigarh Corporation Jaypee Garbage Plant Case Hearing in Court
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
चंडीगढ़ जिला अदालत में बुधवार को जेपी गारबेज प्रोसेसिंग प्लांट पर स्टे के मामले में सुनवाई हुई। जिला अदालत ने नगर निगम को जवाब दाखिल करने के लिए 30 जून तक का समय दिया है।
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नगर निगम ने बीते सोमवार को जेपी गारबेज प्रोसेसिंग प्लांट के स्टे ऑर्डर के खिलाफ पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में भी याचिका दायर की है। जेपी प्लांट के अधिकारियों ने कहा कि सुनवाई के बाद जो आदेश होगा, उसके बाद अगली योजना तैयार करेंगे।
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नगर निगम ने सेक्टर-25 स्थित जेपी गारबेज प्रोसेसिंग प्लांट का बीते शुक्रवार को कंपनी से पजेशन लिया था। निगम ने प्लांट में अपने कर्मचारी लगाकर कचरा प्रोसेसिंग का काम भी शुरू करा दिया था। दूसरी ओर, कंपनी के अधिकारी जिला अदालत से स्टे ऑर्डर ले आए। इसमें कंपनी को एक माह का समय देने का आदेश दिया गया था।
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हालांकि, शुक्रवार को कंपनी के अधिकारी स्टे होने की बात कहते रहे, लेकिन निगम के अधिकारियों ने कहा कि लिखित आदेश न आने तक हम किसी भी बात पर विश्वास नहीं करेंगे। कंपनी के अधिकारी निगम पर अदालत की अवमानना का भी आरोप लगा रहे हैं।

नगर निगम ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि कंपनी अनुबंध के अनुरूप काम नहीं कर रही थी, इसलिए एनजीटी के निर्देशानुसार प्लांट को कब्जे में लिया गया। कब्जा लेने के बाद कंपनी को स्टे देना ठीक नहीं है। क्योंकि भविष्य में लगने वाला जुर्माना निगम को भरना है न कि कंपनी को। निगम ने अपनी याचिका में बताया कि एनजीटी ने निर्देश दिया था कि जेपी प्लांट कचरे का निस्तारण कर सकता है तो ठीक है अन्यथा निगम इस मामले में निर्णय ले।


कचरा प्रोसेस नहीं हुआ तो निगम को ही जुर्माना भरना पड़ेगा। उसके बाद फरवरी माह की सदन की बैठक में तय हुआ था कि जेपी प्लांट को निगम टेकओवर करेगा। प्लांट के अधिकारियों को सात दिन में जगह खाली करने का नोटिस दिया गया था, लेकिन प्लांट के अधिकारी सदन के फैसले के खिलाफ जिला अदालत चले गए।
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