'शराब पिलाने वालों को ही मिलते हैं वोट'
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अब चुनाव जीतने के लिए शराब और पैसे की जरूरत है। जनता ईमानदार और लोगों की सेवा करने वाले नेता को वोट नहीं देती बल्कि अपने वोट बेचती है। शराब और पैसे से वोट खरीदकर जीतने से अच्छा तो मैं बिना कोई चुनाव लड़े लोगों की सेवा करना पसंद करूंगा।’
यह बात बादली से पूर्व विधायक नरेश शर्मा ने प्रीति गार्डन में कांग्रेस कार्यकर्ताओं की मीटिंग के दौरान कही। उन्होंने कहा कि अब भविष्य में वे किसी भी स्तर का कोई भी चुनाव नहीं लड़ेंगे। बिना चुनाव लड़े ही लोगों की सेवा करेंगे और कांग्रेस के सिपाही बने रहेंगे।
पूर्व विधायक ने मीटिंग के बाद अमर उजाला संवाददाता से बातचीत में कहा कि सबसे कम उम्र में वे बादली के सरपंच बने थे। तब से लोगों की सेवा करते आ रहे हैं।
पहले चौधरी देवीलाल के साथ और उसके बाद 1991 से पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र हुड्डा के साथ सक्रिय राजनीति में रहे। इस दौरान शराबबंदी के आंदोलन में भी हिस्सा लिया और इसके लिए जेल भी गए। अब चुनाव जीतने के लिए लोगों को वही शराब दूं, यह मेरे बस की बात नहीं है।
एक की जान बचाई, उसने भी नहीं दिया साथ
नरेश शर्मा ने बताया कि एक घटना ने उन्हें बहुत दुखी किया। चुनाव नहीं लड़ने का फैसला लेने में उसकी अहम भूमिका है। उन्होंने बताया कि लगभग तीन साल पहले वे दादरी से बादली आ रहे थे। रास्ते में एक सड़क दुर्घटना में एक युवक गंभीर रूप से घायल हो गया था और उसका हाथ टूट गया था।
उन्होंने गाड़ी से उतरकर अपना कुर्ता निकाला और उस युवक के हाथ पर बांध दिया। उसके बाद युवक को अपनी गाड़ी में वे दादरी सिविल अस्पताल में ले गए। वहां से उसे रोहतक रेफर किया गया तो विधायक ने अपने बेटे को बुलाया और उसे रोहतक पीजीआई भेजा। उसके इलाज का खर्चा भी दिया।
युवक को वहां पर दो बोतल खून की जरूरत पड़ी तो एक बोतल खून बेटे ने और एक उसके साथी ने दिया। बाद में पता चला कि वह युवक बादली हलके से ही था। इस बार चुनाव के दौरान वह युवक एक बूथ पर बीजेपी का एजेंट बना हुआ था।
इस घटना के बाद लगा कि लोग केवल अपने फायदे के लिए ही राजनेताओं के साथ रहते हैं, जो उनका निजी भला करता है, उसके साथ ही रहते हैं।