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Haryana: नाराज नेताओं को मनाने के लिए कांग्रेस का 'ऑपरेशन मैनेज' शुरू, न सधे तो चार सीटों पर होगा बड़ा नुकसान

Fri, 03 May 2024 04:11 PM IST
निवेदिता वर्मा सोमदत्त शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
सोमदत्त शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Fri, 03 May 2024 04:11 PM IST
सार

करण दलाल को छोड़कर तीनों ऐसे नेता हैं, जो पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा के विरोधी खेमे के हैं। इसलिए करण दलाल को हुड्डा मना सकते हैं। लेकिन, कैप्टन अजय यादव, चौधरी बीरेंद्र सिंह और किरण चौधरी को मनाना प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष उदयभान और हरियाणा प्रभारी दीपक बाबरिया के बस में नहीं है। कैप्टन अजय यादव और किरण चौधरी पहले ही बाबरिया की कार्यप्रणाली पर कई बार सवाल उठा चुकी हैं। 

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Congress started Operation Manage to pacify four senior leaders of Haryana
congress - फोटो : amar ujala

विस्तार

टिकट कटने से नाराज हरियाणा कांग्रेस के चार दिग्गज नेताओं को मनाने के लिए कांग्रेस हाईकमान ने ऑपरेशन मैनेज शुरू कर दिया है। हिसार, फरीदाबाद, गुरुग्राम और भिवानी में भितरघात की आशंका के चलते हाईकमान ने चौधरी बीरेंद्र सिंह, करण दलाल, कैप्टन अजय यादव और किरण चौधरी को साधने के लिए रणनीति तैयार कर ली है। 
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चारों नेताओं को हाईकमान की ओर से आश्वस्त किया जा रहा है कि उनको व उनके समर्थकों को विधानसभा चुनाव में समायोजित किया जाएगा। इसके अलावा कुछ नेताओं को संगठन में अहम जिम्मेदारी देने का भी आश्वासन दिया गया है। ये भी कहा गया है कि लोकसभा चुनाव में उनके हलकों से पार्टी प्रत्याशी को मिले वोटों के आधार पर ही आगामी विधानसभा में टिकटों का वितरण होगा। ऐसे में खुलकर हाईकमान के फैसले की मुखालफत करना नेताओं के लिए आसान नहीं है।
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बीरेंद्र सिंह और किरण चौधरी के साथ सोनिया गांधी और राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे टिकट आवंटन से पहले ही बैठक कर चुके हैं। बावजूद इसके चारों नेताओं के सुरों में नाराजगी भरी है।
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इसी भितरघात की आशंका को देखते हाईकमान ने कांग्रेस के राष्ट्रीय संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल को यह जिम्मेदारी दी गई है। वेणुगोपाल ने चारों नेताओं को साधने की कोशिशें शुरू कर दी हैं। संभावना है कि जल्द इन नेताओं को अलग-अलग दिल्ली दरबार में बुलाया जाए और हाईकमान के साथ उनकी मुलाकात के बाद एकजुटता का पाठ पढ़ाया जाए। अगर ये नेता कांग्रेस हाईकमान के दखल के बाद भी नहीं सध पाए तो यकीनन चारों सीटों पर कांग्रेस प्रत्याशियों को बड़े नुकसान की आशंका है। उधर, राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि टिकट कटने से नाराज नेताओं के पास अब कोई बड़ा मौका नहीं बचा है। उन्हें विधानसभा चुनाव दिख रहे हैं। वह हाईकमान की मान-मनौव्वल ही चाह रहे हैं और वह शुरू हो गई है। 

