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ये हैं असली कोरोना योद्धा, संक्रमितों के शव उठाने से डरे कर्मी तो 12 युवाओं ने उठाई जिम्मेदारी
Tue, 23 Jun 2020 11:02 AM IST
खुशबू गोयल
नवदीप मिश्रा, चंडीगढ़
नवदीप मिश्रा, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Tue, 23 Jun 2020 11:02 AM IST
सार
- अस्पताल से श्मशानघाट तक का जिम्मा उठा रही यूथ ब्रिगेड
- डॉक्टरों ने डब्ल्यूएचओ के मानकों के अनुसार दी ट्रेनिंग
- वॉलंटियर में ज्यादातर स्टूडेंट, कर रहे निशुल्क सेवा
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रेडक्रॉस सोसायटी के वॉलंटियर्स
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
कोरोना के खौफ में जब अपने मुंह मोड़ रहे हों तो बेगानों के लिए अपने जीवन को दांव पर लगाने वाले इन युवाओं पर आपको नाज करना ही चाहिए। चंडीगढ़ के 12 युवाओं की यह टोली कोरोना से दम तोड़ने वालों के शव अस्पताल से लेकर श्मशानघाट तक पहुंचाने का जिम्मा उठा रही है। गर्व करने वाली बात यह भी है कि इस काम में अपनी इच्छा से लगे ये लोग निशुल्क सेवा कर रहे हैं।
इन युवाओं के संकटमोचक बनकर सामने आने की कहानी शुरू होती है कोरोना की पहली मौत से। पीजीआई में जब कोरोना संक्रमित मरीज की मौत हुई तो प्रशासन की ओर से तैनात कर्मचारियों ने संक्रमण के डर से शव को हाथ लगाने से मना कर दिया था। इस विकट परिस्थिति में रेडक्रॉस सोसायटी को फोन किया गया। क्योंकि ऐसे शवों को श्मशान घाट तक पहुंचाने की जिम्मेदारी प्रशासन ने रेडक्रॉस सोसायटी को दी थी।
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एडीसी सचिन राणा के एक फोन पर 12 वॉलंटियर सामने आए। उन्होंने शव को अस्पताल से श्मशानघाट तक पहुंचाया। उसके बाद से ये युवा कोरोना संक्रमितों के शव उठाने की जिम्मेदारी उठा रहे हैं। उनके हौसले को देखते हुए 20 जून से जीएमसीएच-32 और जीएमएसएच-16 के कोरोना संक्रमित मरीजों के शवों को उठाने का जिम्मा भी इन्हीं युवाओं को दिया गया है।
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इन युवाओं के संकटमोचक बनकर सामने आने की कहानी शुरू होती है कोरोना की पहली मौत से। पीजीआई में जब कोरोना संक्रमित मरीज की मौत हुई तो प्रशासन की ओर से तैनात कर्मचारियों ने संक्रमण के डर से शव को हाथ लगाने से मना कर दिया था। इस विकट परिस्थिति में रेडक्रॉस सोसायटी को फोन किया गया। क्योंकि ऐसे शवों को श्मशान घाट तक पहुंचाने की जिम्मेदारी प्रशासन ने रेडक्रॉस सोसायटी को दी थी।
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एडीसी सचिन राणा के एक फोन पर 12 वॉलंटियर सामने आए। उन्होंने शव को अस्पताल से श्मशानघाट तक पहुंचाया। उसके बाद से ये युवा कोरोना संक्रमितों के शव उठाने की जिम्मेदारी उठा रहे हैं। उनके हौसले को देखते हुए 20 जून से जीएमसीएच-32 और जीएमएसएच-16 के कोरोना संक्रमित मरीजों के शवों को उठाने का जिम्मा भी इन्हीं युवाओं को दिया गया है।
पीपीई किट पहनने के बाद नहीं मिलता पानी
कोरोना संक्रमित मरीज की मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग लगभग 2 घंटे पहले एडिशनल डिप्टी कमिश्नर को फोन करके सूचना देते हैं। एक घंटे पहले रेडक्रॉस सोसायटी वॉलंटियर को सूचना देती है। वॉलंटियर मौके पर पहुंचकर पहले नाश्ता करते हैं और पानी पीते हैं। पीपीई किट पहनने के बाद संक्रमण के खतरे को देखते हुए वॉलंटियर को पानी तक नहीं मिलता। शव दाह के उपरांत पूरी तरह से सैनिटाइज करने के बाद ही वॉलंटियर कुछ खाते पीते हैं।
हरियाणा के बाद चंडीगढ़ में भी सस्ता हुआ कोरोना का टेस्ट, निजी लैब में अब 2000 रुपये होंगे खर्च
डॉक्टरों ने डब्ल्यूएचओ के मानकों के अनुसार दी ट्रेनिंग
