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कोरोना वायरस: हरियाणा की साइंस इंडस्ट्री को झटका, चीन से आयात बंद, महंगे हुए कलपुर्जे

Sun, 16 Feb 2020 07:43 PM IST
ajay kumar मोहित धुपड़, अमर उजाला, चंडीगढ़
मोहित धुपड़, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Sun, 16 Feb 2020 07:43 PM IST
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Corona virus effected the science industry of Haryana
सांकेतिक तस्वीर।

चीन में कोरोना वायरस का असर अब लगभग दो महीने बाद विश्व में सबसे बड़ी हरियाणा की साइंस इंडस्ट्री पर पड़ने लगा है। साइंस उपकरणों में डील करने वाले प्रदेश व देश के ट्रेडर्स का चीन निर्मित पुर्जों और उपकरणों का स्टॉक  खत्म होने लगा है। चीन में करोड़ों के आर्डर फंसे हुए हैं और आयात भी ठप है। जो पुर्जे अभी ट्रेडर्स के स्टॉक में उपलब्ध हैं, उनकी कीमतें दस से पंद्रह फीसद तक बढ़ चुकी हैं।

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मौजूदा स्थिति पर साइंस उद्यमियों का कहना है कि  पुर्जों को यूरोपियन देशों से मंगवाना पड़ सकता है, जिससे उपकरण और महंगे हो सकते हैं। यदि ऐसा हुआ इसका असर उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ेगा।
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तैयार होते हैं 10 हजार से ज्यादा उपकरण, 15 देशों में निर्यात
हरियाणा की साइंस, रिसर्च एवं मेडिकल उपकरणों की इंडस्ट्री विश्व में सबसे बड़ी है। अंबाला और भिवानी सबसे ज्यादा औद्योगिक इकाइयां है। सूबे में 10 हजार से ज्यादा साइंस, रिसर्च एवं मेडिकल उपकरण तैयार होते हैं। जिन्हें देश के साथ-साथ खाड़ी देशों समेत यूरोप, अमेरिका व आस्ट्रेलिया के 15 से अधिक देशों में निर्यात किया जाता है। 

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इसलिए चीन पर आश्रित इंडस्ट्री

साइंसटिफिक इंडस्ट्री का सलाना टर्नओवर 1500 सौ करोड़ से अधिक है। पहले साइंसटिफिक, रिसर्च और मेडिकल उपकरणों के कलपुर्जे यहीं तैयार होते थे। सस्ते के चक्कर में कलपूर्जे चीन से आयात किया जाने लगा। विपरीत असर यह रहा कि अधिकतर स्थानीय इकाइयां ठप हो गई। उत्पादन इकाइयों को भी चीन का सस्ता माल भाने लगा।

आज हरियाणा समेत दिल्ली, हैदराबाद, मुंबई, बंगलुरु व चेन्नई में इन बड़े ट्रेडर्स स्थापित हो चुके हैं। जो आज चीन से आप्टिकल ग्लास, ग्लास ट्यूबिंग, स्टीरियो व अन्य कैटेगरी की माइक्रोस्कोप समेत काफी कलपुर्जे मंगवाकर उपलब्ध करवाते हैं और फिर ये इकाइयां उपकरण तैयार कर निर्यात करती है। लगभग 150 करोड़ से अधिक का चीन निर्मित कलपुर्जा हरियाणा की साइंस इंडस्ट्री को हर साल उपलब्ध करवाया जाता है।

उद्यमी चिंतित, महंगे हो सकते हैं उपकरण
 प्रदेश के साइंस उद्यमी अश्वनी गोयल व राकेश गुप्ता बताते हैं कि  सभी पोर्ट पूरी तरह से बंद हैं और ट्रेडर्स की करोड़ों की कंसाइंमेंट चीन में ही अटकी पड़ी है। कब तक माल आयात होगा, इसका कोई अंदाजा नहीं है। उद्यमी ज्ञानचंद गुप्ता व राजीव अग्रवाल ने बताया कि चूंकि अधिकतर कलपुर्जों की स्थानीय उत्पादन इकाइयां बंद हो चुकी हैं और चीन से भी माल नहीं आ रहा है, तो ऐसे में यूरोपियन व अमेरिकन कंट्री से कलपुर्जे मंगवाने पड़ सकते हैं। इससे साइंस उपकरण भी महंगे हो जाएंगे। 

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