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चंडीगढ़ः कर्फ्यू में देनी न पड़े सैलरी, फैक्टरी मालिक अपना रहे तरह-तरह के हथकंडे, कर्मी बोले...
Mon, 20 Apr 2020 02:11 PM IST
खुशबू गोयल
रिशु राज सिंह, चंडीगढ़
रिशु राज सिंह, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Mon, 20 Apr 2020 02:11 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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कोरोना संकट के बाद देशव्यापी लॉकडाउन के बीच अर्थव्यवस्था और कर्मचारियों पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। संगठित क्षेत्र में भारी छंटनी के आसार हैं, वहीं शहर के विभिन्न वर्ग के कर्मचारी मार्च महीने की तनख्वाह नहीं मिलने से परेशान हैं। लॉकडाउन की वजह से बिजनेस के ठप पड़ने के चलते कई कंपनियों व फैक्टरी मालिक अपने कर्मचारियों की सैलरी में कटौती कर रहे हैं तो कई ऐसे हथकंडे अपना रहे हैं ताकि उन्हें सैलरी न देनी पड़े।
रविवार को अमर उजाला में कर्मचारियों को नौकरी से निकालने और सैलरी काटने संबंधी खबर के प्रकाशित होने के बाद कई अन्य कर्मचारियों ने संपर्क कर बताया कि उनकी भी सैलरी कंपनियों ने रोक ली है। कई कर्मचारियों ने बताया कि उन्हें पैसे न देने की बजाय फैक्टरी मालिक आटा-दाल आदि देने की बात कह रहे हैं। ज्यादातर कर्मचारी अपना नाम नहीं उजागर होने देना चाहते। हालांकि उनका कहना है कि अगर उन्हें पैसे की बजाय राशन दे देंगे तो वह मकान का किराया आदि कैसे भरेंगे।
इसके अलावा कई कंपनियों ने मार्च के महीने के सिर्फ 22 दिन की सैलरी दी है। शहर में सबसे ज्यादा समस्या ठेके पर काम करने वाले कर्मचारियों को हो रही है। कई ठेकेदार भाग गए हैं। अब उन्हें समझ नहीं आ रहा है कि उन्हें पैसे कौन देगा। कंपनियां मुकर चुकी हैं। विकासनगर में रहने वाले हरिंदर पत्थर चिनाई का काम करते हैं। उन्होंने करीब एक महीने एक ठेकेदार के साथ हिमाचल प्रदेश में काम किया। लॉकडाउन से पहले ही उन्होंने काम खत्म कर लिया और चंडीगढ़ पहुंच गए लेकिन अब उनके ठेकेदार ने पैसे देने से मना कर दिया है।
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हरिंदर ने बताया कि वह बहुत मुश्किल हालात में गुजारा कर रहे हैं। इसके अलावा शहर में सैकड़ों कंस्ट्रक्शन वर्कर भी हैं, जिनको दिहाड़ी नहीं मिली है, न ही उनके खाते में प्रशासन की तरफ से तीन हजार रुपये आए हैं।
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रविवार को अमर उजाला में कर्मचारियों को नौकरी से निकालने और सैलरी काटने संबंधी खबर के प्रकाशित होने के बाद कई अन्य कर्मचारियों ने संपर्क कर बताया कि उनकी भी सैलरी कंपनियों ने रोक ली है। कई कर्मचारियों ने बताया कि उन्हें पैसे न देने की बजाय फैक्टरी मालिक आटा-दाल आदि देने की बात कह रहे हैं। ज्यादातर कर्मचारी अपना नाम नहीं उजागर होने देना चाहते। हालांकि उनका कहना है कि अगर उन्हें पैसे की बजाय राशन दे देंगे तो वह मकान का किराया आदि कैसे भरेंगे।
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इसके अलावा कई कंपनियों ने मार्च के महीने के सिर्फ 22 दिन की सैलरी दी है। शहर में सबसे ज्यादा समस्या ठेके पर काम करने वाले कर्मचारियों को हो रही है। कई ठेकेदार भाग गए हैं। अब उन्हें समझ नहीं आ रहा है कि उन्हें पैसे कौन देगा। कंपनियां मुकर चुकी हैं। विकासनगर में रहने वाले हरिंदर पत्थर चिनाई का काम करते हैं। उन्होंने करीब एक महीने एक ठेकेदार के साथ हिमाचल प्रदेश में काम किया। लॉकडाउन से पहले ही उन्होंने काम खत्म कर लिया और चंडीगढ़ पहुंच गए लेकिन अब उनके ठेकेदार ने पैसे देने से मना कर दिया है।
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हरिंदर ने बताया कि वह बहुत मुश्किल हालात में गुजारा कर रहे हैं। इसके अलावा शहर में सैकड़ों कंस्ट्रक्शन वर्कर भी हैं, जिनको दिहाड़ी नहीं मिली है, न ही उनके खाते में प्रशासन की तरफ से तीन हजार रुपये आए हैं।
40 हजार फंसे हैं, मालिक कह रहा है 2000 रुपये ले लो
