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कोरोना महमारी व लॉकडाउन के छह महीने में चंडीगढ़ियों की छह आदतें बदलीं, सकारात्मक नतीजे
Mon, 28 Sep 2020 12:55 PM IST
खुशबू गोयल
अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Mon, 28 Sep 2020 12:55 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : Pixabay
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कोरोना काल में भारतीयों की आदत में कुछ सकारात्मक बदलाव आए हैं, जिन्हें समाज ने बहुत गंभीरता और तेजी के साथ अपनाया है। ये सब सिर्फ छह महीने में हुआ है। बदली आदतें लोगों को देश का जिम्मेदार नागरिक बनाने की दिशा में ले जाती हैं। इसके अब नतीजे भी दिख रहे हैं। उम्मीद की जानी चाहिए कि आगे भी इस तरह के बदलाव को समाज स्वीकार करेगा और लोग एक अच्छा नागरिक बनकर मिसाल पेश करेंगे।
हाथों का साफ करना
कोरोना वायरस ने लोगों को हाथ साफ रखने की आदत सिखा दी है। अब लोग दिन में कई बार सैनिटाइजर या साबुन से हाथ को साफ करते हैं जबकि आज से छह महीने पहले ऐसा नहीं होता था। यहां तक कुछ खाने से पहले भी हाथ की सफाई नहीं करते थे। कोरोना संकट की वजह से अब लोगों को समझ में आ चुका है कि साफ हाथ के क्या मायने हैं?
छींकते या खांसते वक्त आसपास वालों का ख्याल करना
छह महीने पहले लोग मनमाने तरीके से जोर-जोर से छींकते देखे जा सकते थे। इस दौरान वे इस बात का भी ध्यान नहीं रखते थे कि उनके आसपास लोगों पर इसका क्या असर पड़ेगा। कोरोना संकट के दौरान बरती जाने वाली अतिरिक्त सावधानी का असर यह हुआ है कि अब लोग रुमाल, टिश्यू, मास्क या कोहनी के सहारे बहुत संभलकर छींकते-खांसते दिखाई देते हैं।
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हाथों का साफ करना
कोरोना वायरस ने लोगों को हाथ साफ रखने की आदत सिखा दी है। अब लोग दिन में कई बार सैनिटाइजर या साबुन से हाथ को साफ करते हैं जबकि आज से छह महीने पहले ऐसा नहीं होता था। यहां तक कुछ खाने से पहले भी हाथ की सफाई नहीं करते थे। कोरोना संकट की वजह से अब लोगों को समझ में आ चुका है कि साफ हाथ के क्या मायने हैं?
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छींकते या खांसते वक्त आसपास वालों का ख्याल करना
छह महीने पहले लोग मनमाने तरीके से जोर-जोर से छींकते देखे जा सकते थे। इस दौरान वे इस बात का भी ध्यान नहीं रखते थे कि उनके आसपास लोगों पर इसका क्या असर पड़ेगा। कोरोना संकट के दौरान बरती जाने वाली अतिरिक्त सावधानी का असर यह हुआ है कि अब लोग रुमाल, टिश्यू, मास्क या कोहनी के सहारे बहुत संभलकर छींकते-खांसते दिखाई देते हैं।
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फिट रहने के लिए एक्सरसाइज व योग
स्वास्थ्य से संबंधित कई एजेंसियों ने कहा है कि कोरोना से बचाव के लिए शरीर को अंदर से मजबूत रखना जरूरी है। इसके लिए पौष्टिक खाने के साथ शरीर को चुस्त-दुरस्त रखना होगा। नतीजा यह रहा कि सवेरे व शाम को पार्कों व मैदान में लोगों की भीड़ दिखने लगी है। लॉकडाउन में कई लोगों ने घर के अंदर योग व एक्सरसाइज की आदत डाल दी थी, जो अब भी बरकरार है।
कम खर्च में जीवन यापन करना
पिछले छह महीने में यह बात भी कई लोग सीख चुके हैं कि कम खर्च में भी जीवन बसर किया जा सकता है। अब ज्यादातर लोग पैसों की फिजूलखर्ची से बच रहे हैं। पैसे सिर्फ उन्हीं चीजों पर खर्च कर रहे हैं, जो जरूरी है। दरअसल, लॉकडाउन के दौरान कई लोगों की नौकरी चली गई तो कइयों को कम सैलरी में गुजारा करना पड़ा। इससे लोग भविष्य के लिए आशंकित हुए और कम खर्च करने की आदत डाली।
कम खर्च में जीवन यापन करना
पिछले छह महीने में यह बात भी कई लोग सीख चुके हैं कि कम खर्च में भी जीवन बसर किया जा सकता है। अब ज्यादातर लोग पैसों की फिजूलखर्ची से बच रहे हैं। पैसे सिर्फ उन्हीं चीजों पर खर्च कर रहे हैं, जो जरूरी है। दरअसल, लॉकडाउन के दौरान कई लोगों की नौकरी चली गई तो कइयों को कम सैलरी में गुजारा करना पड़ा। इससे लोग भविष्य के लिए आशंकित हुए और कम खर्च करने की आदत डाली।
तकनीकी ज्ञान सीखने की ललक
लॉकडाउन ने उन लोगों को भी तकनीक के करीब ला दिया, जो पहले कहा करते थे कि सोशल मीडिया, मोबाइल सबकुछ फिजूल की चीजें हैं। ऑनलाइन एजुकेशन सबके सामने बहुत बड़ा उदाहरण है। टीचर क्या बच्चे। सभी को जूम क्लासेज, गूगल मीट व वेबिनार के बारे में पता चला गया। बुजुर्ग लोगों ने सोशल मीडिया पर अपने एकाउंट बनाकर देश-दुनिया से जुड़े और अपनी फीलिंग शेयर की। यू ट्यूब पर वीडियो डालना। वीडियो से नई चीजें सीखना भी अब हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है।
बागवानी की आदत
कोरोना व लॉकडाउन की वजह से लोग प्रकृति के करीब आए हैं। खासकर लोगों में घरों के अंदर बागवानी की आदत बढ़ी है। कोरोना काल में लोगों ने अपने घरों में औषधि के साथ सब्जी व फलदार पौधे लगाने शुरू किए। बाहर से सब्जी खरीदने की बजाय लोगों ने अपने घरों में ही लौकी, करेला, बैगन, टमाटर व कद्दू के पौधे लगाए हैं। किचन, बालकनी व टैरेस गार्डन के प्रति लोगों का झुकाव बढ़ा है।
बागवानी की आदत
कोरोना व लॉकडाउन की वजह से लोग प्रकृति के करीब आए हैं। खासकर लोगों में घरों के अंदर बागवानी की आदत बढ़ी है। कोरोना काल में लोगों ने अपने घरों में औषधि के साथ सब्जी व फलदार पौधे लगाने शुरू किए। बाहर से सब्जी खरीदने की बजाय लोगों ने अपने घरों में ही लौकी, करेला, बैगन, टमाटर व कद्दू के पौधे लगाए हैं। किचन, बालकनी व टैरेस गार्डन के प्रति लोगों का झुकाव बढ़ा है।