वॉलंटियर के आने के बाद सबसे पहले उनकी सुरक्षा जरूरी थी। सेक्टर 16 स्थित अस्पताल के डॉक्टरों ने तीन दिन तक सभी वॉलंटियर को डब्ल्यूएचओ के मानकों के अनुसार ट्रेनिंग दी। पीपीई किट पहनना व उतारना साथ ही उससे पहले किन मानकों का ध्यान रखना है, इसकी जानकारी दी गई। तब जाकर वॉलंटियर्स को शव उठाने के लिए लगाया गया।
वॉलंटियर में ज्यादातर स्टूडेंट, कर रहे निशुल्क सेवा
शव उठाने के लिए जिन युवाओं को जिम्मेदारी मिली है, उनमें ज्यादातर पहली या दूसरी वर्ष के छात्र हैं। यह सभी वॉलंटियर निशुल्क सेवा कर रहे हैं। ज्यादातर वॉलंटियर पिछले सात साल से रेडक्रॉस से जुड़े हैं। सबसे पुराने वॉलंटियर होने के कारण इन 12 युवाओं का चुनाव किया गया है। देश में चंडीगढ़ एकमात्र ऐसा शहर है, जहां युवाओं की टीम शव उठा रही है। अन्य स्थानों पर स्वास्थ्य विभाग या प्रशासन ही शव उठाने की व्यवस्था कर रहा है।
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डॉक्टरों ने डब्ल्यूएचओ के मानकों के अनुसार दी ट्रेनिंग
वॉलंटियर के आने के बाद सबसे पहले उनकी सुरक्षा जरूरी थी। सेक्टर 16 स्थित अस्पताल के डॉक्टरों ने तीन दिन तक सभी वॉलंटियर को डब्ल्यूएचओ के मानकों के अनुसार ट्रेनिंग दी। पीपीई किट पहनना व उतारना साथ ही उससे पहले किन मानकों का ध्यान रखना है, इसकी जानकारी दी गई। तब जाकर वॉलंटियर्स को शव उठाने के लिए लगाया गया।
वॉलंटियर में ज्यादातर स्टूडेंट, कर रहे निशुल्क सेवा
शव उठाने के लिए जिन युवाओं को जिम्मेदारी मिली है, उनमें ज्यादातर पहली या दूसरी वर्ष के छात्र हैं। यह सभी वॉलंटियर निशुल्क सेवा कर रहे हैं। ज्यादातर वॉलंटियर पिछले सात साल से रेडक्रॉस से जुड़े हैं। सबसे पुराने वॉलंटियर होने के कारण इन 12 युवाओं का चुनाव किया गया है। देश में चंडीगढ़ एकमात्र ऐसा शहर है, जहां युवाओं की टीम शव उठा रही है। अन्य स्थानों पर स्वास्थ्य विभाग या प्रशासन ही शव उठाने की व्यवस्था कर रहा है।
अपनी इच्छा से निशुल्क कार्य कर रहे युवा
रेडक्रॉस के पास लिमिटेड स्टाफ होता है। उनसे शव नहीं उठवाए जा सकते हैं। नए स्टाफ को तैनात करना संभव नहीं था। इसलिए रेडक्रॉस के वॉलंटियर से शव उठवाए गए। सभी ने अपनी इच्छा से निशुल्क कार्य किया। ऐसे युवाओं पर नाज होना चाहिए।
- सचिन राणा, एडिशनल डिप्टी कमिश्नर
मानकों के तहत कर रहे कार्य
युवाओं ने बेहतर कार्य किया है। शव को डब्ल्यूएचओ के मानकों के अनुसार ही श्मशान घाट तक लाया जा रहा है। वहां वॉलंटियर शव को अंदर तक लेकर आते हैं। मानकों के अंतर्गत शवदाह के बाद वॉलंटियर को भी सैनिटाइज करते हैं।
- केके यादव, निगम कमिश्नर
युवाओं ने अपने आपको साबित किया
वास्तव में यह युवाओं के लिए एक बेहतर मौका था। जहां उन्होंने अपने आप को साबित किया। फिलहाल सेक्टर 16 अस्पताल में कोई मौत नहीं हुई है। आगे ऐसी कोई घटना होती है तो इसकी जिम्मेदारी भी इन युवाओं को दी जाएगी।
- डॉ. वीके नागपाल, मेडिकल सुपरिंटेंडेंट, जीएमएसएच, सेक्टर 16
- सचिन राणा, एडिशनल डिप्टी कमिश्नर
मानकों के तहत कर रहे कार्य
युवाओं ने बेहतर कार्य किया है। शव को डब्ल्यूएचओ के मानकों के अनुसार ही श्मशान घाट तक लाया जा रहा है। वहां वॉलंटियर शव को अंदर तक लेकर आते हैं। मानकों के अंतर्गत शवदाह के बाद वॉलंटियर को भी सैनिटाइज करते हैं।
- केके यादव, निगम कमिश्नर
युवाओं ने अपने आपको साबित किया
वास्तव में यह युवाओं के लिए एक बेहतर मौका था। जहां उन्होंने अपने आप को साबित किया। फिलहाल सेक्टर 16 अस्पताल में कोई मौत नहीं हुई है। आगे ऐसी कोई घटना होती है तो इसकी जिम्मेदारी भी इन युवाओं को दी जाएगी।
- डॉ. वीके नागपाल, मेडिकल सुपरिंटेंडेंट, जीएमएसएच, सेक्टर 16