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राष्ट्रीय बदलाव करने के साथ कांग्रेस हाईकमान ने दिए राज्य स्तरीय फेरबदल के संकेत, तैयारी पूरी
Sat, 12 Sep 2020 10:00 AM IST
खुशबू गोयल
अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Sat, 12 Sep 2020 10:00 AM IST
सार
- हुड्डा और सैलजा प्रदेश तक सीमित, बदलेंगे राजनीतिक समीकरण
- नए प्रभारी के लिए आसान नहीं दिग्गजों के दिल मिलाने का काम
- रणदीप सुरजेवाला को मजबूती देने के दूरगामी संदेश
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : amar ujala
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विस्तार
कांग्रेस हाईकमान ने राष्ट्रीय स्तर पर संगठन में किए बदलाव के साथ राज्य स्तर पर अनेक संदेश भी दिए हैं। नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र हुड्डा व प्रदेशाध्यक्ष कुमारी सैलजा को हरियाणा तक ही सीमित रखा गया है। उन्हें किसी भी राष्ट्रीय कमेटी में जगह नहीं मिली है। पूर्व मंत्री रणदीप सुरजेवाला को मजबूत किया गया है, जिससे प्रदेश के राजनीतिक समीकरण बदलेंगे।
हाईकमान ने साफ संकेत दिए हैं कि हरियाणा के क्षेत्रीय क्षत्रपों का काम पार्टी को राज्य में मजबूत करने के साथ ही भविष्य में सत्ता में लाना है। इसलिए हुड्डा व सैलजा को नेता प्रतिपक्ष व प्रदेशाध्यक्ष की जिम्मेदारी को ही बखूबी निभाना होगा। इन दोनों पर अब पार्टी को नई दिशा देने के साथ ही कार्यकर्ताओं व नेताओं को एकजुट कर आगे बढ़ने का जिम्मा भी रहेगा।
सैलजा पर अब प्रदेश कांग्रेस में नए रक्त का संचार करने की जिम्मेदारी पूरी तरह से आ गई है। चूंकि, अब न तो वह सांसद हैं, न ही उनके पास राष्ट्रीय स्तर का कोई ओहदा है। ऐसे में अब उन्हें पूरा समय हरियाणा में ही देना होगा। हुड्डा पर विधायकों को संगठित रखने की पूरी जिम्मेदारी रहेगी। साथ ही गठबंधन सरकार को सदन से सड़क तक जनहित के मुद्दों पर घेरना होगा।
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रणदीप सुरजेवाला को कांग्रेस कार्य समिति, महासचिव प्रभारी व सहायक समिति में सदस्य बनाकर राष्ट्रीय स्तर पर अहम कार्य सौंपा गया है। जिससे वह देश में तो कांग्रेस को मजबूत करने का काम करेंगे ही हरियाणा में भी उनकी पैठ बढ़ेगी। नए प्रभारी एआईसीसी सचिव उत्तर प्रदेश से पूर्व विधायक विवेक बंसल के लिए हरियाणा कांग्रेस के सभी दिग्गजों के दिलों को मिलाना आसान नहीं होगा।
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हाईकमान ने साफ संकेत दिए हैं कि हरियाणा के क्षेत्रीय क्षत्रपों का काम पार्टी को राज्य में मजबूत करने के साथ ही भविष्य में सत्ता में लाना है। इसलिए हुड्डा व सैलजा को नेता प्रतिपक्ष व प्रदेशाध्यक्ष की जिम्मेदारी को ही बखूबी निभाना होगा। इन दोनों पर अब पार्टी को नई दिशा देने के साथ ही कार्यकर्ताओं व नेताओं को एकजुट कर आगे बढ़ने का जिम्मा भी रहेगा।
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सैलजा पर अब प्रदेश कांग्रेस में नए रक्त का संचार करने की जिम्मेदारी पूरी तरह से आ गई है। चूंकि, अब न तो वह सांसद हैं, न ही उनके पास राष्ट्रीय स्तर का कोई ओहदा है। ऐसे में अब उन्हें पूरा समय हरियाणा में ही देना होगा। हुड्डा पर विधायकों को संगठित रखने की पूरी जिम्मेदारी रहेगी। साथ ही गठबंधन सरकार को सदन से सड़क तक जनहित के मुद्दों पर घेरना होगा।
