हाईकोर्ट ने अपनाया कड़ा रुख, सुखबीर और बिक्रम मजीठिया को होना होगा पेश, ये है मामला
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श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी मामले की जांच कर चुके रिटायर्ड जस्टिस रंजीत सिंह द्वारा दी गई शिकायत पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए सुखबीर बादल और बिक्रमजीत सिंह मजीठिया को तलब कर लिया है। हाईकोर्ट ने 11 जुलाई को उन्हें खुद हाजिर होकर जवाब दाखिल करने के आदेश दिए हैं।
सोमवार को सुनवाई शुरू होते ही हाईकोर्ट ने पूछा कि दोनों क्यों नहीं पेश हुए। इस पर उनकी ओर से पेश हुए सीनियर एडवोकेट आरएस चीमा ने कहा कि यह एक शिकायत पर सुनवाई का मामला है और इसमें दोनों को पेश होने की जरूरत नहीं है। वैसे भी अभी तक सुखबीर बादल को नोटिस सर्व नहीं हुआ है। हाईकोर्ट दोनों से जवाब तलब कर उन्हें पेश होने से छूट दे सकती है।
सोमवार को तीन बार चली सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने दोनों को सोमवार को पेश होने की छूट देते हुए अब अगली सुनवाई पर पेश होने के निर्देश दिए हैं। हाईकोर्ट ने पिछली सुनवाई पर दोनों को सीआरपीसी की धारा-204 के तहत नोटिस जारी किया था। इस धारा के तहत दोनों को सोमवार को हाईकोर्ट में पेश होना था।
यह आदेश रिटायर्ड जस्टिस रंजीत सिंह की ओर से उनके और आयोग के खिलाफ पंजाब के पूर्व उपमुख्यमंत्री सुखबीर बादल और पूर्व मंत्री बिक्रमजीत सिंह मजीठिया के खिलाफ हाईकोर्ट में दायर आपराधिक शिकायत पर सुनवाई करते हुए दिए गए थे।
जस्टिस रंजीत सिंह ने हाईकोर्ट को भेजी शिकायत में सुखबीर बादल और बिक्रमजीत सिंह मजीठिया द्वारा उन पर और उनकी लॉ की डिग्री पर की गई आपत्तियों और टिप्पणियों का जिक्र किया है। इसके अलावा आयोग और उनके खिलाफ विभिन्न समाचार पत्रों और टीवी चैनलों पर दिए गए इंटरव्यू का भी हवाला दिया है।