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Haryana Election Result: कांग्रेस का नहीं हुआ 'मंगल', हुड्डा को फ्री हैंड करने का फॉर्मूला पड़ा उल्टा

Tue, 08 Oct 2024 04:36 PM IST
अंकेश ठाकुर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: अंकेश ठाकुर Updated Tue, 08 Oct 2024 04:36 PM IST
सार

लोकसभा चुनाव के बाद से हरियाणा में कांग्रेस के पक्ष में बने माहौल को पार्टी संभाल नहीं पाई। गुटबाजी और संगठन की कमी आम चुनाव में कांग्रेस के लिए भारी पड़ गई। वहीं हुड्डा को फ्री हैंड करने का फॉर्मूला भी उल्टा साबित हुआ है। 

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Congress defeat in assembly election Bhupender singh hooda free hand fammulla not working for party
haryana election results - फोटो : पीटीआई

विस्तार

हरियाणा आम चुनाव में कांग्रेस का मंगल नहीं हो पाया। पार्टी की हार की कई वजह रही हैं। लोकसभा चुनाव के बाद से हरियाणा में कांग्रेस के पक्ष में बने माहौल को कांग्रेस पार्टी संभाल नहीं पाई। कांग्रेस की गुटबाजी और संगठन की कमी इस माहौल पर भारी पड़ गई। टिकट वितरण से लेकर तमाम मामलों को लेकर हाईकमान की तरफ से पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा को फ्री हैंड करने का फॉर्मूला भी कांग्रेस पार्टी के लिए उल्टा पड़ा। 

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खासकर सांसद कुमारी सैलजा ने इसको इसको खासी नाराजगी जताई और उन्होंने खुलकर इसे जाहिर भी किया। सैलजा 10 से 15 सीटों पर ही प्रचार के लिए निकली, दूसरे बड़े नेता चौधरी बीरेंद्र सिंह, रणदीप सुरजेवाला और कैप्टन अजय यादव अपने अपने पुत्रों के चुनाव में हलकों तक ही सीमित रहे। इसको लेकर प्रदेश में एक संदेश ये चला गया कि हुड्डा ही कांग्रेस के सीएम के अगले चेहरे हैं। पहले से ही खेमों में बंटी कांग्रेस को इसका नुकसान हुआ है और पूरा दारोमदार हुड्डा पर आकर टिक गया और दूसरे नेताओं ने प्रदेशभर में प्रचार नहीं किया।
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तीन प्रदेशाध्यक्ष आए, लेकिन संगठन नहीं बना पाए
हरियाणा में कांग्रेस का पिछले दस साल से संगठन नहीं है। हालांकि, प्रदेशाध्यक्ष के तौर पर तीन अध्यक्ष आ चुके हैं। इनमें अशोक तंवर, कुमारी सैलजा से लेकर उदयभान के नाम शामिल हैं। गुटबाजी के चलते आज तक कांग्रेस अपने जिलाध्यक्ष और ब्लाक अध्यक्ष भी तय नहीं कर पाई है। लोकसभा चुनाव से पहले हाईकमान को सूची भेजी गई थी, लेकिन आज तक हाईकमान इसे जारी करने की हिम्मत नहीं कर पाया है। संगठन नहीं होने के चलते कांग्रेस के बस्ते पकड़ने तक वालों की कमी रही, दूसरा भाजपा का मजबूत संगठन बूथों पर तैनात रहा।

मुद्दे भुनाने में भी कमजोर रही कांग्रेस
किसान, पहलवान और जवान का मुद्दा भी कांग्रेस भुनाने में कामयाब नहीं रही। इनके अलावा, कांग्रेस के खिलाफ भाजपा ने पर्ची खर्ची का मुद्दा बनाया और इसको जमकर भूनाया भी। कांग्रेस पर्ची खर्ची की काट नहीं कर पाई, बल्कि कांग्रेस के प्रत्याशियों ने खुले तौर पर यह बयान दिए कि कोटे से नौकरियां मिलेंगी, इसका प्रदेशभर में गलत संदेश गया और भाजपा ने इसी मुद्दे को भुनाया। कांग्रेस मैरिट मिशन को लेकर कोई ठोस रणनीति नहीं बना पाई। दूसरा, राहुल गांधी ने लोकसभा चुनावों की तर्ज पर ही संविधान के मुद्दे को भुनाने की कोशिश की, लेकिन लोगों में यह फार्मूला इस बार नहीं चला।

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