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पीजीआई में ठेके पर रखे गए कर्मचारियों को हाईकोर्ट से मिली राहत

Sat, 19 Mar 2016 07:15 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला/चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला/चंडीगढ़ Updated Sat, 19 Mar 2016 07:15 PM IST
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Contract Employee, Punjab-Haryana Highcourt, PGI Chandigarh, Court, Hospital, Goverment service
कोर्ट - फोटो : demo photo
पीजीआई में ठेके पर रखे गए दो हजार कर्मचारियों को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने राहत दी है। अदालत ने सीजेएम की कोर्ट की ओर से पीजीआई के सीनियर एडमिनिस्ट्रेशन अफसर (एसएओ) और चीफ सिक्योरिटी अफसर (सीएसओ) को जारी समन पर
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रोक लगा दी है।

ठेका प्रथा समाप्त होने का अनुपालन न करने पर सीजेएम ने इन दोनों अधिकारियों को समन जारी किया था। पीजीआई प्रशासन ने इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। हाईकोर्ट के इस आदेश से अब पीजीआई में ठेके पर रखे गए दो हजार से अधिक कर्मचारियों पर
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नौकरी चले जाने का खतरा फिलहाल टल गया है।

हाईकोर्ट में दायर याचिका में पीजीआई की ओर से कहा गया कि लागत कम करने के मद्देनजर साल 1996 में स्टैंडिंग फाइनेंस कमेटी ने हॉस्पिटल अटेंडेंट, सेनेटरी अटेंडेंट, बियरर और सिक्योरिटी गार्ड्स जैसे चौथा दर्जा कर्मचारियों को ठेका आधार पर
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रखने की सिफारिश की थी और गवर्निंग बॉडी ने इसे मंजूरी दे दी थी।

इसके बाद कमेटी ने साल 2005 में नियमित भर्ती की सिफारिश करते हुए, फिलहाल ठेका प्रथा की बजाय आउट सोर्सिंग व्यवस्था अपनाने की सिफरिश भी की थी। यह सिफारिश भी गवर्निंग बॉडी ने मंजूर कर ली। चार एजेंसियों को आउटसोर्सिंग का काम

सौंपा गया था।

हाईकोर्ट को बताया गया कि इसी दौरान संस्थान केनियमित कर्मचारियों ने सेंट्रल एडवाइजरी कॉन्ट्रेक्ट लेबर बोर्ड के समक्ष ठेका आधार प्रणाली को चुनौती दी थी। बोर्ड ने यह व्यवस्था खत्म करने की सिफारिश की थी।

इस सिफारिश पर केंद्र सरकार ने नोटिफिकेशन जारी कर सेनिटेशन, सिक्योरिटी और कैटरिंग में अनुबंध सिस्टम खत्म करने को कहा था। पीजीआई ने कहा कि इस आदेश के अनुपालन के लिए डिप्टी चीफ लेबर कमिश्नर ने पीजीआई को पत्र लिखा था,

लेकिन पीजीआई ने तब अपनी मजबूरी बताई थी। याचिका में कहा गया कि बावजूद इसके डिप्टी चीफ लेबर कमिश्नर ने पीजीआई के खिलाफ केस डाल दिया।

हाईकोर्ट को बताया गया कि इस केस पर ही एसएओ और सीएसओ को सीजेएम कोर्ट ने समन किया था। नियमित भर्ती में समय लग सकता है और ठेका आधारित कर्मचारियों का कांट्रेक्ट तुरंत खत्म नहीं किया जा सकता, लिहाजा समन पर रोक लगाई जानी

चाहिए। दलील दी कि पदों की मंजूरी लेकर नियुक्ति करने में भी लंबा समय लगेगा।

दूसरी ओर अनुबंध के आधार पर काम करने वाले कर्मचारियों को यदि नियमित करने पर विचार किया जाता है तो सेवा नियम आड़े आएंगे, क्योंकि इनके अनुसार ज्यादातर कर्मचारी नियमित नियुक्ति के लिए अयोग्य हो जाएंगे।


इस दलील के साथ केंद्र सरकार की ओर से पिछले साल जारी नोटिफिकेशन रद्द करने और लेबर विभाग की ओर से दर्ज मामले को रद्द करने की मांग पीजीआई ने की थी। हाईकोर्ट ने टिप्पणी की कि पीजीआई रातोंरात नियमित भर्ती नहीं कर सकता।

हाईकोर्ट ने दोनों अफसरों को जारी समन पर रोक लगा दी है।
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