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Rajya Sabha Election: हरियाणा से कांग्रेस के दीपेंद्र हुड्डा ने भरा नामांकन, सैलजा का टिकट कटा
Fri, 13 Mar 2020 02:50 PM IST
खुशबू गोयल
अमर उजाला नेटवर्क, चंडीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Fri, 13 Mar 2020 02:50 PM IST
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नामांकन भरते दीपेंद्र सिंह हुड्डा
- फोटो : अमर उजाला
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राज्यसभा चुनाव 2020 के लिए हरियाणा से रोहतक से कांग्रेस के पूर्व सांसद रहे दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने नामांकन भरा। उनके नाम की घोषणा शुक्रवार देर शाम की गई थी। दीपेंद्र के साथ उनके पिता पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा भी नजर आए।
दीपेंद्र हुड्डा
- तीन बार रोहतक से लोकसभा सांसद रहे
- हुड्डा परिवार की तीसरी पीढ़ी के नेता
- जन्म 4 जनवरी 1978
- प्रखर वक्ता, मुद्दों की सही पहचान
- लोकसभा चुनाव में भाजपा उम्मीदवार अरविंद शर्मा ने बहुत कम अंतर से हराया
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दीपेंद्र हुड्डा
- तीन बार रोहतक से लोकसभा सांसद रहे
- हुड्डा परिवार की तीसरी पीढ़ी के नेता
- जन्म 4 जनवरी 1978
- प्रखर वक्ता, मुद्दों की सही पहचान
- लोकसभा चुनाव में भाजपा उम्मीदवार अरविंद शर्मा ने बहुत कम अंतर से हराया
कुमारी सैलजा मजबूत दावेदारी जता रही थीं
मध्यप्रदेश के युवा तुर्क ज्योतिरादित्य सिंधिया के कांग्रेस छोड़ने के बाद पार्टी को हरियाणा में युवा दीपेंद्र पर भरोसा जताना पड़ा। कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष व राज्यसभा सांसद कुमारी सैलजा मजबूत दावेदारी जता रही थीं, एआईसीसी मीडिया प्रभारी रणदीप सुरजेवाला भी संसद के उच्च सदन में पहुंचने के लिए जुगाड़ भिड़ा रहे थे, लेकिन दोनों ही टिक पाने में सफल नहीं हुए।
नेता प्रतिपक्ष व दीपेंद्र के पिता भूपेंद्र सिंह हुड्डा पूर्व सांसद बेटे को राज्यसभा पहुंचाने के लिए तगड़ी किलेबंदी किए हुए थे। उन्होंने सैलजा की दावेदारी का खुला विरोध किया। वह यह कहने से भी नहीं हिचके कि प्रदेशाध्यक्ष पद के साथ-साथ राज्यसभा सांसद सैलजा को नहीं बनाया जाना चाहिए।
उन्होंने एक व्यक्ति, एक पद के सिद्धांत का हवाला देते हुए युवा दीपेंद्र को राज्यसभा भेजने की बिसात बिछा डाली। पार्टी हाईकमान उनकी दलीलों को दरकिनार नहीं कर पाया और शह-मात के खेल में हुड्डा बाजी मार गए।
नेता प्रतिपक्ष व दीपेंद्र के पिता भूपेंद्र सिंह हुड्डा पूर्व सांसद बेटे को राज्यसभा पहुंचाने के लिए तगड़ी किलेबंदी किए हुए थे। उन्होंने सैलजा की दावेदारी का खुला विरोध किया। वह यह कहने से भी नहीं हिचके कि प्रदेशाध्यक्ष पद के साथ-साथ राज्यसभा सांसद सैलजा को नहीं बनाया जाना चाहिए।
उन्होंने एक व्यक्ति, एक पद के सिद्धांत का हवाला देते हुए युवा दीपेंद्र को राज्यसभा भेजने की बिसात बिछा डाली। पार्टी हाईकमान उनकी दलीलों को दरकिनार नहीं कर पाया और शह-मात के खेल में हुड्डा बाजी मार गए।
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विधायकों का अंकगणित भी हुडडा के साथ
हरियाणा विधानसभा में कुल 90 सीटों में से कांग्रेस के 31 विधायक हैं। इनमें अंक गणित हुडडा के साथ है। वह बुधवार को ही दिल्ली में 24 विधायक जुटाकर शक्ति प्रदर्शन कर चुके हैं। उनके एक समर्थक विधायक श्रीकृष्ण हुड्डा उपचाराधीन चल रहे हैं। जजपा के साथ ही कुछ निर्दलीय भी हुड्डा के संपर्क में हैं।
इससे दीपेंद्र की राज्यसभा पहुंचने की राह कठिन नहीं दिख रही। 31 कांग्रेस विधायकों में तीन ही सैलजा समर्थक माने जाते हैं। अगर वे क्रॉस वोटिंग करते भी हैं तो भूपेंद्र हुड्डा जजपा व निर्दलीय विधायकों में से समर्थन जुटा लेंगे। भाजपा ने अभी तक अपने तीसरे उम्मीदवार की घोषणा नहीं की है। वह कांग्रेस उम्मीदवार के इंतजार में थी।
सूत्रों के अनुसार दीपेंद्र हुड्डा के उम्मीदवार बनने पर भाजपा उम्मीदवार नहीं भी उतार सकती है। हुड्डा विरोधी खेमे से उम्मीदवार आने पर भाजपा क्रॉस वोटिंग के जरिए नैया पार लगाने की तैयारी में थी।
इससे दीपेंद्र की राज्यसभा पहुंचने की राह कठिन नहीं दिख रही। 31 कांग्रेस विधायकों में तीन ही सैलजा समर्थक माने जाते हैं। अगर वे क्रॉस वोटिंग करते भी हैं तो भूपेंद्र हुड्डा जजपा व निर्दलीय विधायकों में से समर्थन जुटा लेंगे। भाजपा ने अभी तक अपने तीसरे उम्मीदवार की घोषणा नहीं की है। वह कांग्रेस उम्मीदवार के इंतजार में थी।
सूत्रों के अनुसार दीपेंद्र हुड्डा के उम्मीदवार बनने पर भाजपा उम्मीदवार नहीं भी उतार सकती है। हुड्डा विरोधी खेमे से उम्मीदवार आने पर भाजपा क्रॉस वोटिंग के जरिए नैया पार लगाने की तैयारी में थी।