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रणदीप सुरजेवाला को कांग्रेस कार्य समिति, महासचिव प्रभारी व सहायक समिति में सदस्य बनाकर राष्ट्रीय स्तर पर अहम कार्य सौंपा गया है। जिससे वह देश में तो कांग्रेस को मजबूत करने का काम करेंगे ही हरियाणा में भी उनकी पैठ बढ़ेगी। नए प्रभारी एआईसीसी सचिव उत्तर प्रदेश से पूर्व विधायक विवेक बंसल के लिए हरियाणा कांग्रेस के सभी दिग्गजों के दिलों को मिलाना आसान नहीं होगा।
सांसद दीपेंद्र हुड्डा, कुलदीप बिश्नोई विशेष आमंत्रित सदस्य
हरियाणा के पूर्व मंत्री व एआईसीसी के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला को कर्नाटक प्रभारी की बड़ी जिम्मेदारी मिली है। उन्हें अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी का महासचिव भी बनाया गया है। सांसद दीपेंद्र हुड्डा व आदमपुर से विधायक कुलदीप बिश्नोई एआईसीसी के विशेष आमंत्रित सदस्य होंगे।
आजाद के कार्यकाल में चरम पर रही गुटबाजी
आजाद पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र हुड्डा के करीबी थे। पूर्व सीएम कमलनाथ के बाद आजाद को हरियाणा का प्रभारी लगाया गया था, लेकिन न तो वह पार्टी को सत्ता में ला पाए, न ही गुटबाजी कम कर पाए। उनके समय में गुटबाजी चरम पर रही, जिसे कांग्रेस हाईकमान ने कुमारी सैलजा को प्रदेश अध्यक्ष बनाकर खत्म करने का प्रयास किया। बावजूद इसके आजाद हरियाणा में पार्टी संगठन को खड़ा नहीं कर पाए। न ही आज तक जिलाध्यक्ष बने न प्रदेश कार्यकारिणी गठित हो पाई। आजाद को दिल्ली की राजनीति से ही फुर्सत नहीं थी।
बंसल के सामने सबको एकजुट करने की चुनौती
विवेक बंसल अब हरियाणा में कांग्रेस को कैसे एक मंच पर लाने के साथ संगठन में नई जान फूंकते हैं, ये देखना होगा। चूंकि, प्रदेश कांग्रेस के अनेक पावर सेंटर हैं। हरियाणा विधानसभा का पिछला चुनाव न जीत सके सुरजेवाला को सोनिया गांधी व राहुल गांधी के साथ वफादारी का इनाम मिला है। उन्हें कर्नाटक जैसे बड़े राज्य की जिम्मेदारी बतौर महासचिव प्रभारी मिली है। इसके अलावा वह सोनिया गांधी को कांग्रेस वर्किंग कमेटी में उठने वाले मुद्दों पर सहायता करने के लिए गठित सहायक समिति में भी शामिल किए गए हैं।
आजाद के कार्यकाल में चरम पर रही गुटबाजी
आजाद पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र हुड्डा के करीबी थे। पूर्व सीएम कमलनाथ के बाद आजाद को हरियाणा का प्रभारी लगाया गया था, लेकिन न तो वह पार्टी को सत्ता में ला पाए, न ही गुटबाजी कम कर पाए। उनके समय में गुटबाजी चरम पर रही, जिसे कांग्रेस हाईकमान ने कुमारी सैलजा को प्रदेश अध्यक्ष बनाकर खत्म करने का प्रयास किया। बावजूद इसके आजाद हरियाणा में पार्टी संगठन को खड़ा नहीं कर पाए। न ही आज तक जिलाध्यक्ष बने न प्रदेश कार्यकारिणी गठित हो पाई। आजाद को दिल्ली की राजनीति से ही फुर्सत नहीं थी।
बंसल के सामने सबको एकजुट करने की चुनौती
विवेक बंसल अब हरियाणा में कांग्रेस को कैसे एक मंच पर लाने के साथ संगठन में नई जान फूंकते हैं, ये देखना होगा। चूंकि, प्रदेश कांग्रेस के अनेक पावर सेंटर हैं। हरियाणा विधानसभा का पिछला चुनाव न जीत सके सुरजेवाला को सोनिया गांधी व राहुल गांधी के साथ वफादारी का इनाम मिला है। उन्हें कर्नाटक जैसे बड़े राज्य की जिम्मेदारी बतौर महासचिव प्रभारी मिली है। इसके अलावा वह सोनिया गांधी को कांग्रेस वर्किंग कमेटी में उठने वाले मुद्दों पर सहायता करने के लिए गठित सहायक समिति में भी शामिल किए गए हैं।