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Chandigarh News: मेयर चुनाव से पहले कांग्रेस में मंथन, गठबंधन या अकेले मैदान में उतरने पर असमंजस
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चंडीगढ़। मेयर चुनाव को लेकर कांग्रेस में सियासी हलचल तेज हो गई है। पार्टी के सामने सबसे बड़ा सवाल आम आदमी पार्टी के साथ गठबंधन करने या फिर अकेले चुनाव लड़ने का है। इस मुद्दे पर कांग्रेस में एक राय नहीं बन पा रही है। पार्टी का एक बड़ा धड़ा गठबंधन के सख्त खिलाफ है जबकि कुछ नेता भाजपा को सत्ता से दूर रखने के लिए गठबंधन को जरूरी मान रहे हैं। इसी असमंजस को दूर करने के लिए 28 दिसंबर को कांग्रेस की अहम बैठक बुलाई गई है।
कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी इन दिनों विदेश में हैं। उनके लौटने के बाद 28 दिसंबर को होने वाली बैठक में गठबंधन पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। कांग्रेस नेतृत्व का मानना है कि यदि गठबंधन होता है तो इस बार मेयर पद कांग्रेस को मिलना चाहिए। कांग्रेस अध्यक्ष एचएस लक्की का कहना है कि दो बार मेयर पद आम आदमी पार्टी को मिल चुका है, ऐसे में इस बार संतुलन जरूरी है।
वहीं आम आदमी पार्टी भी मेयर पद के साथ सीनियर डिप्टी मेयर या डिप्टी मेयर पद की मांग कर रही है। आप प्रदेश अध्यक्ष विजयपाल सिंह का तर्क है कि चंडीगढ़ का सांसद आम आदमी पार्टी से है, इसलिए मेयर पद पर पहला दावा उनका बनता है। यहीं से गठबंधन की राह में सबसे बड़ा पेच फंसता नजर आ रहा है।
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भविष्य की राजनीति पर भी असर
कांग्रेस के सामने चुनौती सिर्फ मौजूदा मेयर चुनाव की नहीं बल्कि भविष्य की राजनीति की भी है। 2026 के अंत में होने वाले आम चुनाव और 2027 के पंजाब विधानसभा चुनाव को लेकर पार्टी रणनीति को लेकर सतर्क है। नेताओं का मानना है कि एक जगह गठबंधन और दूसरी जगह सीधी लड़ाई पार्टी के लिए मुश्किल खड़ी कर सकती है। पिछले मेयर चुनाव में हुई क्रॉस वोटिंग को लेकर भी कांग्रेस आज तक असमंजस में है। जांच समिति की रिपोर्ट आने के बावजूद नाम सार्वजनिक नहीं किए जा सके हैं। ऐसे में मेयर चुनाव से पहले कांग्रेस के लिए फैसला आसान नहीं है। गठबंधन हुआ तो भविष्य में नुकसान का डर है और अगर नहीं हुआ तो भाजपा को फायदा मिलने की आशंका जताई जा रही है।
चंडीगढ़ में सबसे मजबूत स्थिति में है कांग्रेस
पार्टी के एक वरिष्ठ नेता का दावा है कि मनीष तिवारी को फिलहाल भाजपा का मेयर बनने से रोकने के लिए आम आदमी पार्टी (आप) से गठबंधन पर सहमत कर लिया गया है। हालांकि, अगला लोकसभा चुनाव कांग्रेस अकेले लड़ने की रणनीति पर जोर दिया जा रहा है। कांग्रेस अध्यक्ष लक्की का कहना है कि संगठनात्मक स्तर पर चंडीगढ़ में कांग्रेस सबसे मजबूत स्थिति में है और पार्टी अधिक से अधिक पार्षद सदन में भेजने पर फोकस कर रही है।
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कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी इन दिनों विदेश में हैं। उनके लौटने के बाद 28 दिसंबर को होने वाली बैठक में गठबंधन पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। कांग्रेस नेतृत्व का मानना है कि यदि गठबंधन होता है तो इस बार मेयर पद कांग्रेस को मिलना चाहिए। कांग्रेस अध्यक्ष एचएस लक्की का कहना है कि दो बार मेयर पद आम आदमी पार्टी को मिल चुका है, ऐसे में इस बार संतुलन जरूरी है।
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वहीं आम आदमी पार्टी भी मेयर पद के साथ सीनियर डिप्टी मेयर या डिप्टी मेयर पद की मांग कर रही है। आप प्रदेश अध्यक्ष विजयपाल सिंह का तर्क है कि चंडीगढ़ का सांसद आम आदमी पार्टी से है, इसलिए मेयर पद पर पहला दावा उनका बनता है। यहीं से गठबंधन की राह में सबसे बड़ा पेच फंसता नजर आ रहा है।
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भविष्य की राजनीति पर भी असर
कांग्रेस के सामने चुनौती सिर्फ मौजूदा मेयर चुनाव की नहीं बल्कि भविष्य की राजनीति की भी है। 2026 के अंत में होने वाले आम चुनाव और 2027 के पंजाब विधानसभा चुनाव को लेकर पार्टी रणनीति को लेकर सतर्क है। नेताओं का मानना है कि एक जगह गठबंधन और दूसरी जगह सीधी लड़ाई पार्टी के लिए मुश्किल खड़ी कर सकती है। पिछले मेयर चुनाव में हुई क्रॉस वोटिंग को लेकर भी कांग्रेस आज तक असमंजस में है। जांच समिति की रिपोर्ट आने के बावजूद नाम सार्वजनिक नहीं किए जा सके हैं। ऐसे में मेयर चुनाव से पहले कांग्रेस के लिए फैसला आसान नहीं है। गठबंधन हुआ तो भविष्य में नुकसान का डर है और अगर नहीं हुआ तो भाजपा को फायदा मिलने की आशंका जताई जा रही है।
चंडीगढ़ में सबसे मजबूत स्थिति में है कांग्रेस
पार्टी के एक वरिष्ठ नेता का दावा है कि मनीष तिवारी को फिलहाल भाजपा का मेयर बनने से रोकने के लिए आम आदमी पार्टी (आप) से गठबंधन पर सहमत कर लिया गया है। हालांकि, अगला लोकसभा चुनाव कांग्रेस अकेले लड़ने की रणनीति पर जोर दिया जा रहा है। कांग्रेस अध्यक्ष लक्की का कहना है कि संगठनात्मक स्तर पर चंडीगढ़ में कांग्रेस सबसे मजबूत स्थिति में है और पार्टी अधिक से अधिक पार्षद सदन में भेजने पर फोकस कर रही है।