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चंडीगढ़: देखभाल के नाम पर जानवरों के साथ अत्याचार की हाईकोर्ट में शिकायत, यूटी प्रशासन को नोटिस जारी

Fri, 29 Oct 2021 09:37 AM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Fri, 29 Oct 2021 09:37 AM IST
सार

चंडीगढ़ में काम कर रही सोसायटी फॉर प्रिवेंशन ऑफ क्रुएलिटी टू एनिमल (एसपीसीए) के काम में बहुत खामियां मिली हैं। एसपीसीए में तैनात सुपरवाइजर व फील्ड इंस्पेक्टर योग्य व प्रशिक्षित नहीं है। एसपीसीए में जानवरों के कल्याण के लिए कार्य करने वाले संगठन का कोई सदस्य नहीं है।

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Complaint in Punjab and Haryana High Court Against atrocities on Animals in Name of Care
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

चंडीगढ़ में बीमार कुत्ते-बिल्लियों की देखभाल के लिए बनाए गए केंद्र की दशा जेल से भी बदतर है। पशु प्रेमी इसे देख न सकें इसलिए उनके यहां पर आने पर भी रोक लगा दी गई है। पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट ने इससे जुड़ी याचिका पर यूटी प्रशासन व अन्य को नोटिस जारी कर पूछा है कि क्यों न आदेश पर रोक लगा दी जाए।

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याचिका दाखिल करते हुए अभिषेक भातेजा ने हाईकोर्ट को बताया कि चंडीगढ़ में जानवरों पर अत्याचार रोकने के लिए सोसायटी फॉर प्रिवेंशन ऑफ क्रुएलिटी टू एनिमल (एसपीसीए) है। यह एनिमल वेलफेयर बोर्ड ऑफ इंडिया से मान्यता प्राप्त है। कई शिकायतों के बाद एनिमल वेलफेयर बोर्ड ऑफ इंडिया ने अपनी एक रिपोर्ट सौंपी थी जिसमें एसपीसीए के कार्य में बहुत सी खामियां हैं। एसपीसीए में जो सुपरवाइजर व फील्ड इंस्पेक्टर हैं, वे योग्य, कुशल व प्रशिक्षित नहीं है। इसके साथ ही एसपीसीए में जानवरों के कल्याण के लिए कार्य करने वाले संगठन का कोई सदस्य नहीं है। 

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जानवरों को रखने के लिए अलग-अलग व्यवस्था तक नहीं है। उनकी देखभाल के नाम पर उन्हें एक कमरे में रखा जाता है जहां पक्का फर्श होता है और कमरे में सूरज की रोशनी तक नहीं आती। यहां पर जिस तरह का माहौल है उससे अंधे जानवरों की मृत्यु दर बढ़ती जा रही है। इलाज के लिए नॉन वेटरिनरी कर्मियों को जिम्मेदारी दी गई है और हैरानी की बात तो यह है कि यह कर्मी सर्जरी तक का काम खुद कर रहे हैं।


यहां पर पशु प्रेमी आकर इन जानवरों की देखभाल करना चाहते हैं लेकिन अब आदेश जारी करते हुए इनके किसी भी समय यहां आने पर रोक लगा दी गई है। याची पक्ष की दलीलों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने याचिका पर केंद्र सरकार, यूटी प्रशासन व अन्य प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। साथ ही पूछा है कि क्यों न पशु प्रेमियों को रोकने के आदेश पर रोक लगा दी जाए।

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