मंजीत कुमार (बदला हुआ नाम) चंडीगढ़ के इंडस्ट्रियल एरिया फेज-2 में एक फर्नीचर की कंपनी में ठेकेदारी करते हैं। उनके अधीन 5 कर्मचारी काम करते हैं, जिन्हें तनख्वाह देने जिम्मेदारी उनकी है। वह पिछले दो साल से कंपनी के लिए काम कर रहे हैं लेकिन लॉकडाउन की वजह से वह घर बैठे हैं और कंपनी मालिक के पास 40 हजार रुपये फंस गए हैं।
उनका कहना है कि मालिक बार-बार कह रहा है कि 2000 रुपये ले लो, लेकिन इससे क्या होगा। उनके लिए पांच कर्मचारी काम करते हैं, उन्हें सैलरी कैसे दें। वह हल्लोमाजरा में किराये पर रहते हैं, 3700 रुपये तो किराया है। घर से छह लोग हैं, दोस्तों से पैसे मांगकर घर का खर्चा चलाना पड़ रहा है। उनका कहना है कि लॉकडाउन के खुलने के बाद वह परिवार को लेकर गांव चले जाएंगे। यहां कुछ नहीं रह गया है।
प्रशासन के कर्मचारियों की गलती भुगत रहे सैकड़ों कंस्ट्रक्शन वर्कर
चंडीगढ़ बिल्डिंग एंड अदर कंस्ट्रक्शन यूनियन द्वारा दिए गए लगभग 80 से अधिक फॉर्म प्रशासन की तरफ से बना कर समय से नहीं दिए गए, जो अभी लेबर ऑफिस में ही हैं। जिसका कारण प्रशासन ने लेबर विभाग पर श्रम पेंशन का टारगेट पूरा करने पर जोर दिया और मजदूरों पर ध्यान नहीं दिया।
इस दौरान बीओसीडब्ल्यू के जो फॉर्म जमा हुए थे उन्हें समय पर बना कर नहीं दिया गया। इस कारण उनको 3000 रुपये का लाभ नहीं मिल पाया है। इनके अलावा करीब 30 दिहाड़ी दार मज़दूर ऐसे हैं, जो वेलफेयर बोर्ड में रजिस्टर हैं फिर भी उन्हें 3000 रुपये का लाभ नहीं मिला। यह धनास की कच्ची कालोनी के मजदूर हैं।
उनका कहना है कि मालिक बार-बार कह रहा है कि 2000 रुपये ले लो, लेकिन इससे क्या होगा। उनके लिए पांच कर्मचारी काम करते हैं, उन्हें सैलरी कैसे दें। वह हल्लोमाजरा में किराये पर रहते हैं, 3700 रुपये तो किराया है। घर से छह लोग हैं, दोस्तों से पैसे मांगकर घर का खर्चा चलाना पड़ रहा है। उनका कहना है कि लॉकडाउन के खुलने के बाद वह परिवार को लेकर गांव चले जाएंगे। यहां कुछ नहीं रह गया है।
प्रशासन के कर्मचारियों की गलती भुगत रहे सैकड़ों कंस्ट्रक्शन वर्कर
चंडीगढ़ बिल्डिंग एंड अदर कंस्ट्रक्शन यूनियन द्वारा दिए गए लगभग 80 से अधिक फॉर्म प्रशासन की तरफ से बना कर समय से नहीं दिए गए, जो अभी लेबर ऑफिस में ही हैं। जिसका कारण प्रशासन ने लेबर विभाग पर श्रम पेंशन का टारगेट पूरा करने पर जोर दिया और मजदूरों पर ध्यान नहीं दिया।
इस दौरान बीओसीडब्ल्यू के जो फॉर्म जमा हुए थे उन्हें समय पर बना कर नहीं दिया गया। इस कारण उनको 3000 रुपये का लाभ नहीं मिल पाया है। इनके अलावा करीब 30 दिहाड़ी दार मज़दूर ऐसे हैं, जो वेलफेयर बोर्ड में रजिस्टर हैं फिर भी उन्हें 3000 रुपये का लाभ नहीं मिला। यह धनास की कच्ची कालोनी के मजदूर हैं।
किसी मजदूर को आए समस्या तो करें 112 पर कॉल : डीसी
डीसी मनदीप सिंह बराड़ ने कहा कि प्रशासन की तरफ से रोजाना फैक्टरी कर्मचारियों व मालिकों से बातचीत की जा रही है। ज्यादातर कर्मचारियों को सैलरी मिल चुकी है फिर भी अगर किसी को सैलरी नहीं मिली है या फिर उन्हें नौकरी से निकाल दिया गया है को वह प्रशासन के हेल्पलाइन 112 पर कॉल कर अपनी समस्या बता सकते हैं। 112 नंबर पर इस तरह की समस्याओं को भी सुना जा रहा है। अगर कोई शिकायत करता है तो तुरंत कार्रवाई की जाएगी।
विभाग की लापरवाही से फॉर्म दफ्तर में पड़े
कई मजदूरों के फॉर्म विभाग की लापरवाही की वजह से अभी श्रम दफ्तर में ही बने पड़े हैं। उन वर्करों को भी 3000 का लाभ जल्द से जल्द दिया जाना चाहिए व जिन वर्करों को लाभ नहीं पहुंचा उनका पैसा भी जल्द से जल्द दिया जाना चाहिए।
- ईशा अरोड़ा, सदस्य, लेबर वेलफेयर बोर्ड चंडीगढ़
विभाग की लापरवाही से फॉर्म दफ्तर में पड़े
कई मजदूरों के फॉर्म विभाग की लापरवाही की वजह से अभी श्रम दफ्तर में ही बने पड़े हैं। उन वर्करों को भी 3000 का लाभ जल्द से जल्द दिया जाना चाहिए व जिन वर्करों को लाभ नहीं पहुंचा उनका पैसा भी जल्द से जल्द दिया जाना चाहिए।
- ईशा अरोड़ा, सदस्य, लेबर वेलफेयर बोर्ड चंडीगढ़