गुरुग्राम : यादव से ही निकलेगी राज की राह
गुरुग्राम से कांग्रेस ने अभिनेता व पंजाबी चेहरे राज बब्बर को मैदान में उतारा है। टिकट कटने से कैप्टन अजय यादव नाराज हैं और प्रदेश नेतृत्व को निशाने पर लिया है। कैप्टन अजय यादव रेवाड़ी से छह बार विधायक रहे हैं और पिछले लोकसभा चुनाव में साढ़े चार लाख से अधिक वोट लिए थे। भाजपा के राव इंद्रजीत सिंह के मुकाबले राज बब्बर के सामने कई चुनौतियां हैं। ऐसे में अगर कांग्रेस ने अजय यादव को नहीं साधा तो बब्बर के चुनाव पर खास असर पड़ेगा और एकतरफा अहीर मतदाता भाजपा के साथ जा सकते हैं।
 
फरीदाबाद : दलाल के समर्थन पर निर्भर होगा प्रताप का भविष्य
फरीदाबाद से टिकट नहीं मिलने से हुड्डा के समधी और जाट समाज के बड़े चेहरे करण दलाल खासे नाराज हैं। वह महापंचायत बुलाकर नाराजगी खुलकर जाहिर कर चुके हैं और निर्दलीय चुनाव का विकल्प भी रख चुके हैं। इधर, हुड्डा ने उनको मनाना शुरू कर दिया है। दलाल को विधानसभा चुनाव की तैयारी के लिए कहा गया है। हालांकि, अभी तक दलाल की तरफ से कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है। उनका बागी होकर सीधे तौर पर महेंद्र प्रताप की खिलाफत करने के चांस कम हैं। अगर दलाल को नहीं मनाया गया तो यहां महेंद्र प्रताप को बड़ा झटका लग सकता है, क्योंकि यहां पर जाट समाज के वोट करीब 4.50 लाख हैं।

भिवानी : चौधरी का साथ नहीं मिला तो राव को होगी मुश्किल
भिवानी में श्रुति चौधरी की टिकट काटकर विधायक राव दान सिंह को दी गई है। यहां पर किरण चौधरी और श्रुति चौधरी अपने समर्थकों के साथ बैठक करके एलान कर चुकी हैं कि जैसा राव दान सिंह ने 2019 में जिस तरह उनके साथ किया था, उससे भी जबरदस्त काम किया जाएगा। पिछले चुनाव में श्रुति को राव की विधानसभा महेंद्रगढ़ से कम वोट मिले थे। चौधरी बंसीलाल और चौधरी धर्मबीर की राजनीतिक लड़ाई रही है, ऐसे में किरण चौधरी कभी नहीं चाहेंगी कि धर्मबीर सिंह की मदद की जाए। इसलिए देर-सबेर वह कांग्रेस हाईकमान के फैसले पर ही मुहर लगाएंगी और राव का साथ देंगी। अगर बंसीलाल परिवार का साथ नहीं मिला तो राव के लिए सबसे बड़ी चुनौती अपने घर में ही होगी, क्योंकि यहां पर जाट समाज के वोट 5 लाख से अधिक हैं। 


हिसार : जेपी के लिए बांगर के चौधरी का साथ जरूरी
हिसार में हुड्डा के समर्थक जेपी फिर से मैदान में हैं। यहां पर भाजपा छोड़कर हाल ही में कांग्रेस का दामन थामने वाले चौधरी बीरेंद्र सिंह बेटे पूर्व सांसद बृजेंद्र सिंह की टिकट कटी है। जेपी का मुकाबला ताऊ देवीलाल के बेटे रणजीत चौटाला है, इसलिए उनको कड़ी टक्कर देने के लिए बांगर के चौधरी बीरेंद्र सिंह परिवार का साथ चाहेगा। खुद बीरेंद्र सिंह का हलका उचाना हिसार लोकसभा क्षेत्र में आता है, इसलिए अगर बीरेंद्र सिंह परिवार को नहीं साधा गया और वह खुलकर जेपी के साथ नहीं आए जेपी के लिए लोकसभा राह इतनी आसान नहीं होगा और उनको बड़े वोट बैंक से हाथ धोना पड़ सकता है।
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