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2015 में हाईकोर्ट ने कहा था डेरों की जांच करो, कर लेते तो नहीं होती हिंसा और आगजनी
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sun, 12 Nov 2017 09:09 AM IST
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weapons recovered from Dera followers
- फोटो : File Photo
डेरा मुखी गुरमीत सिंह राम रहीम को दोषी करार दिए जाते ही पंचकूला सहित हरियाणा और पंजाब में हुए दंगों के दौरान तोड़फोड़ और आगजनी तथा सरकारी और निजी संपत्ति के नुकसान को रोका जा सकता था।
अगर दोनों राज्य सरकारें मई 2015 में हाईकोर्ट के उन आदेशों का पालन सही तरह से करतीं, जिसके तहत हाईकोर्ट ने दोनों राज्यों के सभी डेरों की जांच करने के आदेश दिए थे। 25 अगस्त और उसके बाद हुई हिंसा, तोड़फोड़ और आगजनी सरकारी लापरवाही और हाई कोर्ट के आदेशों को लागू नहीं किए जाने के चलते हुई है।
इस आरोप के साथ हाई कोर्ट में हरियाणा और पंजाब सरकार के खिलाफ अवमानना की याचिका दायर कर उन दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की गई है, जिन्होंने वर्ष 2015 के हाई कोर्ट के आदेशों का पालना ही नहीं किया। इस मांग को लेकर एडवोकेट रवनीत सिंह जोशी ने शुक्रवार को हाई कोर्ट की रजिस्ट्री में यह याचिका दायर कर दी है जिस पर हाईकोर्ट अगले सप्ताह सुनवाई कर सकता है।
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अगर दोनों राज्य सरकारें मई 2015 में हाईकोर्ट के उन आदेशों का पालन सही तरह से करतीं, जिसके तहत हाईकोर्ट ने दोनों राज्यों के सभी डेरों की जांच करने के आदेश दिए थे। 25 अगस्त और उसके बाद हुई हिंसा, तोड़फोड़ और आगजनी सरकारी लापरवाही और हाई कोर्ट के आदेशों को लागू नहीं किए जाने के चलते हुई है।
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इस आरोप के साथ हाई कोर्ट में हरियाणा और पंजाब सरकार के खिलाफ अवमानना की याचिका दायर कर उन दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की गई है, जिन्होंने वर्ष 2015 के हाई कोर्ट के आदेशों का पालना ही नहीं किया। इस मांग को लेकर एडवोकेट रवनीत सिंह जोशी ने शुक्रवार को हाई कोर्ट की रजिस्ट्री में यह याचिका दायर कर दी है जिस पर हाईकोर्ट अगले सप्ताह सुनवाई कर सकता है।
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Dera Sacha Sauda, Sirsa
- फोटो : File Photo
दायर अवमानना याचिका में हाईकोर्ट को बताया गया है कि जब कथित संत रामपाल के मामले में हाईकोर्ट सुनवाई कर रहा था तब हाई कोर्ट में मिलिट्री इंटेलिजेंस की एक रिपोर्ट पेश कर डेरा सच्चा सौदा में कुछ पूर्व सैनिकों द्वारा अनुयायियों को मिलिट्री ट्रेनिंग दिए जाने की जानकारी दी गई थी।
हाईकोर्ट ने इस जानकारी पर संज्ञान ले पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ को अपने राज्यों के सभी डेरों की जांच के आदेश दे दिए थे। इन आदेशों के बाद पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ ने डेरों को क्लीन-चिट दे दी थी। हाईकोर्ट इस याचिका का निपटारा करते हुए पंजाब और हरियाणा दोनों राज्यों को आदेश दिए थे कि वह यह सुनिश्चित करें कि भविष्य में किसी भी डेरे में इस तरह की अवैध गतिविधि न चले और इसकी समय-समय पर जांच की जाए।
अब याचिकाकर्ता ने हाई कोर्ट में दायर अवमानना याचिका में हाई कोर्ट को बताया कि डेरा मुखी को दोषी करार दिए जाने के बाद हुए दंगों में यह साफ हो चुका है कि ये दंगे पूर्व नियोजित थे और डेरे में ही इसकी योजना बनाई गई थी। डेरामुखी को पंचकूला में लाने के दौरान जो वाहन साथ आए थे उनमें हथियार मिले थे, जिन्हें जब्त कर लिया गया था। पंचकूला से ज्वलनशील पदार्थ से भरी एक फायर-ब्रिगेड का वाहन भी पकड़ा गया था। यह सब डेरे से ही सप्लाई किया गया था और ऐसे में तय है कि अगर सरकार ने दो वर्ष पहले के हाई कोर्ट के आदेशों की सही तरीके से पालन किया होता और समय-समय पर डेरे की जांच की जाती तो इस तोड़फोड़ और आगजनी को रोका जा सकता था।
हाईकोर्ट ने इस जानकारी पर संज्ञान ले पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ को अपने राज्यों के सभी डेरों की जांच के आदेश दे दिए थे। इन आदेशों के बाद पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ ने डेरों को क्लीन-चिट दे दी थी। हाईकोर्ट इस याचिका का निपटारा करते हुए पंजाब और हरियाणा दोनों राज्यों को आदेश दिए थे कि वह यह सुनिश्चित करें कि भविष्य में किसी भी डेरे में इस तरह की अवैध गतिविधि न चले और इसकी समय-समय पर जांच की जाए।
अब याचिकाकर्ता ने हाई कोर्ट में दायर अवमानना याचिका में हाई कोर्ट को बताया कि डेरा मुखी को दोषी करार दिए जाने के बाद हुए दंगों में यह साफ हो चुका है कि ये दंगे पूर्व नियोजित थे और डेरे में ही इसकी योजना बनाई गई थी। डेरामुखी को पंचकूला में लाने के दौरान जो वाहन साथ आए थे उनमें हथियार मिले थे, जिन्हें जब्त कर लिया गया था। पंचकूला से ज्वलनशील पदार्थ से भरी एक फायर-ब्रिगेड का वाहन भी पकड़ा गया था। यह सब डेरे से ही सप्लाई किया गया था और ऐसे में तय है कि अगर सरकार ने दो वर्ष पहले के हाई कोर्ट के आदेशों की सही तरीके से पालन किया होता और समय-समय पर डेरे की जांच की जाती तो इस तोड़फोड़ और आगजनी को रोका जा सकता था।