{"_id":"5e7dc3028ebc3e76d21688e1","slug":"coronavirus-labourers-and-workers-suffering-from-lack-of-food-in-chandigarh","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"कर्फ्यूः चंडीगढ़ में मजदूरों को रोटी के लाले...बोले- कोरोना से तो शायद मरे, भूख से जरूर मर जाएंगे","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कर्फ्यूः चंडीगढ़ में मजदूरों को रोटी के लाले...बोले- कोरोना से तो शायद मरे, भूख से जरूर मर जाएंगे
Fri, 27 Mar 2020 02:40 PM IST
खुशबू गोयल
रिशु राज सिंह, चंडीगढ़
रिशु राज सिंह, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Fri, 27 Mar 2020 02:40 PM IST
विज्ञापन
चंडीगढ़ में कर्फ्यू
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कोरोना वायरस के चलते कर्फ्यू लगने से चंडीगढ़ में रहने वाले करीब पांच हजार निर्माण मजदूरों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। सभी सरकारी और गैर-सरकारी निर्माण कार्य बंद होने की वजह से वह घर बैठे हैं। ज्यादातर लोगों के पास कुछ दिन का राशन है, लेकिन उसके बाद क्या.. यही सोचकर वे परेशान हैं। लोगों का कहना है कि कोरोना से तो वह शायद मरेंगे, लेकिन भूख से तो जरूर मर जाएंगे।
धनास के कच्ची कॉलोनी में स्थिति गंभीर
धनास की कच्ची कॉलोनी में शहर के करीब आधे निर्माण मजदूर रहते हैं। अमर उजाला ने वीरवार को निर्माण मजदूरों की धनास की कच्ची कॉलोनी के हालातों का जायजा लिया। यहां स्थिति वाकई काफी गंभीर है। कई परिवारों के मुखिया से बात की तो पता चला कि उनके पास अगले तीन-चार दिन का तो राशन है लेकिन उसके बाद क्या करेंगे। प्रशासन की तरफ से उन्हें कोई मदद नहीं मिल रही है। न ही अभी तक उनके अकाउंट में कोई रकम पहुंची है, जिससे वह अपना गुजारा चला सकें। लोगों ने बताया कि प्रशासन की तरफ से कहा गया था कि उन्हें फ्री में अन्नपूर्णा योजना के तहत खाना दिया जाएगा, लेकिन अभी तक उसके लिए पैसे लिए जा रहे हैं। लोगों के पास पैसे खत्म होते जा रहे हैं और भविष्य की चिंता बढ़ने लगी है।
घरों में कैद मजदूरों के सामने भुखमरी की स्थिति
शहर में कर्फ्यू लगने की वजह से सभी तरह के निर्माण व अन्य कार्य बंद हैं। प्रशासन की तरफ से सभी को घर में ही रहने का निर्देश दिया गया है। इस कारण यह लोग सबसे ज्यादा परेशान है। मजदूरों के घर में कैद हो जाने से उनके सामने भुखमरी की स्थिति है, क्योंकि यह लोग रोज कमाने और खाने वाले लोग हैं। बातचीत करने पर लोगों ने बताया कि जब काम ही नहीं है तो पैसे कहां से आएंगे और जब पैसे नहीं होंगे तो वह 21 दिन कैसे गुजार पाएंगे। ऐसे में तो परिवार भूख से मर जाएगा। जल्द चंडीगढ़ प्रशासन ने इस पर कोई पहल नहीं की तो स्थिति भयावह हो सकती है।
विज्ञापन
विज्ञापन
धनास के कच्ची कॉलोनी में स्थिति गंभीर
धनास की कच्ची कॉलोनी में शहर के करीब आधे निर्माण मजदूर रहते हैं। अमर उजाला ने वीरवार को निर्माण मजदूरों की धनास की कच्ची कॉलोनी के हालातों का जायजा लिया। यहां स्थिति वाकई काफी गंभीर है। कई परिवारों के मुखिया से बात की तो पता चला कि उनके पास अगले तीन-चार दिन का तो राशन है लेकिन उसके बाद क्या करेंगे। प्रशासन की तरफ से उन्हें कोई मदद नहीं मिल रही है। न ही अभी तक उनके अकाउंट में कोई रकम पहुंची है, जिससे वह अपना गुजारा चला सकें। लोगों ने बताया कि प्रशासन की तरफ से कहा गया था कि उन्हें फ्री में अन्नपूर्णा योजना के तहत खाना दिया जाएगा, लेकिन अभी तक उसके लिए पैसे लिए जा रहे हैं। लोगों के पास पैसे खत्म होते जा रहे हैं और भविष्य की चिंता बढ़ने लगी है।
