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कोरोना कमांडोः महामारी नहीं...गंदगी से फैलने वाली बीमारियों की जड़ पर प्रहार कर रहे बिरमपाल
Sat, 30 May 2020 12:32 PM IST
खुशबू गोयल
मोनिका नागर, चंडीगढ़
मोनिका नागर, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Sat, 30 May 2020 12:32 PM IST
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पत्नी के साथ सफाईकर्मी बिरमपाल सिंह
- फोटो : अमर उजाला
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यूटी प्रशासन ने कोरोना के चलते जब शहर में कर्फ्यू लगाने का निर्णय लिया तो कई लोगों के अंदर डर पैदा हो गया था। लोग घर के अंदर भी खौफ में जी रहे थे। लेकिन कुछ ऐसे शख्स भी थे जो अपनी जान जोखिम में डालकर लोगों की सेवा में जुटे रहे। उन्हीं में से एक हैं बिरमपाल सिंह।
बिरमपाल सफाईकर्मी हैं जिन्होंने लॉकडाउन शुरू होने से अब तक एक भी छुट्टी नहीं ली है। वह प्रत्येक दिन 12 घंटे ड्यूटी कर रहे हैं। अमर उजाला के साथ बातचीत में उन्होंने कहा, ‘शुरू में उन्हें थोड़ा डर लगा, क्योंकि घर घर जाकर कचरा उठाना था। ड्यूटी से बढ़कर मेरे लिए कुछ नहीं है। इसलिए ठान लिया कि अगर डर गया तो ड्यूटी के साथ गद्दारी करूंगा।
मेरे जेहन में लगातार एक ही बात आ रही थी कि कोरोना संकट के बीच में सफाई बहुत जरूरी है। अपनी सुरक्षा करते हुए दूसरे लोगों को भी सुरक्षित रखना है। साथ ही गंदगी से होने वाली दूसरी बीमारियों से भी लोगों को बचाना है। बस फिर क्या था जुट गया अपने काम में। दो महीने से मलोया के हर कोने-कोने की सफाई कर रहा हूं।’
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बिरमपाल सफाईकर्मी हैं जिन्होंने लॉकडाउन शुरू होने से अब तक एक भी छुट्टी नहीं ली है। वह प्रत्येक दिन 12 घंटे ड्यूटी कर रहे हैं। अमर उजाला के साथ बातचीत में उन्होंने कहा, ‘शुरू में उन्हें थोड़ा डर लगा, क्योंकि घर घर जाकर कचरा उठाना था। ड्यूटी से बढ़कर मेरे लिए कुछ नहीं है। इसलिए ठान लिया कि अगर डर गया तो ड्यूटी के साथ गद्दारी करूंगा।
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मेरे जेहन में लगातार एक ही बात आ रही थी कि कोरोना संकट के बीच में सफाई बहुत जरूरी है। अपनी सुरक्षा करते हुए दूसरे लोगों को भी सुरक्षित रखना है। साथ ही गंदगी से होने वाली दूसरी बीमारियों से भी लोगों को बचाना है। बस फिर क्या था जुट गया अपने काम में। दो महीने से मलोया के हर कोने-कोने की सफाई कर रहा हूं।’
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पहले देश सेवा.. छुट्टी तो कभी भी ली सकती है
मलोया निवासी बिरमपाल सिंह ने बताया कि यदि वह अपनी ड्यूटी न निभाते तो कचरा घरों में ही सड़ जाता जिससे कोरोना के साथ साथ नई बीमारियां पैदा हो जातीं। शहरवासियों और अपने परिवार की सुरक्षा को देखते हुए घर पर बैठना जायज नहीं है। एक बार बीमारी चली गई तो उसके बाद छुट्टियां तो कभी भी ली जा सकती है। यह समय घरों में बैठने की बजाय देश के प्रति अपना कर्तव्य निभाने का है।
परिवार से बनाई दूरी.. मुंह पर मास्क और हाथ में रहते हैं ग्लव्स
उन्होंने बताया कि उनके घर में आठ सदस्य हैं, जिसमें उनकी पत्नी और छह बच्चे हैं। ड्यूटी करने के बाद जब वह घर जाते थे तो बच्चों से दूरी बनाकर रखते थे। किसी भी चीज को छूने से परहेज करते थे। बिरमपाल हर समय मुंह पर मास्क और हाथों में ग्लव्स पहनते हैं। जो लोग बिना मास्क लगाए बाहर घूमते नजर आते हैं वह उन्हें टोकते भी हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि मुंह पर मास्क और जेब सैनिटाइजर की शीशी लेकर ही बाहर निकलें। कोरोना से बचाव के लिए ये अचूक हथियार हैं।
परिवार से बनाई दूरी.. मुंह पर मास्क और हाथ में रहते हैं ग्लव्स
उन्होंने बताया कि उनके घर में आठ सदस्य हैं, जिसमें उनकी पत्नी और छह बच्चे हैं। ड्यूटी करने के बाद जब वह घर जाते थे तो बच्चों से दूरी बनाकर रखते थे। किसी भी चीज को छूने से परहेज करते थे। बिरमपाल हर समय मुंह पर मास्क और हाथों में ग्लव्स पहनते हैं। जो लोग बिना मास्क लगाए बाहर घूमते नजर आते हैं वह उन्हें टोकते भी हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि मुंह पर मास्क और जेब सैनिटाइजर की शीशी लेकर ही बाहर निकलें। कोरोना से बचाव के लिए ये अचूक हथियार हैं।