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Corona Commando नर्सिंग ऑफिसर रोके बोले- कोरोना मरीज भी अपने हैं, सेवा करके सुकून मिला

Sat, 16 May 2020 02:03 PM IST
खुशबू गोयल अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: खुशबू गोयल Updated Sat, 16 May 2020 02:03 PM IST
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कोरोना कमांडो राकेश - फोटो : अमर उजाला
कोरोना वायरस से संक्रमित मरीज भी अपने ही भाई बंधु हैं। अगर आज हम अपने फर्ज से मुंह मोड़ लेंगे तो उनकी देखभाल कौन करेगा। यह समय अपने और अपने परिवार के बारे में सोचने की बजाय देश और देश के उन हजारों मरीजों के बारे में सोचने का है जो अस्पताल में भर्ती एक एक मिनट खौफ के बीच गुजार रहे हैं।
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 मेरा तो यह मानना है कि कोरोना हो या कोई भी बड़ी जंग अगर मिलकर मुकाबला किया जाए तो निश्चय ही जीत हमारी होगी। यह कहना है पीजीआई नर्सिंग ऑफिसर राकेश कुमार का, जो करोना के पॉजिटिव मरीजों के बीच कोविड- वार्ड में ड्यूटी कर रहे हैं।
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ड्यूटी के दौरान उन्होंने कोरोना से संक्रमित हुए तीन बच्चों की जी जान से देखभाल की है। अब वो तीनों इनके दोस्त बन चुके हैं। राकेश का कहना है कि पूरी लाइफ इस एहसास को भूल नहीं पाऊंगा। खौफ और महामारी के दौर में अस्पताल में भर्ती उन तीन मासूमों के साथ बिताए गए पल जीवन के बेहद खास पलों में शामिल हो चुके हैं।
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परिवार को छोड़ा घर पीजीआई को ही बना लिया आशियाना   
राकेश कुमार ने बताया कि कोरोना संक्रमण के कारण लॉकडाउन घोषित होने से पहले ही वह अपनी पत्नी पुष्पा और 18 महीने के बेटे पुर्वेश को राजगढ़ तहसील स्थित नरवासी गांव में अपनी मां के पास छोड़ आए थे। उनको गांव छोड़ने के बाद चंडीगढ़ लौटकर ड्यूटी करने में शुरुआत दौर काफी कठिन रहा, लेकिन फिर धीरे-धीरे बात समझ में आने लगी कि यह समय घर परिवार की चिंता को दरकिनार कर देश के प्रति अपने फर्ज को अदा करने का है

। ड्यूटी के दौरान जब कभी बेटे की याद आती मैं वीडियो कॉल कर लेता था। इसी बीच कोरोना से संक्रमित होकर 3 बच्चे मेरे वार्ड में पहुंचे। तीनों को देखकर ऐसा लगा यह मेरे बेटे की तरह हैं। कल तक जो काम ड्यूटी की तरह करता था उसे अब पूरी तन्मयता के साथ करने लगा।

सेना माईनस डिग्री में कर सकती है काम तो हम पीपीई किट में क्यों नहीं
राकेश का कहना है कि कोरोना वायरस के मरीजों के इलाज के दौरान पीपीई किट पहनकर काम करना बहुत ही कठिन होता है। प्लास्टिक से बने कई लेयर के किट को पहनने के बाद पूरा शरीर पसीने से लथपथ हो जाता है। एक-एक मिनट बेहद मुश्किलों भरा होता है।


लेकिन उस वक्त बस एक ही बात मुझे ताकत देती है कि देश की सीमा पर डटे वीर जवान जब माइनस डिग्री में वहां 24 घंटे बिना डटे ड्यूटी कर सकते हैं तो हम पीपीई किट पहनकर कुछ घंटे अस्पताल में ड्यूटी क्यों नहीं कर सकते। इस ख्याल के बाद किट से होने वाली सारी परेशानियां मानों मिनटों में दूर हो जाती हैं।
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