विज्ञापन
घरों में कैद मजदूरों के सामने भुखमरी की स्थिति
शहर में कर्फ्यू लगने की वजह से सभी तरह के निर्माण व अन्य कार्य बंद हैं। प्रशासन की तरफ से सभी को घर में ही रहने का निर्देश दिया गया है। इस कारण यह लोग सबसे ज्यादा परेशान है। मजदूरों के घर में कैद हो जाने से उनके सामने भुखमरी की स्थिति है, क्योंकि यह लोग रोज कमाने और खाने वाले लोग हैं। बातचीत करने पर लोगों ने बताया कि जब काम ही नहीं है तो पैसे कहां से आएंगे और जब पैसे नहीं होंगे तो वह 21 दिन कैसे गुजार पाएंगे। ऐसे में तो परिवार भूख से मर जाएगा। जल्द चंडीगढ़ प्रशासन ने इस पर कोई पहल नहीं की तो स्थिति भयावह हो सकती है।
विज्ञापन
कैसे होगा गुजारा, नहीं आ रहा समझ
एक हादसे की वजह से पिछले 3-4 महीने से घर बैठा हूं। पत्नी काम कर घर चला रही थी, लेकिन कर्फ्यू लगने की वजह से वह भी घर बैठी है। पहले ही घर मुश्किल से चल रहा था। इलाज का खर्च अलग है। अब समझ नहीं आ रहा है कि 21 दिन कैसे गुजरेंगे। भूख से मरने की हालत पैदा हो जाएगी।
- सतपाल, मिस्त्री
एक हफ्ते से घर पर हूं। कुछ पैसे बचे हैं, उससे कुछ दिन का खर्चा चल जाएगा, लेकिन उसके बाद क्या होगा, यह सोचकर ही दिल दहल उठता है। एक-एक दिन काटना हम मजदूरों के लिए मुश्किल होता जा रहा है। जितने लोग कोरोना से नहीं मरेंगे, उससे ज्यादा लोग तो भूख की वजह से मर जाएंगे।
- शिव शंकर, मिस्त्री
जल्द पहुंचे पैसे खाते में, तभी चलेगा घर
कई दिनों से घर बैठा हूं। राशन नहीं मिल रहा है। जो आलू 20 रुपये मिलता था अब 30 से 40 रुपये किलो बिक रहा है। ऐसे में अमीर को फिर भी गुजारा चला लेंगे, गरीबों का क्या होगा। निर्माण मजदूरों के खाते में जल्द से जल्द पैसे पहुंचाने चाहिए और सभी को राशन भी दिया जाना चाहिए, तभी यह लोग 21 दिन रह पाएंगे।
- देवानंद, पल्बर
कुछ ही दिन के लिए पैसे बचे
21 दिन गुजारा करना है क्योंकि सभी लोग रोजाना कमाने और खाने वाले हैं। कुछ के पास पैसे हैं, जिससे वह कुछ दिन गुजारा कर लेंगे उसके बाद क्या होगा, यह किसी को नहीं पता। प्रशासन की तरफ से लोगों को राशन पहुंचाना चाहिए।
- अजय कुमार, मिस्त्री और ठेकेदार
- सतपाल, मिस्त्री
एक हफ्ते से घर पर हूं। कुछ पैसे बचे हैं, उससे कुछ दिन का खर्चा चल जाएगा, लेकिन उसके बाद क्या होगा, यह सोचकर ही दिल दहल उठता है। एक-एक दिन काटना हम मजदूरों के लिए मुश्किल होता जा रहा है। जितने लोग कोरोना से नहीं मरेंगे, उससे ज्यादा लोग तो भूख की वजह से मर जाएंगे।
- शिव शंकर, मिस्त्री
जल्द पहुंचे पैसे खाते में, तभी चलेगा घर
कई दिनों से घर बैठा हूं। राशन नहीं मिल रहा है। जो आलू 20 रुपये मिलता था अब 30 से 40 रुपये किलो बिक रहा है। ऐसे में अमीर को फिर भी गुजारा चला लेंगे, गरीबों का क्या होगा। निर्माण मजदूरों के खाते में जल्द से जल्द पैसे पहुंचाने चाहिए और सभी को राशन भी दिया जाना चाहिए, तभी यह लोग 21 दिन रह पाएंगे।
- देवानंद, पल्बर
कुछ ही दिन के लिए पैसे बचे
21 दिन गुजारा करना है क्योंकि सभी लोग रोजाना कमाने और खाने वाले हैं। कुछ के पास पैसे हैं, जिससे वह कुछ दिन गुजारा कर लेंगे उसके बाद क्या होगा, यह किसी को नहीं पता। प्रशासन की तरफ से लोगों को राशन पहुंचाना चाहिए।
- अजय कुमार, मिस्त्री और ठेकेदार