{"_id":"60c275d88ebc3e9a1d20a801","slug":"conflict-may-increase-over-the-merger-of-departments-in-pu-way-will-have-to-be-found-chandigarh-news-pkl416277216","type":"story","status":"publish","title_hn":"पीयू में विभागों के विलय पर बढ़ सकती है तनातनी, निकालना होगा रास्ता","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पीयू में विभागों के विलय पर बढ़ सकती है तनातनी, निकालना होगा रास्ता
विज्ञापन
चंडीगढ़। पंजाब विश्वविद्यालय नैक के मानकों को पूरा करने के लिए अब दिन-रात काम कर रहा है। इसी में शामिल है छोटे विभागों का बड़े विभागों में विलय। इसे लेकर विभागों के बीच तनातनी बढ़ सकती है। पीयू अब इसका रास्ता निकालने में जुटी है, क्योंकि सभी को साथ लेकर चलना होगा, अन्यथा यह प्रकरण राजनीति का रूप लेगा। हालांकि पहले इस पर काफी राजनीति हो चुकी है।
पीयू में विभागों की संख्या 70 से अधिक है। इन विभागों में कई को सेंटर का नाम दिया गया है। नैक की टीम ने जब दौरा किया तो इस पर आपत्ति जताई थी। उसका कहना था कि विज्ञान के विभाग एक ही छत के नीचे होने चाहिए। वहीं, अन्य विभागों के विलय का काम भी उसी तरह हो। ऐसा करने से ग्रेडिंग पर प्रभाव पड़ेगा। जब ग्रेडिंग बेहतर आएगी तो पीयू को फंड आदि सुविधाएं मिलेंगी। पीयू इसे लेकर पांच साल से जुटी हुई है, लेकिन विलय का काम पूरा नहीं कर पाई।
इस तरह बनी थी योजना
पूर्व वीसी प्रो. अरुण कुमार ग्रोवर ने भी यह प्रस्ताव तैयार करवाया था। उस दौरान भी इस प्रस्ताव में पेंच लगा दिए गए थे। कुछ माह पूर्व फिर पीयू प्रशासन ने इसे हरी झंडी देने की योजना बनाई, लेकिन फिर से यह विवादों में घिर गया। कुछ शिक्षकों ने विरोध किया तो कुछ अन्य लोगों ने सुझाव भी दिए। ऐसे में पीयू प्रशासन ने यह प्रस्ताव टाल दिया था। कई बार इसेलेकर बैठक हुई, लेकिन सफलता नहीं मिल पाई। अब पीयू इस प्रस्ताव को लेकर आगे बढ़ रही है। अंदेशा है कि छोटे विभाग इसे लेकर आपत्तियां दायर करेंगे। उसके लिए समाधान खोजने होंगे।
विज्ञापन
उर्दू इस बार विदेशी भाषा में विलय नहीं होगी
पीयू प्रशासन ने पिछले दिनों उर्दू को विदेशी भाषा में विलय कर दिया था। इसे लेकर घमासान मचा और पंजाब के सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह को दखल देना पड़ा। यह मामला पीयू ने वापस लिया था। इस बार पीयू प्रशासन इस कोर्स को विदेशी भाषा में शामिल नहीं करेगा। सूत्रों का कहना है कि इसकी योजना पूरी बन गई है। अगले माह तक विलय का काम पूरा हो सकता है। इसके लिए बनाई गई कमेटी की बैठक होगी। उसमें उन बिंदुओं पर चर्चा होगी, जिन पर पहले विरोध हुआ है, उन्हीं का कमेटी निस्तारण करेगी।
विज्ञापन
पीयू में विभागों की संख्या 70 से अधिक है। इन विभागों में कई को सेंटर का नाम दिया गया है। नैक की टीम ने जब दौरा किया तो इस पर आपत्ति जताई थी। उसका कहना था कि विज्ञान के विभाग एक ही छत के नीचे होने चाहिए। वहीं, अन्य विभागों के विलय का काम भी उसी तरह हो। ऐसा करने से ग्रेडिंग पर प्रभाव पड़ेगा। जब ग्रेडिंग बेहतर आएगी तो पीयू को फंड आदि सुविधाएं मिलेंगी। पीयू इसे लेकर पांच साल से जुटी हुई है, लेकिन विलय का काम पूरा नहीं कर पाई।
विज्ञापन
इस तरह बनी थी योजना
पूर्व वीसी प्रो. अरुण कुमार ग्रोवर ने भी यह प्रस्ताव तैयार करवाया था। उस दौरान भी इस प्रस्ताव में पेंच लगा दिए गए थे। कुछ माह पूर्व फिर पीयू प्रशासन ने इसे हरी झंडी देने की योजना बनाई, लेकिन फिर से यह विवादों में घिर गया। कुछ शिक्षकों ने विरोध किया तो कुछ अन्य लोगों ने सुझाव भी दिए। ऐसे में पीयू प्रशासन ने यह प्रस्ताव टाल दिया था। कई बार इसेलेकर बैठक हुई, लेकिन सफलता नहीं मिल पाई। अब पीयू इस प्रस्ताव को लेकर आगे बढ़ रही है। अंदेशा है कि छोटे विभाग इसे लेकर आपत्तियां दायर करेंगे। उसके लिए समाधान खोजने होंगे।
विज्ञापन
उर्दू इस बार विदेशी भाषा में विलय नहीं होगी
पीयू प्रशासन ने पिछले दिनों उर्दू को विदेशी भाषा में विलय कर दिया था। इसे लेकर घमासान मचा और पंजाब के सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह को दखल देना पड़ा। यह मामला पीयू ने वापस लिया था। इस बार पीयू प्रशासन इस कोर्स को विदेशी भाषा में शामिल नहीं करेगा। सूत्रों का कहना है कि इसकी योजना पूरी बन गई है। अगले माह तक विलय का काम पूरा हो सकता है। इसके लिए बनाई गई कमेटी की बैठक होगी। उसमें उन बिंदुओं पर चर्चा होगी, जिन पर पहले विरोध हुआ है, उन्हीं का कमेटी निस्तारण करेगी।