लॉकडाउन के छह माह बाद बाजार के हालात, 70 फीसदी घटा कारोबार, त्योहार पर टिकी उम्मीदें
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बीते छह महीनों में व्यापारियों की कमाई महज 30 प्रतिशत रह गई है। कोरोना की वजह से पहले कुछ महीने बाजार पूरी तरह से बंद रहे। जब शोरूम खुले तो नाममात्र ग्राहक हैं। बड़ी मुश्किल से दुकानों का खर्च निकाल पा रहे हैं। अब उम्मीद आने वाले त्योहार पर टिकी है। शादी समारोहों के शुरू होने का इंतजार है। जब तक शादी समारोह शुरू नहीं होते, तब तक कारोबार अच्छी तरीके से शुरू नहीं हो पाएंगे। बाजार के पुराने ढर्रे पर लौटने में काफी समय लगेगा।
कर्मचारी भी कर दिए आधे
कामकाज कम होने की वजह से कर्मचारियों की संख्या कम कर दी है। स्थिति ठीक हुई तो फिर से दुकान पर ज्यादा कर्मचारी रखेंगे। शहर में ज्यादातर दुकानों का यही हाल है। संजीव चड्डा, जनरल सेक्रेटरी, व्यापार मंडल चंडीगढ़
टेंट व बैंड के लिए सबसे खराब रहा समय
पिछले छह महीने टेंट, कैटरिंग व बैंड व्यवसाय के लिए चुनौती भरे रहे हैं। दूसरे व्यवसाय में कुछ कमाई तो थी, यहां तो सब चौपट हो गया। पितृपक्ष में भी कोई कार्यक्रम नहीं हुआ। अब गोदामों का किराया देने की स्थिति नहीं है। - तेजेंदर सिंह, अध्यक्ष, टेंट व्यवसाय एसोसिएशन
राशन की दुकानों पर भी पड़ा असर
मासिक आमदनी लगभग 90 लाख रुपये थी। अब घटकर 70 से 75 लाख रह गई है। लोगों ने ऑनलाइन खरीदारी शुरू कर दी है। पहले जो लोग हर माह का राशन लेते थे, अब वह ऑफर के चक्कर में ऑनलाइन लेते हैं। यह हमारे लिए चुनौती है। राजेंद्र जैन, अध्यक्ष, रिटेल किराना व्यवसायी एसोसिएशन
सैनिटाइजर बिका, पर अन्य दवाओं की मांग घटी
कोरोना काल में सैनिटाइजर, मास्क और दस्तानों की मांग तो बढ़ गई लेकिन कई ऐसी दवाइयां हैं, जिनकी मांग खत्म ही हो गई। छह माह से अस्पतालों की ओपीडी बंद हैं। प्राइवेट डॉक्टर भी नहीं देख रहे। ऐसे में दवाओं का व्यवसाय भी 60 प्रतिशत ही रह गया है। - अमरजीत सिंह, प्रधान, दवा व्यवसाय एसोसिएशन
कपड़े का बाजार 20 प्रतिशत पर आ गया
लोग अब प्राथमिकता के आधार पर खरीदारी कर रहे हैं। पहले लोग समय-समय पर कपड़ा खरीदते थे, अब जरूरत के अनुसार ही सामान खरीद रहे हैं। कपड़े का व्यवसाय केवल 20 प्रतिशत ही रह गया है। त्योहार के लिए अब व्यापारी ऑर्डर करने में डर रहे हैं। चरणजीव सिंह, चेयरमैन, चंडीगढ़ व्यापार मंडल